The Great Indian Family Review: हिंदू- मुस्लिम एकता पर बनी विक्की कौशल की एक औसत फिल्म

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निर्देशक- विजय कृष्ण आचर्या
कलाकार- विक्की कौशल, मानुषी छिल्लर, कुमुद मिश्रा, मनोज पाहवा, यशपाल शर्मा, सादिया सिद्दीकी, अलका अमीन, सृष्टि दीक्षित और वेदांत सिन्हा

"हमें कहां पता होता है कि हमारा जन्म कहां हुआ है, किस घर में, किस जात में, किस धर्म में हुआ.. जन्म तो हम सिर्फ इंसान बनकर लेते हैं, लेकिन ये दुनिया हमें बांट देती है.." फिल्म के महत्वपूर्ण दृश्य में वेद व्यास उर्फ भजन कुमार (विक्की कौशल) कहता है। यशराज फिल्म्स की ये फैमिली एंटरटेनर अनेकता में एकता की बात करती है। लेकिन यहां ज्ञान का थोड़ा ओवरडोज़ हो जाता है।

साल 1994 में आई फिल्म क्रांतिवीर तो आपको याद होगी। फिल्म के एक सीन में नाना पाटेकर उंगली काटकर खून निकालते हैं और लोगों से पूछते हैं कि बताओ ये खून हिंदू का है या मुस्लिम का! अफसोस की बात है कि आज लगभग 30 सालों के बाद भी बॉलीवुड उसी जगह खड़ा है और वही कंटेंट दे रहा है।

कहानी

फिल्म की कहानी भजन कुमार (विक्की कौशल) के बारे में है जो बलरामपुर के पंडितों के परिवार से है। वह भजन गाने के लिए पूरे शहर भर में चर्चित है। सभी उसका सम्मान करते हैं और किसी स्टार से कम नहीं। लेकिन बड़े होने के बाद, एक दिन उसे और उसके परिवार को पता चलता है कि वह एक गोद लिया बच्चा है और असल में एक मुस्लिम परिवार से है। यह खुलासा भजन कुमार के जीवन में सब कुछ बदल देता है। शहर भर में चर्चा शुरु हो जाती है कि भजन कुमार हिंदू पंडित है या मुस्लिम? ऐसे में वह और उसका परिवार इस स्थिति का सामना कैसे करते हैं, यह बाकी की कहानी है।

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निर्देशन व तकनीकी पक्ष

फिल्म की शुरुआत बहुत अच्छी है। इसके किरदार दिलचस्प लगते हैं। खासकर विक्की कौशल और कुमुद मिश्रा के बीच के दृश्य बेहतरीन हैं। लेकिन बाद में पटकथा बिखर जाती है। कहानी घिटी पिटी ढर्रे पर चलने लगती है जो ऊबाऊ है। क्लाईमैक्स अति नाटकीय है, जो कहानी के मैसेज का प्रभाव कम कर देता है।

विजय कृष्ण आचार्य द्वारा लिखित और निर्देशित ये फिल्म मूल रूप से इंसानियत की बात करती है। बताती है कि धर्म सिर्फ हमें बांटने का काम करती है। जैसे बलरामपुर में एक मोहल्ला हिंदूओं का तो एक मुस्लिम का दिखाया गया है, और दोनों मोहल्ले का अंतर साथ दिखाता है। जब भजन कुमार अपने दो दोस्तों के साथ मुस्लिम मोहल्ले में घुसता है कि बैकग्राउंड में टाइगर जिंदा है का संगीत बजता है और एक्शन धूम जैसा होता है। लेकिन कहीं ना कहीं ये चीजें बचकानी लगती हैं क्योंकि पटकथा में दम नहीं है। संवाद में दम नहीं है। द ग्रेट इंडियन फैमिली का संगीत भी बहुत औसत है।

अभिनय

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसकी स्टारकास्ट है। विक्की कौशल एक दमदार अभिनेता हैं और उन्होंने एक बार फिर दिखा दिया है कि कहानी चुस्त हो या हो.. वो अपने अभिनय में कभी कमी नहीं छोड़ते हैं। भजन कुमार के पिता के किरदार में कुमुद मिश्रा बेहद प्रभावशाली लगे हैं। मनोज पाहवा भी अपने किरदार के साथ न्याय करते हैं। वहीं, मानुषी छिल्लर की बात करें तो उनके करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है, वह सिर्फ 2 गाने और 4 सीन के लिए हैं।

रेटिंग

द ग्रेट इंडियन फैमिली एक अच्छे भाव से बनाई गई कमजोर फिल्म है। यदि आप हल्की फुल्की फैमिली फिल्म देखना चाहते हैं, तो विक्की कौशल स्टारर इस एंटरटेनर को देख सकते हैं। फिल्मीबीट की ओर से द ग्रेट इंडियन फैमिली को 2.5 स्टार।

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