The Kerala Story Movie Review: जरूरी विषय पर बनी अदा शर्मा की फिल्म असहज करती है, कमजोर दिल वाले ना देंखे

निर्देशक- सुदीप्तो सेन
कलाकार- अदा शर्मा, योगिता बिहानी, सोनिया बलानी, सिद्धि ईरानी, प्रणय पचौरी, प्रणव मिश्रा
"आईएसआईएस कब ज्वॉइन किया, ये जानने के लिए कैसे ज्वॉइन किया और क्यों किया, ये जानना जरूरी है.." जांच अधिकारियों के सामने बैठी फातिमा उर्फ़ शालिनी उन्निकृष्णण (अदा शर्मा) कहती है। यहां से कहानी फ्लैशबैक में जाती है और हम देखते हैं कि कैसे केरल की एक हिंदू और नर्सिंग की छात्रा शालिनी का माइंडवॉश कर उसे धर्मांतरण के लिए मजबूर कर दिया जाता है और वो भारत से अफगानिस्तान जाकर आईएसआईएस के चंगुल में फंस जाती है।
कहानी
केरल में नर्सिंग कॉलेज में पढ़ने वाली शालिनी उन्नीकृष्णन, निमाह, गीताजंलि और आसिफा रूममेट्स हैं। कॉलेज के पहले दिन से ही आसिफा किसी ना किसी तरह प्रकार बाकी तीनों को धर्म की बातों से घेरती है और यह मनवाने पर जोड़ देती है कि पूरी दुनिया अल्लाह के इशारे पर ही चल रही है। शालिनी और गीताजंलि धीरे धीरे इस्लाम के प्रति आकर्षित होने लगती हैं। उनमें अपने धर्म और अपने परिवार के प्रति नफरत पैदा होती है। इस बीच आसिफा के दोनों भाई दोनों लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाते हैं, पहले प्रेग्नेंट करते हैं और फिर छोड़ देते हैं। समाज के डर से शालिनी इस्लाम कबूल कर लेती है, किसी अंजान लड़के से निकाह कर सीरिया के लिए भारत छोड़ देती है। इसके बाद अपने सफर में वो कितनी मुश्किलों से गुजरती है, कैसे आईएसआईएस आतंकी संगठन तक पहुंच जाती है और कब उसकी आंखें खुलती हैं, इसी के इर्द गिर्द घूमती है पूरी कहानी।
अभिनय
अभिनय के मामले में किसी भी कलाकार ने निराश नहीं किया है। अदा शर्मा, योगिता बिहानी और सिद्धि ईरानी अपने किरदारों में संवेदनशीतला लेकर आते हैं। उनकी मासूमियत से लेकर उनका डर, व्याकुलता, गुस्सा सब उनके हाव भाव में उभर कर आता है। सहायक किरदारों में सभी कलाकार अच्छे जमे हैं, हालांकि मुख्य तीन कलाकारों के अलावा किसी भी किरदार में गहराई नहीं दिखती है।
निर्देशन व तकनीकी पक्ष
सुदीप्तो सेन ने एक भयावह वास्तिविकता को बड़े पर्दे पर पेश करने की कोशिश की है। कहानी कई मौकों पर बेचैनी और डर पैदा करती है। बताया गया है कि हिंदू और ईसाई समुदाय की 32000 लड़कियों हैं, जो केरल से गायब हैं, जिन्होंने इस्लाम धर्म अपनाकर आईएसआईएस को ज्वॉइन कर लिया है और फिर उन्हें बतौर गुलाम अफगानिस्तान और यमन भेज दिया जाता है। लेकिन भावनात्मक पक्ष से ऊपर उठें तो फिल्म में काफी कमियां दिखती हैं। कहानी को जिस तरह से पर्दे पर उतारा गया है ये बहुत ज्यादा असहज करती है। नरसंहार के दृश्य हों, रेप सीन्स हों या अन्य हिंसात्मक कृत्य.. निर्देशक आतंकियों की बर्बरता दिखाने के लिए spoonfeed करते दिखे हैं। साथ ही फिल्म के संवाद धर्म विशेष की ओर कटुता फैलाने का इरादा रखती है। सुदीप्तो सेन निश्चित रूप से इस फिल्म को बनाने में बारीकियों और मार्मिकता के महत्व को नहीं समझते हैं। प्रशांतनु मोहापात्रा की सिनेमेटोग्राफी केरल से लेकर अफगानिस्तान तक की दुनिया को बखूबी दिखाती है। फिल्म की एडिटिंग थोड़ी और चुस्त हो सकती थी, खासकर फर्स्ट हॉफ। वहीं, कुछ हिंसात्मक दृश्यों को दर्शकों की कल्पना हेतु भी छोड़ दिया जा सकता था।
रेटिंग
सच्ची घटनाओं पर आधारित इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे इस्लाम धर्म अपनाने के लिए लड़कियों का ब्रेनवाश किया जाता है। विपुल अमृतलाल शाह के प्रोडक्शन में बनी ये फिल्म गंभीर मुद्दे पर बनी है, जिसे जानना बेहद जरूरी है, लेकिन कहानी को इस तरह से प्रस्तुत किया गया है कि यह आपको विचलित करता है। फिल्म में हिंसा इस स्तर तक दिखाया गया है कि वो कहानी के प्रभाव को कम कर देता है और कहीं ना कहीं गैर- जिम्मेदार प्रतीत होता है। फिल्मीबीट की ओर से 'द केरल स्टोरी' को 2 स्टार।


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