इस गेम को देखने का कोई फायदा नहीं

By Priya Srivastava

Game
निर्देशक: अभिनव देव
संगीतकारः शंकर एहसान लॉय
निर्माताः रितेश सिधवानी
पटकथा लेखकः अलथिया
कलाकार: अभिषेक बच्चन, कंगना रणावत, सारा जेन, जिम्मी शेरगिल, बोमन ईरानी

रेटिंगः 2/5

फिल्म की पटकथा ही फिल्म का हीरो होता है। पिछले साल सफल फिल्में देखने के बावजूद शायद यह बात अभिनव देव नहीं समझ पाये थे तभी तमाम प्रोमोशन के फंडे अपनाने के बावजूद अपनी फिल्म में वे कुछ भी कमाल नहीं दिखा पाये हैं। अभिषेक बच्चन ने पिछली कई फिल्मों से बेहतरीन प्रदर्शन नहीं किया है और इस फिल्म में भी वह नाकाम ही साबित हुए हैं।

अभिनव देव को बतौर निर्देशक अब तक दर्शकों की समझ को जरूर आंकना चाहिए था। उन्होंने वर्ल्ड कप के दौरान अपनी फिल्म रिलीज करके जो जोखिम उठाया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। अभिनव देव ने दावा किया था कि उनकी फिल्म में अन्य फिल्मों की अपेक्षा नये तरीके का थ्रीलर और सस्पेंस नजर आयेगा लेकिन उनके सारे दावे फिल्म देखने के बाद निराधार साबित होते हैं। फिल्म की पटकथा में किरदारों का चुनाव भले ही सही तरीके से किया गया है, लेकिन फिल्म की कहानी रफ्तार नहीं पकड़ पाती और ना ही दर्शकों की रुचि बरकरार रख पाती है।

कहानी

बिजनेस मैन विक्रम कपूर उन तीनों को लालच देकर अपने आयलैंड पर बुलाता है लेकिन खुद ही उसकी मौत हो जाती है। विक्रम कपूर की मौत खुदकुशी है या हत्या, इसी पर आगे की कहानी घूमती है। गेम एक थ्रिलर फिल्म है और थ्रिलर फिल्म की खासियत उसका सस्पेंस से भरे कहानी में टि्वस्ट से होती है।

गेम इस मायने से बिल्कुल खोखली है। इस मर्डर मिस्ट्री की गुत्थी उलझने से पहले ही परदे पर सुलझी नजर आती है जैसे फिल्म के इंटरवल में यह मालूम होना कि अभिषेक बच्चन एक पुलिस ऑफिसर है। अभिनव ने पुराने फॉर्मूले की नकल कर कुछ भी नया परोसने की कोशिश नहीं की है। अक्सर ऐसी फिल्मों के संवाद याद रह जाते हैं लेकिन इस फिल्म में ऐसा कोई भी प्रभावी संवाद नहीं है। हां, फिल्म में कंगना का अभिनय और निखर कर सामने आया। नये कलाकार के रूप में सारा को बहुत कुछ करने का मौका नहीं दिया गया है।

उनकी भूमिका बेहद छोटी है। अभिषेक के अभिनय में कोई नयापन नहीं है और हर बार की तरह इस बार भी बोमेन ईरानी ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है। फिल्म के गीत कर्णप्रिय हैं लेकिन गीत बहुत दिनों तक श्रोताओं को रोमांचित नहीं करेंगे। ग्रीस, बैकाक, लंदन, इस्तनाबुल जैसे
शहरों की खूबसूरती को परदे पर उकेरा गया है। कार्तिक त्यागराजन की हॉलीवुड स्टाइल की सिनेमाटोग्राफी परदे पर देखने को
मिलती है साथ ही विजुएल इफेक्टस भी अच्छे बन पडे हैं। कुल मिलाकर इस फिल्म की यही खासियत है।

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