»   » टॉयलेट एक प्रेम कथा रिव्यू...सेकेंड हाफ हजम करना नामुमकिन..उम्मीदों पर फेल

टॉयलेट एक प्रेम कथा रिव्यू...सेकेंड हाफ हजम करना नामुमकिन..उम्मीदों पर फेल

Written By: Shweta
Subscribe to Filmibeat Hindi
Rating:
2.5/5

कास्ट- अक्षय कुमार, भूमि पेडनेकर, दिव्येंदु शर्मा, अनुपम खेर, सुधीर पांडे
डायरेक्टर - श्री नारायण सिंह
प्रोड्यूसर - अरुणा भाटिया, शीतल भाटिया, प्रेरणा अरोड़ा, अर्जुन एन कपूर, हितेश ठक्कर
शानदार पॉइंट - परफॉर्मेंस, कॉन्सेप्ट
निगेटिव पॉइंट - टॉयलेट एक प्रेम कथा का दूसरा हाफ बहुत अच्चा नहीं है और 160 मिनट की फिल्म देख पाना नामुमकिन होता है।
शानदार मोमेंट - भूमि पेडनेकर के सीन्स फिल्म में काफी मजेदार हैं।

प्लॉट

प्लॉट

मध्यम आयुवर्ग का केशव (अक्षय कुमार) साइकिल स्टोर चलाता है और उसकी शादी एक भैंस से करा दी जाती है क्योंकि उसके पिता पंडितजी (सुधीर पांडे) को लगता है कि ऐसा करने ग्रह नक्षत्र का दोष ठीक हो जाएगा। लेकिन बात यही खत्म नहीं होती, पंडित जी अपने बेटे एक दो अंगुठे वाली बहु चाहते हैं।इन सबके पबीत केशव की नजर कॉलेज टॉपर जया पर पड़ती है और इकतरफा प्यार हो जाता है। जया को पटाने की तमाम कोशिशों के बाद आखिर जया भी अपने प्यार का इजहार करती है और जुगाड़ लगाकर दोनों की शादी भी हो जाती है।

प्लॉट

प्लॉट

इन सबके बीच समस्याएं तब आनी शुरू होती है जब नई नवेली दुल्हन को पता चलता है कि टॉयलेट जाने के लिए उसे हर दिना लोटा पार्टी का हिस्सा बनना होगा और इसका कारण है कि केशव और उसके गांव में किसी भी घर में टॉयलेट नहीं है। इस कारण के साथ जया केशव से तलाक लेना चाहती है ।पूरी फिल्म इसके बाद रुढिवादी सोच और पुराने ख्यालातों पर दिखाई गई है।

डायरेक्शन

डायरेक्शन

डेब्यू डायरेक्टर श्री नारायण सिंह के पास वाकई काफी अच्छा कॉन्सेप्ट था लेकिन बदकिस्मती से उसे वो स्क्रीन पर उस खूबसूरती के साथ नहीं परोस पाए। हालांकि उन्होंने पुराने विश्वास, दमदार डायलोग और कॉमेडी को बखूबी दिखा पाए हैं।फिल्म का पहला हाफ काफी मजेदार है।केशव और जया की केमेस्ट्री को आप इंज्वॉय करेंगे। लेकिन इंटरवल के बाद प्लॉट में काफी बातें दुहराई गई हैं और काफी ज्यादा लेक्चर दिखाया गया है और सरकार को अच्छा दिखाने की कोशिश की गई है। ताबूत में आखिरी कील तब ठोंक दी जाती है जब आप एक कैरेक्टर से डिमोनेटाइजेशन
शब्द सुनते हैं और जानते हैं कि आया कहां से है। दुख की बात है फिल्म एक सामाजिक कटाक्ष पर शुरू होती है लेकिन खत्म प्रोपेगैंडा की तरह होती है।

परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

अक्षय कुमार ने फिल्म में शानदार परफॉर्मेंस दी है और उनकी कॉमेडी भी आपका दिल जीत लेगी। वही टॉयलेट एक प्रेम कथा भूमि पेडनेकर की दूसरी फिल्म है और हर किसी का दिल जीत रही हैं। वो कैरेक्टर में इस कदर रहती हैं कि एक पल के लिए भी कैरेक्टर से नहीं निकलती हैं।दिव्येंदू शर्मा और सुधीर पांडे ने भी अपने हिस्से का काम बहुत ही अच्छे से किया है। अनुपम खेर का किरदार मजबूती के साथ नहीं लिखा गया था लेकिन फिर भी वो कई जगहों पर हंसाने में कामयाब रहते हैं। आखिरी बात सना खान का कैमियो क्या सोच कर लिखा गया था ये अगर आपको समझ आए तो हमें भी जरूर बताइएगा।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

फिल्म की लंबाई फिल्म का सबसे बड़ा विलेन है। फिल्म की एडिटिंग पर और भी काम किया जा सकता था। अंशुमन महालय की सिनेमेटोग्राफी भी कमाल की है।

म्यूजिक

म्यूजिक

हंस मत पगली और गोरी तू लठमार अच्छे गाने हैं जिसे आप गुनगुनाते हुए बाहर निकलेंगे। बाकी गाने कुछ खास इंप्रेसिव नहीं है।

Verdict

Verdict

पर्दा सोच से हटाकर शौच पर लगाने का टाइम आ गया है - टॉयलेट एक प्रेम कथा कॉन्सेप्ट बिल्कु सही है लेकिन फिल्म कई बातों पर फेल करती है और आपको निराश करेगी लेकिन बेशक एक बार
फिल्म देकी जा सकती है।

English summary
Toilet Ek prem Katha Movie review story plot and rating.
Please Wait while comments are loading...