Sector 36 Review: मासूम बच्चों की हत्या, मामा को मारकर खाया, साइको किलर की खौफनाक कहानी है ये फिल्म

कास्ट: विक्रांत मैसी, दीपक डोबरियाल, आकाश खुराना, दर्शन जरीवाला, बहरुल इस्लाम
डायरेक्टर: आदित्य निम्बालकर
Sector 36 Review: नोएडा की एक बदनाम कॉलोनी निठारी जहां 2005-2006 में हुई सिलसिलेवार हत्याएं इतनी भयानक थीं कि पूरा देश हिल गया था। इस कहानी के बारे में आज भी जिक्र होता है तो लोगों की रूह कांप जाती है और इसी कहानी को पर्दे पर दिखाया गया है फिल्म सेक्टर 36 के जरिये। इस फिल्म में विक्रांत मैसी ने लीड रोल निभाया है और आदित्य निंबालकर ने इसे डायरेक्ट किया है। लेकिन क्या आपको ये फिल्म देखनी चाहिए या नहीं?
क्या है कहानी?
सेक्टर-36 की कहानी शुरू होती है साइको किलर प्रेम के साथ, जो केवल चिकन खाता है और कौन बनेगा करोड़पति उसका फेवरेट शो है। शो खत्म होने के बाद वह सीधा अपने टॉयलेट में जाता है और एक लड़की जिसे उसने मारा है, उसके टुकड़े-टुकड़े कर देता है। क्राइम करने के बाद उनको करनाल के बिजनेसमैन बस्सी की कोठी पर अंजाम देता है। कोठी के पास कई झुग्गियां होती हैं और उस झुग्गी से धीरे-धीरे बच्चे गायब होने लगते हैं।
फिल्म सेक्टर 36 में विक्रांत ने प्रेम सिंह का रोल निभाया है जो कि काफी गरीब है और एक घर में नौकर का काम करता है। लेकिन इसके साथ ही वो एक सीरियल किलर भी है वो अपने मालिक के साथ मिलकर क्रूरता की सारी हदें पार करता है। प्रेम सिंह का मालिक (आकाश खुराना) भी बच्चों का शोषण करता है और क्रूरता भरी कहानी लगातार चलती रहती है लेकिन असली मोड़ तब आता है जब इंस्पेक्टर राम चरण पांडे (दीपक डोबरियाल) की अपनी खुद की बेटी इन घटनाओं का शिकार होने लगती है। जिसके बाद जाकर राम चरण पांडे इस केस की तह तक जाने का फैसला लेता है ताकि और कोई इस जाल में ना फंस सके।
इस फिल्म में यह भी दिखाया है प्रेम सिंह की ऐसी मानसिकता क्यों है। उसमें उसकी बैक स्टोरी दिखाई है कि कैसे बचपन में उसका सगा मामा उसका शोषण करता था। बचपन में अत्याचार सहने वाला प्रेम जिस चाकू से चिकन काटता है उससे ही अपने मामा की जांघ पर वार करता है और फिर उनके टुकड़े-टुकड़े करके उनका मांस खा लेता है और वहीं से शुरू हुई थी एक साइको किलर की कहानी।
कैसी है एक्टिंग
विक्रांत मैसी एक बेहतरीन एक्टर हैं और इस फिल्म में भई उन्होंन बेहतरीन काम किया है। उन्हों प्रेम सिंह का किरदार बखूबी निभाया है और एक समय पर आने के बाद आपको उनसे घिन्न भी आने लगेगी, जो उनकी बेहतरीन एक्टिंग का एक नमूना है। दीपक डोबरियाल ने इंस्पेक्टर पांडे के रूप में शानदार काम किया है। शुरुआत में उनका किरदार एक साधारण पुलिस की तरह ही दिखता है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी में मोड़ आता है दीपक डोबरियाल के कैरेक्टर की भी परतें खुलने लगती हैं।
कैसा है डायरेक्शन
आदित्य निम्बालकर की यह पहली फिल्म है, लेकिन उन्होंने डायरेक्शन में एक बैलेंस बनाए रखा है। फिल्म का टेम्पो धीरे-धीरे बढ़ता है और हर सीन आपको अंत तक जोड़कर रखने में कामयाब है। आदित्य ने कहानी की गहराई और किरदारों के दर्द को बखूबी पर्दे पर उतारा है। हालांकि, कुछ जगहों पर फिल्म की लंबाई थोड़ी खींची हुई महसूस होती है, जिससे दर्शक थोड़ा सा अलग-थलग महसूस कर सकते हैं। विक्रांत मैसी और दीपक डोबरियाल की बेहतरीन परफॉर्मेंस दर्शकों को बांधे रखती है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी भी कमाल की है।
फाइनल रिव्यू
अगर आप क्राइम थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं और दमदार एक्टिंग के साथ सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्में देखना पसंद करते हैं, तो सेक्टर 36 आपको निराश नहीं करेगी। विक्रांत मैसी और दीपक डोबरियाल की परफॉर्मेंस और इनका कॉम्बिनेश आपको ये फिल्म देखने पर मजबूर कर देगा। लेकिन अगर आप कमजोर दिल के इंसान है तो आप इस फिल्म को मिस भी कर सकते हैं क्योंकि कुछ सीन इस फिल्म में वाकई दिमाग को हिला डालने वाले हैं। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से फिल्म को मिलते है 3.5 स्टार।
आपको बता दें, मैडॉक फिल्म्स और जियो स्टूडियोज के बैनर तले दिनेश विजन और ज्योति देशपांडे द्वारा निर्मित, 'सेक्टर 36' नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है।


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