Sui Dhaaga Movie Review: भा गई मौजी-ममता की कहानी, एक-एक सीन में इमोशनल हो जाएंगे आप
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'सब बढ़िया है'.. अच्छा हो या बुरा सुई धागा के मौजी (वरुण धवन) का जिंदगी के लिए यही नजरिया है। चाहे वो मौजी के पिता पीविश (रघुवीर सिंह) हो, जो किसी काम के नहीं हैं, चाहे पत्नी ममता (अनुष्का शर्मा) के साथ न के बराबर उसका रिश्ता हो या फिर उसका चालू बॉस, मौजी की दुनिया में 'सब बढ़िया है।'
फिर एक दिन आता है जब उसके मालिक के बेटे की शादी होती है और इस शादी में मेहमानों को हंसाने के नाम पर मौजी के साथ गंदा बर्ताव किया जाता है। इस वाकये को लेकर पत्नी ममता का दर्द भरे हाव-भाव मौजी को बेचैन कर देते हैं। दोनों के बीच बातचीत होती है और ममता उससे अपने आत्म सम्मान के लिए खड़े होने को कहती है।
जल्द ही मौजी अपनी नौकरी छोड़कर दर्जी का काम करने लगता है। ममता उसका मार्गदर्शन करती है और जल्द ही दोनों को पता चलता है कि सुई-धागा में इतनी ताकत है कि उनकी किस्मत बदल सकती है लेकिन ये करना आसान नहीं था।

छोटे शहरों की कहानियों और कल्चर को सटीक तरीके से दिखाने में महारत हासिल किए शरत कटारिया सुई धागा में भारत की खुशबू मालूम होती है। वे आपको एक मध्यम वर्गीय परिवार में ले जाते हैं जहां एक मां को अपनी खराब तबियत से ज्यादा घर की खाली बाल्टियों की चिंता है। जहां पिता और बेटे अखबार के लिए लड़ते हैं और जहां पत्नि अपने पति को ये कभी बोलना नहीं भूलती कि आते वक्त डब्बा वापसे लेते आना।
फिल्म में एक ऐसा वक्त भी आता है जब मौजी कहता है, 'अब जिंदगी की साइकिल पर तो मारना पड़ेगा पैडल, चाहे मिले न मिले मैडल।' सुई धागा ऑडिएंस को एक शानदार मैसेज देती है.. कैसे कोई अपनी मेहनत, लगन और खुद पर भरोसे के जरिए सारी मुश्किलों को पार कर सकता है। शरत कटारिया की सुई धागा ऑडिएंस को शानदार मैसेज देती है। मौजी और ममता की कैमिस्ट्री आपका दिल जीत लेती है। दोनों किरदारों के गंभीर मोमोंट्स में आप भी इमोशनल हो जाते हैं।
हमारी तरफ से इस फिल्म को तीन स्टार।


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