Sitaare Zameen Par Review: आमिर से ज्यादा चमके फिल्म के स्पेशल बच्चे, कमाल की कॉमिक टाइमिंग ने बचाई लाज

Cast: Aamir Khan, Genelia, Dolly Ahluwalia, Brijendra Kala
Director: R.S. Prasanna
Sitaare Zameen Par Movie Review: 'लाल सिंह चड्ढा' के फ्लॉप होने के बाद आमिर खान ने काफी लंबा ब्रेक लिया और अब एक बार फिर वो आए हैं अपनी नई फिल्म के साथ-'सितारे जमीन पर'। इस फिल्म का आमिर के फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। लेकिन क्या ये फिल्म आपको देखनी चाहिए या स्किप कर देनी चाहिए... ये जानने के लिए आपको रिव्यू पढ़ना होगा।
क्या है कहानी
इस फिल्म की कहानी गुलशन नाम के शख्स के ईर्द-गिर्द घूमती है, जिसके अंदर टैलेंट तो कूट-कूटकर भरा है, लेकिन वो बदतमीज बहुत है। गुलशन को भी ये बात पता है कि वो टैलेंटेड है, इसलिए वो किसी को भी अपने आगे कुछ नहीं समझता। आमिर ने इस फिल्म में बास्केटबॉल कोच का रोल अदा किया है, जिसने गुस्से में अपने सीनियर कोच पर हमला कर दिया। साथ ही शराब पीकर गाड़ी चलाकर पुलिस की गाड़ी में टक्कर मार दी। क्योंकि ये गुलशन का पहला क्राइम होता है, लिहाजा उसे कम्यूनिटी सर्विस के लिए भेजा जाता है। यहां गुलशन को मानसिक रूप से विक्षिप्त बच्चों को बास्केटबॉस सिखाना होता है।
यहीं से सारी कहानी शुरू होती है, क्योंकि गुलशन उन्हें नॉर्मल इंसान नहीं मानता और वो बच्चे अपनी-अपनी लाख परेशानियों के बावजूद बास्केटबॉल सीखने के लिए तैयार हो जाते हैं। इस फिल्म का सार ही यही है कि जिन बच्चों को गुलशन कमतर आंकने की कोशिश करता है... वही बच्चे उसे उसके अंदर की ऐसी कमी से लड़ना सिखाते हैं, जिसकी वजह से उसके खुद के रिश्ते बिगड़े हुए हैं।
कैसी है फिल्म
फिल्म का मैसेज एक सोशल मैसेज है, जैसा कि आमिर की बाकि फिल्मों का होता है। इस फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी बिखरा हुआ सा आपको नजर आ सकता है। लेकिन सैकेंड हाफ काफी बंधा-बंधा सा है। फिल्म में डाउन सिंड्रोम और ऑटिस्टिक बच्चों की कॉमिक टाइमिंग काफी अच्छी है। इस फिल्म की जान ही वो बच्चे हैं। इस फिल्म की सबसे खूबसूरत बात ये है कि आमिर खान ने इन बच्चों को खूब स्क्रीन स्पेस दिया है और उन्होंने भी इसका भरपूर इस्तेमाल किया है।
फिल्म को अगर आप तारे जमीन ने से जोड़कर देखेंगे तो बहुत बड़ी गलती करेंगे, क्योंकि ये फिल्म इतनी ज्यादा इमोशनल नहीं है। सितारे जमीन का कॉन्सेप्ट तारे जमीन से बहुत अलग है और ये फिल्म आपको हर थोड़ी देर में हंसने का मौका देगी। फिल्म को देखकर आपको लगेगा की डायरेक्टर साहब ने वाकई में काफी मेहनत की है।
कैसी है एक्टिंग
इस फिल्म में सभी कास्ट ने बहुत अच्छा काम किया। डाउन सिंड्रोम और ऑटिस्टिक बच्चों की एक्टिंग तो देखने लायक है। लेकिन आमिर खान की ओवर एक्टिंग ने कई जगहों पर फिल्म को हल्का किया है। फर्स्ट हाफ में तो आमिर आपको एक्टिंग के मामले में निराश कर सकते हैं लेकिन सैकेंड हाफ में वो फिर भी संभल जाते हैं। इस फिल्म को देखकर आपको लगेगा कि उनकी एक्टिंग पहले की फिल्मों के जैसी ही है, वही हाव-भाव, वही बोलने का स्टाइल। अपनी इस फिल्म में उन्होंने एक्टिंग के मामले में कुछ ज्यादा अलग नहीं किया।
यही नहीं, आमिर की पत्नी का रोल निभा रहीं जेनेलिया की एक्टिंग भी इस फिल्म में कुछ खास नहीं है। फिल्म के पहले हाफ में दोनों साथ में अच्छे भी नहीं लगते लेकिन सैकेंड हाफ में दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती हुई दिखाई गई हैं। इस फिल्म में कुल मिलाकर जेनेलिया और आमिर को छोड़कर सबने बहुत अच्छा काम किया है। यही नहीं, फिल्म में आमिर की मां का रोल निभा रहीं डॉली आलूवालिया ने भी कमाल का काम किया है। उनकी कॉमिक टाईमिंग भी कमाल की रही।
फाइनल रिव्यू
इस फिल्म का इमोशनल कंटेंट तारे जमीन जैसा स्ट्रॉन्ग तो नहीं है, लेकिन ये फिल्म आपको एक सीख जरूर देकर जाएगी। फिल्म के बच्चे आपको हर पर हैरान करेंगे और हंसने पर मजबूर करेंगे। इस फिल्म में डाउन सिंड्रोम और ऑटिस्टिक बच्चों को असलियत में सितारों की तरह चमकने का मौका दिया है। आप ये फिल्म आमिर के लिए ना देखें... जेनेलिया के लिए ना देखें... बल्कि उन बच्चों के लिए देखें, जिन्हें समाज नॉर्मल नहीं समझता। जिन्हें एबनॉर्मल समझकर लोग उन्हें कुछ भी कह जाते हैं... लेकिन वो बच्चे एक नॉर्मल इंसान से कितने ज्यादा समझदार होते हैं... ये देखने के लिए फिल्म देखें। हालांकि, मेरा मन तो इस फिल्म को फाइव स्टार देने का था लेकिन आमिर और जेनेलिया की एक्टिंग ने इस फिल्म का नमक कम कर दिया। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से मैं इस फिल्म देती हूं तीन स्टार, वो भी उन बच्चों के लिए जो इस फिल्म में ना सिर्फ चमके हैं बल्कि उन्होंने खुद को हर उस गुलशन से बेहतर दिखाया है... जो उन्हें नॉर्मल ना समझने की गलती करता है।


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