Thank You For Coming Movie Review: भूमि पेडनेकर- शहनाज गिल की बोल्ड फिल्म, बस कहानी ढूंढ़ने की कोशिश ना करें

निर्देशक- करण बूलानी
कलाकार- भूमि पेडनेकर, शहनाज गिल, कुशा कपिला, डॉली सिंह, शिबानी बेदी, करण कुंद्रा, अनिल कपूर, सुशांत दिवगीकर, प्रधुम्न सिंह
"क्या हो गया GST भर भर के, अपनी मांग भर मांग.." गुस्से में नानी (डॉली अहलूवालिया) सामने बैठी कनिका (भूमि पेडनेकर) से कहती हैं। फिल्म की पहली सीन से ही यह दिखाया गया है कि सेक्स और सेक्स से जुड़ी बातों को लेकर आज भी सोसाइटी कितनी पिछड़ी है.. खासकर लड़कियों के मामले में। फिल्म फेमिनिज्म से जुड़ी कई पक्षों को छूने की कोशिश करती है। लेकिन क्या उसमें सफल रही है? नहीं।
फिल्म की कहानी कनिका के बारे में है जो 32 साल की सिंगल लड़की है। अतीत में, उसके कई रिश्ते रहे हैं लेकिन अब तक उसे अपना मेंढ़क.. यानि की सपनों का राजकुमार नहीं मिला। परेशानी यहां सिर्फ इमोशनल और मानसिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि शारीरिक भी है। कनिका के रिश्ते तो कई रहे हैं, लेकिन उसे कभी ऑर्गेज्म नहीं हुआ है। अपनी सिंगल जिंदगी से घबराकर वह अरेंज मैरिज करने का फैसला करती है और सगाई की रात, पार्टी के बाद, उसे ऑर्गेज्म महसूस होता है। लेकिन.. लेकिन.. लेकिन.. कहानी में ट्विस्ट ये है कि शराब के नशे की वजह से उसे याद नहीं है कि वह होटल के कमरे में वो किसके साथ थी और किसने उसे ऑर्गेज्म दिया। कनिका उस आदमी की तलाश शुरू कर देती है.. और आगे की कहानी इसी के इर्द गिर्द घूमती है।
करण बूलानी के निर्देशन में बनी इस फिल्म को फेमिनिज्म से जोड़कर दिखाने की कोशिश की गई है। लेकिन इक्के दुक्के रिश्ते और सीन के अलावा, यहां कुछ भी ऐसा नहीं है, जो कहानी को एक शेप, एक मायने दे पाए। अपनी सिंगल मां के साथ कनिका के बॉण्ड को अच्छे तरीके से एक्सप्लोर किया गया है। लेकिन बाकी सभी रिश्ते छिछले नजर आते हैं। जहां भावनाओं की भारी कमी दिखती है।
फिल्म को राधिका आनंद और प्रशस्ति सिंह ने लिखा है और फिल्म का बेसिक कॉन्सेप्ट काफी दिलचस्प है। इस कहानी में काफी क्षमता थी, लेकिन निर्देशक ने जिस तरह इसे पर्दे पर उतारा है, वो निराशाजनक है। फिल्म की शुरुआत अच्छी होती है लेकिन फिर वह अपनी पकड़ खो देती है और हमें बांधे रखने में असफल हो जाती है। 11वीं क्लास की स्कूली लड़की को अपने पसंद के लड़के के साथ सेक्स करने की छूट देने को कैसे जस्टिफाई किया जा सकता है? और ये फेमिनिज्म की किस कैटेगरी में आता है, ये जरूर जानना चाहेंगे। कोई शक नहीं कि कहानी में कई बातें हैं जो परेशान करती हैं और बिल्कुल अनुचित लगती हैं।
अभिनय की बात आती है, तो भूमि पेडनेकर ने अच्छा काम किया है। कनिका के किरदार में वो एक ऊंचाई लेकर आती हैं। इमोशनल किरदारों में तो भूमि कितनी परफेक्ट हैं, ये सभी जानते हैं, यहां उन्हें एक ग्लैमरस भूमिका में देखना नया अनुभव रहा। भूमि अपने किरदार में सहज रही हैं। शहनाज गिल फिल्म में मुश्किल से चार- पांच सीन्स में हैं, लेकिन वो पर्दे पर एक ताजगी लाती हैं। शिबानी बेदी, डॉली सिंह, कुशा कपिला, करण कुंद्र कोई प्रभाव छोड़ने में असफल रहे हैं। वहीं, अनिल कपूर, सुशांत दिवगीकर और प्रधुम्न सिंह अपने किरदारों में काफी जंचे हैं और दिलचस्पी जगाते हैं। फिल्म का संगीत औसत है।
कुल मिलाकर, थैंक यू फॉर कमिंग में एक दमदार फिल्म बनने की पूरी क्षमता थी, लेकिन फिल्म निराश करती है। फिल्मीबीट की ओर से 'थैंक यू फॉर कमिंग' को 2 स्टार।


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