Shivaay Movie Review: हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती, अजय देवगन की फिल्म करेगी निराश
अजय देवगन स्टारर शिवाय रिलीज़ हो चुकी है और फिल्म की पूरी समीक्षा हमने की है। जानिए कैसी है अजय देवगन द्वारा निर्देशित एक्शन फिल्म।
क्या है हिट
अजय देवगन के बेहतरीन एक्शन दृश्य, एबीगेल ईम्स का प्रभावशाली अभिनय, बेहतरीन गाने, शानदार फिल्मांकन
क्या हुआ मिस
अजय देवगन और एरिका कार की केमिस्ट्री, ढीली स्क्रिप्ट, भावहीन संवाद, लचर पटकथा
कब लें ब्रेक - इंटरवल
सुपरहिट सीन - जब अनु, यानि कि साएशा सहगल, शिवाय से अपने दिल की बात कहने में हकलाती रह जाएंगी पर शब्द नहीं मिलेंगे!

अजय देवगन की फिल्म शिवाय निराश करेगी। अगर आप एक्शन सीन के शौकीन है तो इस फिल्म को आप एक बार देख सकते हैं। फिल्म का फर्स्ट हाफ धीमा और बोरिंग लग सकता है। हो सकता है कि आप अपनी सीट पर बैठे बैठे ऊब जाएं। अगर फिल्म के ड्रामा और प्लॉट पर थोड़ा और ध्यान दिया जाता तो फिल्म का अंत और भी अच्छी तरह से किया जा सकता था।
प्लॉट
फिल्म शुरू होती है बुरी तरह से ज़ख्मी अजय देवगन के साथ, जो सांस भी नहीं ले पा रहे हैं और ज़मीन पर गिर पड़ते हैं और फिर आता है फ्लैशबैक और हम सब शिवाय की दुनिया में पहुंच जाते हैं और देखते हैं वो सब कुछ जो 9 साल पहले हुआ।
शिवाय एक शेरदिल पर्वतारोही है। जब वो किसी पहाड़ की चोटी पर पड़ा चिलम नहीं फूंक रहा होता है तब वो पहाड़ चढ़ रहा होता है। उसके लिए ये रोज़ का काम है। और वो पहाड़ चढ़ता ही रहता है। वो इस काम को और इस जगह को इतनी बखूबी जानता है कि उसे किसी चीज़ से फर्क नहीं पड़ता। बर्फ में भी वो शर्ट के बिना घूम सकता है।
खैर, उसे एक बुल्गारिया से आई टूरिस्ट से प्यार हो जाता है। नाम है ओल्गा यानि कि फिल्म की विदेशी हीरोइन एरिका कार। शिवाय उसे एक पहाड़ से गिरने से बचाता है और दोनों में प्यार हो जाता है। कुची कुची वाला रोमांस समझ लीजिए।
लेकिन ज़िंदगी इतनी आसान नहीं होती। ओल्गा को पता चलता है कि वो मां बनने वाली है। वो मां बनना चाहती नहीं है लेकिन शिवाय मना लेता है। वो उसे बताता है कि बच्चा वो रख लेगा और ओल्गा अपनी ज़िंदगी चुनने के लिए आज़ाद है। तो वादे के मुताबिक ओल्गा बच्चे को शिवाय के पास छोड़कर चली जाती है।
9 साल बीत जाते हैं। शिवाय अपनी बेटी का नाम रखता है गौरा जो कि गूंगी है। एक दिन उसे पता चलता है कि उसकी मां ज़िंदा है और उसके पिता ने झूठ बोला था कि वो मर चुकी है। थोड़ा रूठने मनाने के बाद वो शिवाय को मना लेती है कि उसे मां से मिलना है। दोनों बुल्गारिया पहुंचते हैं आने वाले खतरे से अंजान। ऐसा खतरा जो उनकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल देगा।
निर्देशन
यू मी और हम के बाद अजय देवगन ने एक बार फिर डायरेक्टर की ज़िम्मेदारी संभाली है। शिवाय उनका बच्चा है। अब जहां उन्होंने एक बड़ा सा कैनवास तैयार कर लिया और उस पर खूबसूरत लोकेशन पेंट कर दी, वो ये भूल गए कि उस पेंटिंग में कहानी भी होनी है और भावनाएं भी। जो लोगों के दिल तक पहुंचे।
शिवाय देखने में बहुत ही खूबसूरत फिल्म है लेकिन ये दर्शकों से जुड़ नहीं पाती। और इसलिए फिल्म खत्म होते होते हर कोई ठगा सा महसूस करता है। हालांकि इस बात की तारीफ की जानी चाहिए कि शिवाय के साथ अजय देवगन ने डायरेक्टर के तौर पर एक लंबी छलांग मारी है।
अभिनय
एक्टिंग पर नज़र डाली जाए तो अजय देवगन बिल्कुल शिवाय की तरह ही चमके हैं। यानि की बिल्कुल देसी सुपरहीरो वाला अंदाज़। हालांकि एरिका कार के साथ उनकी कैमिस्ट्री और रोमांस आपको ज्यादा इम्प्रेस करता हुआ नहीं लगेगा। लेकिन कहना गलत नहीं होगा कि बुल्गारियन ब्यूटी ने जिस तरह से हिंदी में पर्फॉर्म किया वो वाकई में तारीफ के काबिल है। सायशा सैहगल की भी एक्टिंग काफी अच्छी है। वहीं वीर दास के डायलॉग्स आपको थकाऊ लग सकते हैं वहीं गिरीश कर्नाड के डायलॉग आपको 90 के दशक की फिल्मों की याद दिलाएंगे।
तकनीकी पक्ष
फिल्म का फर्स्ट हाफ धीमा और बोरिंग लग सकता है। हो सकता है कि आप अपनी सीट पर बैठे बैठे ऊब जाएं। अगर फिल्म के ड्रामा और प्लॉट पर थोड़ा और ध्यान दिया जाता तो फिल्म का अंत और भी अच्छी तरह से किया जा सकता था। वहीं कैमरे पर आएं तो असीम बजाज के कैमरे ने बर्फीले सीन को काफी बखूबी दर्शाया है।
म्यूज़िक
म्यूजिक पर आएं तो 'बोलो हर हर' गाना लोगों को पसंद आया है। दरखास्त, रातें और तेरे नाल भी गानें लोगों ने पसंद किए हैं।
हिट या मिस
अगर आप एक्शन सीन के शौकीन है तो इस फिल्म को आप एक बार देख सकते हैं। लेकिन फिल्म देखते समय दिमाग के घोड़े ज्यादा न दौड़ाएं।


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