औसत फिल्म है तो बात पक्की

स्टार कास्ट - तब्बू, शरमन जोशी, युविका चौधरी, वत्सल सेठ
निर्माता - रमेश एस तौरानी
संगीत निर्देशक - प्रीतम चक्रवती
रिलीज डेट - 19 फरवरी 2010
रेटिंग मीटर - 2/5
समीक्षा - तब्बू और शरमन जोशी की जोड़ी बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल दिखा पाएगी ये कहना मुश्किल है। लेकिन फिल्म की साफ-सुथरी पटकथा और मध्यमवर्गीय बैकग्राउंड आम पब्लिक को कहानी से लिंक कर सकती है। लेकिन फिल्म का छोटा बजट और कमजोर संगीत दर्शक ना जुटा पाने में अहम रोल निभाने वाला है। तब्बू के अभिनय के लिहाज से यह फिल्म कमजोर कही जाएगी। लेकिन चूंकि फिल्म में तब्बू लीड रोल में हैं इसलिए ये एक अच्छा प्रयास कहा जाएगा। फिल्म मध्यमवर्गीय परिवार के हाई सोसायटी में शामिल होने की लालसा को कॉमेडी के जरिए दर्शकों में बांटती है। हर लिहाज से इस फिल्म को एक औसत दर्जे की फिल्म कहना सही होगा।
कहानी - राजेश्वरी (तब्बू) फिल्म में मुख्य किरदार में हैं। उसकी शादी हो चुकी है विनय (अयूब खान ) से । विनय बैंक में कैशियर है। उनके दो बच्चे हैं। फैमिली में इन चारों के अलावा तब्बू की छोटी बहन निशा भी है। राजेश्वरी चाहती है कि उसकी बहन की शादी हाई सोसायटी में हो। वह अपनी सक्सेना बिरादरी में सबसे ऊंची जगह निशा को ब्याहना चाहती है।
इसके लिए राजेश्वरी अपने मकान का सहारा लेती है। वह राहुल (शरमन जोशी) नाम के इंजीनियरिंग स्टूडेंट को अपने घर में जगह देती है। लेकिन जल्द ही उसे पता चलता है कि राहुल शादी में इंट्रेस्टेड नहीं है। ऐसे में वह निशा के जरिए राहुल को शादी करने के लिए तैयार करने की कोशिश करती है। राहुल भी निशा की सादगी और खूबसूरती को पसंद करने लगता है और बात पक्की हो जाती है। लेकिन कहानी में मोड़ तब आता है जब राजेश्वरी के घर पर युवराज (वत्सल) रहने के लिए आता है और राजेश्वरी को पता चलता है कि उसका अपना बिजनेस है और वह राहुल से ज्यादा पैसे वाला है। अब राजेश्वरी, चाहती है कि निशा की शादी राहुल से नहीं युवराज से हो।


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