The Vaccine War Movie Review: मस्ट वॉच है विवेक अग्निहोत्री की ये महत्वपूर्ण फिल्म, नाना पाटेकर की दमदार वापसी

Rating:
3.5/5

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निर्देशक- विवेक अग्निहोत्री
कलाकार- नाना पाटेकर, पल्लवी जोशी, राइमा सेन, सप्तमी गौड़ा, अनुपम खेर, गिरिजा ओक

"अगर मरना है तो लड़ के मरेंगे, आत्म निर्भर बन कर मरेंगे", भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डा. बलराम भार्गव (नाना पाटेकर) सामने बैठे कैबिनेस सेक्रेटरी (अनुपम खेर) से कहते हैं। और यहां से शुरु होता है एक ऐसा युद्ध, जिसे हमारे देश के वैज्ञानिकों ने लड़ा और उसमें जीत हासिल की। विवेक अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी इस फिल्म को देखते हुए एक पल आप इमोशनल होंगे, तो अगले ही पल आपका दिल उन वैज्ञानिकों के लिए आभार से भर उठेगा। फिल्म उन सभी "रियल लाइफ हीरोज" को सेलिब्रेट करती है।

कहानी

फिल्म की कहानी हमें कोविड काल की शुरुआत में लेकर जाती है। 1 जनवरी 2020 को, जब पूरा देश नए साल का जश्न मना रहा होता है, इसी दौरान ICMR महानिदेशक बलराम भार्गव को एक ऐसे वायरस के बारे में पता चलता है जिसका मरीज चीन के वुहान में पाया गया है। कुछ ही महीनों में यह वायरस पहले चीन और फिर विश्व भर में फैलता चला जाता है। और यहीं से शुरू होती है कोरोना जैसी महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई। ICMR के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव को कोविड-19 के खिलाफ भारत का पहला टीका विकसित करने का काम सौंपा जाता है। अपनी पूरी टीम के साथ वो इस मिशन में लग जाते हैं। ये फिल्म वैश्विक महामारी के दौरान वैक्सीन बनाने की जटिलताओं को प्रभावी ढंग से दिखाती है। वहीं, वैज्ञानिकों की भावनाओं और बलिदान को भी साथ जोड़ती है। लेकिन जहां हीरो होते हैं, वहां विलेन की कमी कैसे हो सकती है। कई बाहरी और अंदरूनी ताकतें भारत को अपना स्वदेशी वैक्सीन बनाने से रोकना चाहती थी। जिन्होंने वैक्सीन के विरोध में एजेंडा भी चलाया। वैज्ञानिकों की और देश की उपलब्धि को कम करने के लिए एक निश्चित भारत विरोधी कहानी बनाई। लेकिन सभी संघर्षों से लड़ते हुए भारत देश के वैज्ञानिकों ने वैक्सीन बनाई और सिर्फ भारतीयों को ही नहीं बल्कि कई दूसरे देशों के नागरिकों को भी बचाया। वैक्सीन को लेकर वैज्ञानिकों का जज्बा ही आपको इस फिल्म से लगातार बांधे रखती है।

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अभिनय

कोई शक नहीं कि फिल्म की स्टारकास्ट इसका सबसे मजबूत पक्ष है। डॉक्टर बलराम भार्गव की भूमिका में नाना पाटेकर को देखना सुखद रहा। वो लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर नजर आए हैं। उनकी अपनी एक स्टाइल है, अभिनय में एक सहजता है, जो किसी भी किरदार को अपना बना लेते हैं। एक गंभीर बॉस के रूप में, एक जुनूनी वैज्ञानिक और एक गर्वित भारतीय होने के भावों को नाना पाटेकर ने पूरी फिल्म भर खूबसूरती के साथ पेश किया है। वहीं, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) की डायरेक्टर वायरोलॉजिस्ट प्रिया अब्राहम का किरदार निभा रहीं पल्लवी जोशी भी दमदार दिखी हैं। वैज्ञानिकों की टीम में शामिल सप्तमी गौड़ा और गिरिजा ओक ने प्रभावशाली काम किया है। वहीं, पत्रकार बनीं निगेटिव रोल में राइमा सेन आकर्षित करती हैं। हालांकि, भारत पर 'विश्वगुरु' का तंज कसने वाली इस पत्रकार से आप नफरत करेंगे और बतौर एक्टर यही उनकी जीत होगी। कैबिनेट सेक्रेटरी बने अनुपम खेर ने अच्छा काम किया है।

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निर्देशन व तकनीकी पक्ष

कोरोना कब हुआ और कैसे हुआ.. इस बारे में शायद देश में हर कोई जानता है। सब जानते हैं कि इसकी वजह से लाखों लोगों की जान गई। लेकिन आप नहीं जानते होंगे कि कोरोना की वैक्सीन बनाने में कितने लोगों को संघर्ष करना पड़ा और इस दौरान उन्हें कितना विरोध झेलना पड़ा। फिल्म में देश की उन महिला वैज्ञानिकों पर जोर दिया गया है जिन्होंने वैक्सीन बनाने में बड़ा योगदान दिया है। विवेक अग्निहोत्री का निर्देशन काफी सधा हुआ रहा। फिल्म की पटकथा भी उन्होंने ही लिखी है, जिसके लिए उन्हें तारीफ जरूर मिलनी चाहिए। काफी तकनीकी शब्दावली का प्रयोग होने के बाजवूद, फिल्म कहीं भी आपका ध्यान नहीं भटकाती है। शायद इसीलिए हर किरदार के मानवीय पक्षों पर काफी ध्यान दिया गया है। फर्स्ट हॉफ बेहद दिलचस्प है, जबकि सेकेंड हॉफ में गति थोड़ी धीमी होती है, लेकिन क्लाईमैक्स उसकी भरपाई कर देता है। इस पूरी फिल्म को 12 चैप्टर में दिखाया गया है जिसमें वैक्सीन बनने से लेकर लॉकडाउन के अलग अलग फेज को दिखाया गया है। फिल्म के संवाद काफी पॉवरफुल हैं। वहीं, विवेक अग्निहोत्री ने जिस तरह से महिला वैज्ञानिकों के संघर्ष और उनके सफर को दिखाया है, वो आपके दिलों को छू लेगी। द वैक्सीन वॉर के पॉजिटिव पक्षों में इसकी सिनेमेटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर भी है।

रेटिंग

विवेक अग्निहोत्री निर्देशित 'द वैक्सीन वॉर' एक ऐसी फिल्म है, जो आपको काफी दिलचस्प, लेकिन संवेदनशील तरीके से अपने देश की उस वॉर के सफर पर ले जाती है, जिसके नतीजे पर आज हम सब सांस ले रहे हैं। जिसके नतीजे पर हमें गर्व होना चाहिए। और जिसके लिए हमें उन वैज्ञानिकों का आभार प्रकट करना चाहिए, जिन्होंने एक योद्धा की तरह इस युद्ध को लड़ा। फिल्मीबीट की ओर से 'द वैक्सीन वॉर' को 3.5 स्टार।

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