आस्मां की बुलंदियों पर है 'तारे ज़मीन पर'
'तारे ज़मीन पर' फ़िल्म खास तौर पर है बच्चों और उनके माता पिता के लिए और उन लोगों के लिए जो भविष्य में माता-पिता बनने वाले हैं. एक बाततो साफ है कि तारे ज़मीन पर एक ऐसी फ़िल्म है जो न केवल आपका मनोरंजन करती है बल्कि आपको जागरूक भी करती है. माता-पिता का अपने बच्चों के प्रति जो नजरिया है, जो उम्मीदें हैं और जो रवैय्या है उसमें होने वाली कमियों पर इस फ़िल्म के द्वारा प्रकाश डाला गया है. फ़िल्म में मुख्य भूमिका आमिर खान की है और उनके साथदर्शील सफारी की है जिस पर यह फ़िल्म आधारित है.
ईशान अवस्थी (दर्शील सफारी) एक ८ साल का बच्चा है जिसके नाज़ुक कन्धों पर उसके माता-पिता की उम्मीदें हैं. उम्मीदसे ज़्यादा इसे होड़ का नाम दिया जाना उचित होगा क्यूंकि ईशान का बड़ा भाई (सचेत) बहुत ही होशियार लड़का है. जो हमेशा पढ़ाई में अव्वल रहता है. और ऐसी ही अपेक्षा विपिन शर्मा (ईशान के पिता) और तिस्का चोपडा (ईशान की माता) को ईशान से रहती है.
लेकिन इन सबके विपरीत ईशान एक बहुत ही लापरवाह लड़का है जिसे नातो अपनी पढ़ाई की चिंता है और न ही ख़ुद की. वोतो बस अपनी ही दुनिया में खोया रहता है. एक ऐसी दुनिया जिसमें बहुत सारे रंग हैं. कुल मिलाकर ईशान को रंगों से बहुत प्यार है और ये प्यार क्यों है और इस से क्या हो सकता है ये ख़ुद ईशान को भी नहीं पता है. और ये बात उसके माता-पिता की भी समझ से बाहर है. हर तरफ़ से निराश होकर ईशान को बोर्डिंग स्कूल भेजने का निर्णय लिया जाता है.
हालांकि ईशान की माँ इस बात से बहुत खुश नहीं होती लेकिन बच्चे के भविष्य के लिए ख़ुद की ममता से समझौता कर लेती हैं. बोर्डिंग पहुँच कर भी ईशान में कोई बदलाव नहीं आता. तभी राम शंकर निकुम्भ (आमिर खान) की एक टीचर के रूप मैं एंट्री होती है. बच्चे उन्हें निकुम्भ सर के नाम से जानते हैं.
निकुम्भ सर बच्चों को नए तरीके से पढ़ाते हैं जो बच्चों को बहुत भाता है लेकिन उनका ध्यान ईशान पर जाता है जो अब भी वैसा ही है. निकुम्भ सिर उसकी मनः स्थिति को समझते हैं. धीरे-धीरे ईशान को समझने लगते हैं और इस बात का पता लगाते है की आख़िर ईशान क्या चाहता है?
ईशान के बारे में सब कुछ जानने के बाद वो ख़ुद मुम्बई जाकर ईशान के माता-पिता से बात करते हैं और उन्हें समझाते हैं. इसके बाद क्या होता है इसके लिए देखिये तारे ज़मीन पर...
आमिर खान के निर्देशन में बनी ये पहली फ़िल्म है और आमिर ने ये साबित कर दिया है कि वो एक बहुत ही अच्छे निर्देशक हैं. पूरी फ़िल्म दर्शकों को बांधे रखने में सफल हुई है. फ़िल्म की सबसे अच्छी बात है कि कहानी बहुत ही दमदार है. दर्शील और तिस्का चोपडा की एक्टिंग लाजवाब है. फ़िल्म के हर पहलू को बहुत ही उम्दा तरीके से बनाया गया है. संगीत बहुत ही बढ़िया है और जहाँ पर वाकई में ज़रूरत है वहीं पर गीत हैं.
ये फ़िल्म हर उस व्यक्ति के लिए मील का पत्थर साबित होगी जो इस फ़िल्म से जुड़ा है. दर्शकों का इस फ़िल्म को भरपूर प्यार मिलने की उम्मीद है और इस फ़िल्म को बहुत ही अच्छी ओपनिंग भी मिली है. आप इस फ़िल्म को देखने ज़रूर जाएं वरना आप एक बहुत ही अच्छी चीज़ मिस कर जायेंगे.


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