For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

    Thackeray Movie Review: चीते की तरह दहाड़े नवाजुद्दीन सिद्दीकी, इसलिए जरूर देखें 'ठाकरे'

    |
    Rating:
    3.0/5

    'मैं आर्टिस्ट हूं, मजदूर नहीं'.. बाल ठाकरे (नवाजुद्दीन सीद्दीकी) ये बात अपने एडिटर को तब कहते हैं जब उनसे एक बड़े आदमी पर बनाए गए मजाकिया कार्टून को हटाने के लिए कह दिया जाता है। जिसके बाद खुद के बनाए कार्टून के जरिए ठाकरे एडिटर को इस्तीफा थमाकर न्यूज पेपर ऑफिस से बाहर निकलते हैं।

    अभिजीत पेनसे की ठाकरे उनके फ्री प्रेस के कार्टूनिस्ट से लेकर माहाष्ट्र के सबसे बड़े राजनेता बनने तक के सफर को कवर करती है। वे शुरूआत करते हैं कि किस तरह प्रवासी भारतीयों खासकर दक्षिण भारतीयों की बढ़ती आमद के जवाब में बालासाहेब ठाकरे अपने 'मराठी मानुष जागा हो' से राज्य में एक हलचल मचा देते हैं। अपने स्व-प्रकाशन मार्मिक के माध्यम से, वे मराठियों के क्रोध को हवा दे देते हैं और धीरे-धीरे अपनी पॉलीटिकल पार्टी शिवसेना के जरिए लोगों के मसीहा बन जाते हैं।

    thackeray-movie-review-and-rating-nawazuddin-siddiqui

    नहीं कहानी में लेखकर संजय राउत कुछ प्रासंगिक राजनीतिक घटनाओं को छोड़ देते हैं जैसे कि 1969 में मोरारजी देसाई प्रकरण, कम्युनिस्ट ट्रेड यूनियनों के कुचलने, आपातकाल के दौरान ठाकरे की इंदिरा गांधी से मुलाकात, जावेद मियांदाद की दिलीप वेंगसरकर के साथ शिवसेना प्रमुख के घर पर शिष्टाचार मुलाकात और बाबरी मस्जिद विध्वंस।

    thackeray-movie-review-and-rating-nawazuddin-siddiqui

    पूरी फिल्म की बात करें तो, 'ठाकरे' बाला साहेब के बारे में अनजानी बातें बताने के बजाए राजनीतिक पहलू पर ज्यादा ध्यान देती है। फिल्म में ऐसी कई जगहे हैं जहां पर मेकर ने जबरदस्ती ठाकरे को स्वयंभू आदमी दिखाने की कोशिश की है। जिसके चक्कर में नवाजुद्दीन से कुछ ऐसे डायलॉग भी बुलवाए हैं- 'मेरे लिए देश पहले, राज्य बाद में' और 'मैंने पहले कलम उठाया था, पर कुछ नहीं हुआ' ये सारे डायलॉग ठाकरे की पार्टी द्वारा फैलाई जा रही हिंसा का औचित्य साबित करने के लिए हैं।

    हालांकि जल्द ही मेकर्स एकदम अलग साइड पर चले जाते हैं तब डायलॉग्स भी बदल जाते हैं- 'मैं सही हूं, या गलत.. इसका फैसला आप नहीं.. देश की जनता करेगी क्योंकि सबसे ऊपर एक ही अदालत को मनता हूं वो है जनता की अदालत'

    thackeray-movie-review-and-rating-nawazuddin-siddiqui

    परफॉर्मेंस की बात करें तो बालासाहेब ठाकरे के किरदार में नवाजुद्दीन सिद्दीकी शेर की दहाड़ते नजर आते हैं। नवाज मात्र नकल उतार तक सीमित नहीं रहते हैं बल्कि ठाकरे का किरदार मूल पुरुष की आत्मा के साथ अपने अंदाज में निभाते हैं। मीनाताई ठाकरे के किरदार में अमृता राव अच्छी लगी हैं हालांकि ऑडिएंस उनका किरदार थोड़ा और देखना चाहती थी।

    thackeray-movie-review-and-rating-nawazuddin-siddiqui

    सुदीप चैटर्जी का कैमरा वर्क काफी शानदार है और प्रोडक्शन वैल्यू की बात करें तो फिल्म काफी अच्छा प्रदर्शन करती है। फिल्म का फर्स्ट हाफ ब्लैक एंड व्हाइट रखा गया है और ये फिल्म की कहानी के मुताबिक एकदम सटीक है। फिल्म की एडिटिंग टोन के साथ जाती है हालांकि फिल्म को और शार्प किया जा सकता था।
    राहत ही बात ये है कि, मेकर्स ने इस फिल्म जबरदस्ती के गाने नहीं ठूंसे हैं जिससे ऑडिएंस की अटेंशन नहीं भटकती।

    ठाकरे बायोपिक के तौर पर हर जगह ठीक तो नहीं है लेकिन ये फिल्म शानदार डायलॉग और नवाजुद्दीन सिद्दीकी की जबरदस्त परफॉर्मेंस से ऑडिएंस को इंप्रेस जरूर करती है। हमारी तरफ से इस फिल्म 3 स्टार।

    English summary
    Thackeray as a bopic may not tick all the boxes, but it does entertain with its crowd-pleasing dialogues and Nawazuddin Siddiqui's superlative performance. I am going with 3 stars.

    रहें फिल्म इंडस्ट्री की हर खबर से अपडेट और पाएं मूवी रिव्यूज - Filmibeat Hindi

    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Filmibeat sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Filmibeat website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more