टॉयलेट एक प्रेम कथा रिव्यू...सेकेंड हाफ हजम करना नामुमकिन..उम्मीदों पर फेल
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शानदार पॉइंट - परफॉर्मेंस, कॉन्सेप्ट
निगेटिव पॉइंट - टॉयलेट एक प्रेम कथा का दूसरा हाफ बहुत अच्छा नहीं है और 160 मिनट की फिल्म देख पाना नामुमकिन होता है।
शानदार मोमेंट - भूमि पेडनेकर के सीन्स फिल्म में काफी मजेदार हैं।
श्रीनारायण सिंह की टॉयलेट एक प्रेम कथा के साथ, अक्षय कुमार ने एक बार फिर समाज की एक समस्या का बीड़ा उठाया है और वो काफी हद तक सफल भी हुए हैं। भूमि पेडनेकर उनकी इस कोशिश में बखूबी साथ निभाती हैं।
फिल्म लेकिन इतनी अनौपचारिक हो जाती है कि केवल एक चुटकुला बनकर रह जाती है और फिर फिल्म को झेल पाना नामुमकिन हो जाता है। वैसे भी अक्षय कुमार सीरियस फिल्म में कॉमेडी करके हुए अजीब लगने लग जाते हैं।


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