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    Review - बैंड..बाजा..बारात और बोरियत से भरी है 'शादी में जरुर आना'

    By Madhuri
    |
    Rating:
    2.5/5
    Star Cast: राजकुमार राव, कीर्ति खरबंदा, विपिन शर्मा, के के रैना, मनोज पहवा
    Director: रत्ना सिन्हा

    प्रोड्यूसर: विनोद बच्चन, मंजु बच्चन, कलीम खान
    लेखक: कमल पांडे
    क्या है खास: राजकुमार राव
    क्या है बकवास: अधिक खींचा हुआ प्लॉट, घिसा पिटा ट्विस्ट
    आईकॉनिक मोमेंट: वो सीन जहां दोनों परिवार दहेज पर मोलभाव करते हैं।

    राजकुमार राव एक शानदार एक्टर हैं। ये तब साबित होता है जब वो शादी में ज़रूर आना जैसी घिसी हुई कहानी को भी अपने कंधों पर खींचने की पूरी कोशिश करते हैं। हालांकि फिल्म फिर भी बुरी तरह पिट जाती है। यूपी से वो पूरी तरह जुड़ जाते हैं और उत्तर भारत उनकी इसी अदा पर फिदा होकर ये फिल्म देखेगा।

    फिल्म के गाने, फिल्म का काफी मज़बूत पक्ष है। राजकुमार राव और कृति खरबंदा जोड़े के रूप में अच्छे लगते हैं। फिल्म छोटे शहर के दर्शकों को लुभाएगी इसकी पूरी गारंटी है। 

    प्लॉट

    प्लॉट

    सत्येंद्र उर्उ सत्तु (राजकुमार राव) और आरती (कृति खरबंदा) अरेंड मैरिज के लिए मिलते हैं। सत्तु की सरकारी नौकरी है (उत्पाद शुल्क में कर्ल्क) और वो आरती को पूरी तरह इंप्रेस कर लेता है। फिल्म की हिरोइन आरती और उसका परिवार पूरी तरह सत्तु के सिंपल व्यवहार और खुले विचारों से इंप्रेस रहता है।

    प्लॉट

    प्लॉट

    बदकिस्तमती से सत्तु की शादी नहीं होती है क्योंकि दुल्हन शादी वाले दिन भाग जाती है क्योंकि उसे करियर और प्यार में किसी एक को चुनना था। दिल टूटने, रिजेक्ट होने और शर्मा के कारण सत्तु बदल जाता है। सालों बाद किस्मत फिर से एक बार दोनों को मिलाती है लेकिन इस बार जैसा सत्तु कहता है "प्यार और जंग में सब जायज है और अब जंग की शुरुआत होती है।"

    डायरेक्शन

    डायरेक्शन

    शादी में जरुर आना की शुरुआत काफी अच्छी होती है। ये सामाजिक मुद्दों को जैसे दहेज प्रथा, महिला सशक्तिकरण आदि को दिखाती है लेकिन डायेरक्टर रत्ना सिन्हा ने फिल्म को आउटडेटेड ट्रीटमेंट दिया है। उन्होंने फिल्म में सभी तरह के तत्व डालने की कोशिश की है लेकिन एक साथ कई चीजें करने से सब बरबाद हो जाता है वाली लाइन यहां बिल्कुल सटीक बैठती है। फिल्म का थीम वरुण-आलिया की बद्रीनाथ की दुल्हनिया से काफी मिलता जुलता है तो क्लाइमैक्स बरेली की बर्फी जैसा है..एक साथ इतने सारे संयोग!

    परफॉर्मेंस

    परफॉर्मेंस

    राजकुमार राव इस साल तीसरी बार छोटे शहर के लड़के के किरदार में नजर आ रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि उनका ईमानदार और शानदार परफॉर्मेंस आपका दिल छूने में कामयाब होगा। फिल्म के
    सीन में जहां वो इंग्लिश शब्द का सही उच्चारण करने में बल्श करते हैं या दिल तोड़ने के लिए आरती को सुनाते हैं, हर जगह उन्होंने किरदार के सही नब्ज को पकड़ा है। कृति खरबंदा खूबसूरत लगी हैं लेकिन उन्हें अपने एक्सप्रेशन और एक्टिंग पर काम करने की जरुरत है। फिल्म के बाकी कास्ट ने भी अच्छा परफॉर्म किया है।

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष

    सुरेश बीसवेनी की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है। वहीं दूसरी ओर बल्लू सलुजा एडिटिंग में निराश करते हैं। फिल्म को खासकर दूसरे हाफ में च्युइंगम की तरह खींचा गया है।

     म्यूजिक

    म्यूजिक

    फिल्म हालांकि शादी पर बनी हुई है लेकिन फिल्म का एक गाना आपको खत्म होने के बाद नहीं याद रहेगा।

     Verdict

    Verdict

    राजकुमार राव स्टारर यह फिल्म काफी बोर करती है और सीधे तौर पर कहें तो इस शादी में मत ही आना।

    English summary
    Shaadi mein zaroor aana movie review story plot and rating.

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