स्लमडॉग..अंधेरे से उजाले की ओर

निर्देशक : डैनी बॉयले
संगीत : ए.आर. रहमान
कलाकार : देव पटेल, फ्रिडा पिंटो, अनिल कपूर, इरफान खान
डैनी बायल द्धारा निर्देशित फिल्म स्लमडॉग मिलिनयर ने झुग्गी झोपड़ी में रहने वालों की वास्तविकता, उनके सपने, अंधेरे से उजाले की ओर जाने के प्रयास और जिंदगी के अनुभवों से मिले ज्ञान को सकारात्मक ढंग से प्रस्तुत करने की कोशिश की है।
निर्देशक डैनी बायल ने बॉलीवुड फिल्म की तरह फिल्म बनाई है जिसमें एक प्रेम काहनी है। स्क्रीन लेखक शमौन बिफोय एक ऊर्जावान पटकथा लेखक है, वह जरूर बॉलीवुड के एक बड़े प्रशंसक रहे होगे। इसलिए बालीवुड के अनुसार एक कसी हुई पटकथा लिखी है। यह फिल्म उन लोगों के लिए आशा की किरण लाती है जो जिंदगी में प्यार और सुख-संपत्ति के मामले में दुर्भाग्यशाली हैं।
फिल्म में मुंबई की गंदी गलियों को दिखाया गया है। जो के एक सच्चाई है। विरोध का स्वर इसलिए उठ रहा है कि किसी गोरे व्यक्ति ने इस फिल्म को बनाया है तो यह दोहरे मानसिकता की निशानी है।
कहानी: मुंबई की गंदी बस्तियों में रहने वाला 18 वर्षीय अनाथ जमाल (देव पटेल) पास एक भी पैसा नहीं है, लेकिन एक घंटे में उसकी किस्मत बदल जाती है। भारत के सबसे लोकप्रिय गेम शो 'हू वांट्स टू बि ए मिलियनेयर" की खिताबी रकम से वह महज एक प्रश्न दूर है, लेकिन जमाल की जिंदगी में कुछ भी आसान नहीं रहा और ये भी आसान नहीं था।
उसे धोखाधड़ी के आरोप में पुलिस गिरफ्तार कर लेती है। जमाल से पूछताछ होती है। पुलिस को यकीन नहीं है कि जमाल को इतना ज्ञान है कि वो इस गेम में इतना आगे तक जाए। जमाल उन्हें यकीन दिलाने के लिए अपनी कहानी बचपन से सुनाता है।
बचपन में मुस्लिमों पर हुए हमले में जमाल की मां की हत्या हो गई थी। कम उम्र में ही जमाल और उसके बड़ा भाई सलीम गलत आदमियों के हाथ लग जाते हैं। जमाल की मुलाकात लतिका से होती है और वह उसे चाहने लगता है लेकिन इसके बाद भी कई मुश्किलें उसका इंतजार कर रही थीं।
तमाम मुश्किलों से लड़ते हुए जमाल को जिंदगी में कई जगह रहना पड़ता है हर एक जगह से उसकी कुछ यादे जुड़ी हुई है इन्हीं यादो में गेम शो में पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब होते है।
पूरी फिल्म दर्शक को बाँधकर रखती है। एक भी ऐसा क्षण नहीं आता जब आप बोरियत महसूस करें। जब जमाल और लतिका एक होते हैं तो उनके साथ दर्शक भी खुशी महसूस करते हैं क्योंकि उन्होंने इसके पहले कई मुसीबतों का सामना किया है। यही मुख्य वजह है कि 'स्लमडॉग मिलियनेयर" इतनी पसंद की जा रही है।
निर्देशक और लेखक के अलावा एआर रहमान के संगीत को भी श्रेय दिया जाना चाहिए। फिल्म का पार्श्व संगीत फिल्म को अतिरिक्त धार प्रदान करता है। मुंबई की गलियों को कैमरे ने बेहतरीन तरीके से पकड़ा है। फिल्म की शुरुआत में सलीम और जमाल के पीछे एक कांस्टेबल भागता है, वो दृश्य याद रखने लायक है।
अभिनय के मामले में कोई भी कलाकार कमजोर नहीं रहा। अनिल कपूर और इरफान खान तो अनुभवी हैं, लेकिन देव पटेल और फ्रिडा पिंटो का अभिनय भी हर लिहाज से उत्तम है। सलीम और जमाल का किरदार निभाने वाले बाल कलाकार भी शानदार अभिनेता सिद्ध हुए।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि फिल्म को जरूर देखने जाए।


Click it and Unblock the Notifications











