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तान्हाजी फिल्म रिव्यू- जबरदस्त एक्शन और बेहतरीन अभिनय से सजी तान्हाजी के शौर्य की कहानी

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Tanhaji; The Unsung Warrior Movie Review: Ajay Devgn और Kajol की फिल्म हिट या फ्लॉप?| FilmiBeat

Rating:
3.5/5

निर्देशक- ओम राउत

कलाकार- अजय देवगन, सैफ अली खान, काजोल, शरद केलकर

छत्रपति शिवाजी महाराज के घनिष्ठ मित्र और वीर निष्ठावान मराठा सरदार तान्हाजी मालुसरे की यह कहानी एक शौर्य गाथा है। तान्हाजी के पिता मृत्यु से पहले स्वराज के सपने की जिम्मेदारी तान्हाजी के मजबूत हाथों में सौंपते हैं और कहते हैं- "लोग वसीयत छोड़कर जाते हैं, मैं कर्ज़ छोड़कर जा रहा हूं, मिट्टी की आज़ादी।" शिवाजी महाराज का दाहिना हाथ और भरोसे की तलवार माने जाने वाले तान्हाजी की यह कहानी देशभक्ति, जुनून और वीरता को बेहतरीन ढ़ंग से पेश करती है।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी

छत्रपति शिवाजी महाराज (शरद केलकर) का सपना है स्वराज, जो हर मराठा के दिल में बसता है। फिल्म की कहानी मराठों और मुगलों के बीच जंग की कहानी है। औरंगज़ेब शासित मुगल सल्तनत दिन ब दिन और अधिक शक्तिशाली होती जा रही थी। कई राजपूत राजा उनसे जा मिले थे। अब औरंगजेब अपने साम्राज्य को बढ़ाना चाहता है। मुगल धोखे से मराठों के 23 किलों को अपने कब्ज़े में कर लेते हैं, जिसमें से एक है कोंढ़णा का किला। शिवाजी महाराज तक खबर पहुंचती है कि जिस तरह उत्तर भारत का केंद्र है दिल्ली, उसी तरह दक्षिण भारत में मुगल का केंद्र होगा कोंढ़णा। और इस आक्रमण के लिए औरंगज़ेब अपने वफादार उदयभान राथौड़ (सैफ अली खान) को कोंढ़णा की ओर रवाना करते हैं। शिवाजी महाराज अब किसी भी तरह उदयभान को रोकना चाहते हैं। इधर सुबेदार तान्हाजी (अजय देवगन) अपने बेटे की शादी में व्यस्त है और शिवाजी महाराज नहीं चाहते कि वह उनकी खुशी में खलल डालें। लेकिन तान्हाजी को जैसे ही आक्रमण की खबर लगती है, वह बेटे की शादी छोड़ मिट्टी का कर्ज़ अदा करने की ठान लेते हैं। अब तानाजी किस तरह कोंढ़णा के किले को उदयभान की विशाल सेना से बचाते हैं और उस पर भगवा लहराते हैं, इसी के साथ कहानी आगे बढ़ती है।

अभिनय

अभिनय

सुबेदार तान्हाजी मालुसरे के किरदार में अजय देवगन खूब जंचे हैं। फर्स्ट हॉफ में अभिनय कुछ डगमगाती दिखती है, लेकिन फिल्म के दूसरे हॉफ में अजय देवगन शानदार लगे हैं। एक दृश्य में तान्हाजी और शिवाजी महाराज के रिश्ते की तुलना कृष्ण- सुदामा की मित्रता से की गई है। दोनों के बीच का संवाद आपको संवेदनाओं से भर देगा। अजय देवगन के हाव भाव में शौर्य, सम्मान और देशभक्ति की भावना खूब झलकती है। छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार में शरद केलकर पूरी तरह से रच बस गए हैं। वह बेहद सटीक और सच्चे लगे हैं। सावित्रीबाई मालुसरे बनीं हैं काजोल, जो इमोशनल दृश्यों को अपने नाम कर गई हैं। वहीं, तान्हाजी के सामने जो जमकर टिके हैं वो हैं उदयभान राथौड़ के किरदार में सैफ अली खान, जो उल्लेखनीय काम कर जाते हैं। क्लाईमैक्स में मौत के करीब पहुंचकर भी उदयभान के चेहरे पर क्रूर हंसी आपको किरदार से नफरत करने पर मजबूर कर देगी। बतौर सह कलाकार ल्यूक केनी, जगपति बाबू, नेहा शर्मा ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।

निर्देशन

निर्देशन

ओम राउत ने इतिहास से एक ऐसा पन्ना उठाया है, जिसके बारे में ज्यादा लोगों ने पढ़ा या सुना नहीं है। लिहाजा, फिल्म में उन्होंने खूब रचनात्मक स्वतंत्रता ली है। लेकिन अच्छी बात है कि उन्होंने फिल्म को तान्हाजी की कहानी से इतर नहीं होने दिया। फिल्म की पटकथा मजबूत है, जिसका प्रभाव निर्देशन पर भी दिखता है। निर्देशक ने हर किरदार को पूरी तरह से उभरने का मौका दिया। तान्हाजी और शिवाजी महाराज के बीच के संवाद हों, या तान्हाजी और सावित्री के.. हर रिश्ता बखूबी उभरा है। वहीं, क्लाईमैक्स तक जाते जाते फिल्म अलग ऊंचाई पर पहुंच जाती है। तान्हाजी और उदयभान राथौड़ के बीच फिल्माया गया एक्शन सीन उम्दा है।

तकनीकि पक्ष

तकनीकि पक्ष

फिल्म 3डी में बनाई गई है , जाहिर है वीएफएक्स को लेकर छोटी सी गलती भी भारी पड़ सकती थी। लेकिन यह फिल्म का मजबूत पक्ष बन पड़ा है। जिससे यह शौर्य की कहानी और भी उभर कर आती है। तकनीकी तौर पर फिल्म में अच्छा काम किया गया है। एक्शन दृश्यों की कोरियोग्राफी जबरदस्त की गई है, जो 3डी में प्रभावित कर जाता है। Keiko Nakahara की सिनेमेटोग्राफी बेहतरीन है, वहीं धर्मेंद्र शर्मा की चुस्त एडिटिंग ने फिल्म को मजबूत बनाया है। खासतौर पर तारीफ करना चाहेंगे संदीप शिरोडकर द्वारा दिए गए फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर का, जो हर दृश्य को एक अलग ऊंचाई दे जाता है।

संगीत

संगीत

फिल्म का संगीत अजय- अतुल, सचेत- परंपरा और मेहुल व्यास ने दिया है। जबकि गाने लिखे हैं स्वानंद किरकिरे और अनिल वर्मा ने। फिल्म में चार गाने हैं, जो कि कहानी को आगे ले जाते हैं। फिल्म का संगीत औसत से ऊपर है। घमंड कर और मां भवानी कानों में लंबे समय तक के लिए गूंजते हैं।

देंखे या ना देंखे

देंखे या ना देंखे

इतिहास पर बनी फिल्में एक सबक की तरह होती हैं। भारत की मिट्टी से बाहरी ताकत को दूर रखने की लड़ाई में कई योद्धाओं ने अपनी जान गंवाई। फिल्म तान्हाजी के साथ निर्देशक ओम राउत आपको इतिहास के उन पन्नों में ले जाते हैं, जहां कुछ वीर योद्धा गुमनाम रह गए थे। तान्हाजी मालुसरे छत्रपति शिवाजी महाराज के घनिष्ठ मित्र और वीर निष्ठावान मराठा सरदार थे। यह फिल्म तान्हाजी की वीरता, सच्चाई और देशभक्ति की कहानी है। जिसे जरूर देखा जाना चाहिए। फिल्मीबीट की ओर से फिल्म को 3.5 स्टार।

English summary
Ajay Devgn, Saif Ali Khan and Kajol starring Tanhaji The Unsung Warrior takes you to the history chapter of Maratha pride, heroism and bravery. Film directed by Om Raut.
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