समझ से परे है तीन पत्ती

अगर आपने साल 2008 में आई हॉलीवुड की केविन-सपैसी की फिल्म 21 देखी है तो आपको तीन पत्ती समझने में आसानी होगी। क्योंकि तीन पत्ती की कहानी इसी फिल्म से ली गई है। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने एक गणितज्ञ (वेंकट सुब्रहम्णयम) का किरदार निभाया है। जिन्हें एक दूसरे गणितज्ञ पर्सी ट्रेचटनबर्ग (बेन किंगस्ले) लंदन के एक जुआघऱ उनकी थीसिस के बारे में बातचीत करने के लिए बुलाते हैं। यहां से कहानी फ्लैश बैक में चलती है।
कहानी शुरु होती है सुब्रहम्णयम से जो बीआईटी में प्रोफेसर हैं लेकिन उनकी अपने डीन (बैरी जॉन) से नहीं पटती औऱ वो लगभग अपनी नौकरी से हाथ धोने ही वाले होते हैं क्योंकि उनके रिसर्च पेपर पब्लिश नहीं हो पाते। इसी जद्दोजहद के बीच सुब्रहम्णयम वापस काम पर अपना दिमाग लगाने की कोशिश करते हैं कि अचानक उनकी कंप्यूटर स्क्रीन पर एक पॉप अप आता है जिसमें तीन पत्ती या ब्लैक जैक खेलने का संदेश होता है। इसी के साथ सुब्रहम्णयम के दिमाग में ख्याल आता है कि अगर वो अपनी थ्योरी के इस्तेमाल से किसी एक व्यक्ति के पत्ते जान लें तो वो इस बात का पता लगा सकते हैं कि इस खेल में कौन जीतेगा।
इसी की तर्ज पर प्रोफेसर अपने अगले पेपर का टॉपिक सोचता है 'थ्योरी ऑफ प्रोबेबिल्टी'। इसमें अपने एक जूनियर प्रोफेसर शांतनु बिस्वास (माधवन) औऱ अपने स्टूडेंट्स की मदद लेता है। औऱ यहीं से कहानी तेजी से घूमनी शुरु होती गेम प्लान औऱ ब्लैकमेलिंग की। बेन किंगस्ले अपने किरदार में जंचे हैं, अमिताभ भी कहीं उनसे उन्नीस नज़र नहीं आते। माधवन का अभिनय बढ़िया है, अपनी पहली फिल्म में शक्ति कपूर की बेटी श्रद्धा कपूर को नज़रअंदाज नहीं कर सकते। फिल्म लीना यादव के निर्देशन में बनी है।
देखने क्यों जाएं - अगर हॉलीवुड के दिग्गज बेन किंगस्ले औऱ बॉलीवुड के पितामह अमिताभ को एकसाथ देखने का शौक है।
देखने ना जाएं- अगर सिर्फ मनोरंजन करने जा रहे हैं तो ये फिल्म आपको पसंद नहीं आएगी। आम आदमी की समझ से बाहर औऱ बहुत दिमाग लगाने वाली फिल्म है। संगीत सलीम मर्चेंट, सुलेमान मर्चेंट का है। फिल्म का गीत संगीत कुछ खास नहीं है।


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