दि लंच बॉक्स एक बेनाम रिश्ता अनकहे अंत के साथ- फिल्म रिव्यू
(सोनिका मिश्रा) इरफान खान और निमृत कौर की फिल्म दि लंचबॉक्स को देखने के बाद आपको भी अनकहे रिश्तों और उनसे जुड़े अनकहे वादों पर यकीन हो जाएगा। अक्सर हम अपनी जिंदगी में कुछ लोगों से बिना मिले भी उन्हें अपनी जिंदगी में शामिल कर लेते हैं और उनसे एक अटूट रिश्ता जोड़ लेते हैं। ये रिश्ते ज्यादातर पूरे नहीं होते और इनसे जुड़े लोगों को एक ऐसे मोड़ पर छोड़ देते हैं जहां पर वो खुद को इतना बेबस पाते हैं कि आगे बढ़कर उस रिश्ते को बनाए भी नहीं रख पाते हैं। दि लंचबॉक्स एक ऐसी ही फिल्म है जिसके किरदारों से आपको प्यार हो जाएगा और आप भी खुद को कहीं ना कहीं इनसे जुड़ा हुआ पाएंगे क्योंकि ये कहानी कहीं ना कहीं हमारे आस पास के लोगों से ही जुडी है।
दि लंचबॉक्स है एक दो ऐसे लोगों की कहानी जो कि एक दूसरे से कभी नहीं मिले लेकिन फिर भी एक दूसरे को पसंद करने लगे। जिन्हें एक दूसरे के बारे में कुछ भी नहीं पता और जो एक दूसरे का नाम तक नहीं जानते। कहते हैं कि आप रास्ता कोई भी चलो लेकिन आपकी मंजिल आपको ढ़ूंढ़ ही लेती है चाहे आप कितनी भी कोशिश करो भागने की लेकिन कदम वहीं रुकेंगे जहां आपकी किस्मत में लिखा होगा। कुछ ऐसा ही होता है दि लंचबॉक्स के हीरो मिस्टर साजन फर्नाडीज और इला की जिन्हें किस्मत डिब्बेवाले की एक गलती की वजह से एक दूसरे के करीब ले आती है।
फिल्म में एक्टिगं की बात की जाए तो इरफान खान ने एक बार फिर से ये जता दिया है कि वो हर एक किरदार में जो जान और जो आत्मा डालते हैं वो कोई और नहीं कर सकता। इरफान खान की एक्टिंग हमेशा ही लोगों को उनके किरदार से बांध लेती है। निमृत कौर ने भी अपनी तरफ से बेहतरीन एक्टिंग की है और इंप्रेस किया है। नवाजुद्दीन ने अपने छोटे से किरदार के साथ पूरा न्याय किया है।


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