सत्यमेव जयते 2 रिव्यू: जॉन अब्राहम का पैसा वसूल धुंआधार एक्शन, मसाला के ओवरडोज में पीछे छूटे मुद्दे

फिल्म- सत्यमेव जयते 2
स्टारकास्ट- जॉन अब्राहम, दिव्या खोसला कुमार, साहिल वैद, अनुप सोनी, जाकिर हुसैन, हर्ष छाया
निर्देशक- मिलाप जावेरी
लेखक- मिलाप जावेरी

Rating:
3.0/5

'दो टके की जान लेने के लिए 56 इंच का जिगरा नहीं, 56 किलो का हथोड़ा चाहिए' ये वाक्य पुलिसवर्दी में नजर आ रहे जय (जॉन अब्राहम) अपराधियों की धुंआधार पिटाई करते हुए कहते हैं। इस सीन में एक्टर की धमाकेदार बॉडी देख थिएटर में जमकर तालियां और सीटियां गूंजने लगती हैं।

एक बार फिर मिलाप जावेरी जॉन अब्राहम और टी सीरीज के साथ मिलकर 'सत्यमेव जयते' की अगली कड़ी लेकर पेश हुए हैं। इस बार मिलाप जावेरी ने एक्शन, मसाला और एंटरटेमेंट का तीन गुना तड़का लगाया है। जॉन अब्राहम का ट्रिपल रोल 'सत्यमेव जयते 2' में हैं। देखना है कि वह 2 घंटे 22 मिनट में कितना कमाल पर्दे पर इस तीन रोल्स के जरिए कर पाते हैं।

Satyameva Jayate 2

'सत्यमेव जयते 2' में जॉन अब्राहम दो जुड़वा भाईयों सत्य और जय की भूमिका निभाने के साथ साथ इनके किसान पिता की भूमिका भी अदा करते हैं। खास बात ये है कि निर्देशक ने तीनों रोल को शानदार तरीके से हैंडल किया है और फिल्म में इन किरदारों को लेकर कोई कंफ्यूजन नहीं होती है।

साल 2018 में आई 'सत्यमेव जयते' और साल 2021 की 'सत्यमेव जयते 2' में कई समानताएं हैं। दोनों ही फिल्में भ्रष्टाचार व अत्यचारों के खिलाफ लड़ाई करती है तो वहीं जॉन अब्राहम की चट्टान जैसी बॉडी और नोरा फतेही का एक आइटम सॉन्ग। ये सब बिंदु इस फिल्म में जान फूंकने का काम करते हैं।

कहानी

कहानी

सत्य आजाद (जॉन अब्राहम) एक ईमानदार नेता व प्रदेश के गृहमंत्री की भूमिका में हैं। जो देश को भ्रष्टाचार, अपराध, किसान आत्महत्या व अत्याचारों से मुक्त करवाना चाहता है। 80 के दशक में पिरोई गई इस कहानी में सत्य भष्टाचार को खत्म करने के लिए विधानसभा में एंटी क्रप्शन कानून लेकर आता है लेकिन खुद की पार्टी के ही लोग इस कानून को पास करवाने में मुश्किलें खड़ा करते हैं।

वहीं सत्य आजाद की पत्नी विद्या आजाद (दिव्या खोसला कुमार) भी विधायक हैं जो पति के ईमानदारी के रास्ते में रोड़ा बनती हैं। सत्य की पत्नी विपक्ष में हैं जो कि मौजूदा समय की चीफ मिनिस्टर चंद्र प्रकाश (हर्ष छाया) की बेटी हैं।

सत्य आजाद का भाई जय (जॉन अब्राहम का दूसरा रोल) एक ईमानदार पुलिसवाला है जो अपने भाई सत्य से एकदम अलग है। सत्य जहां लोकतांत्रिक तरीके अपराध मुक्त देश बनाना चाहता है तो वहीं जय का काम करने का तरीका एकदम अलग है। लेकिन फिल्म में एक मोड़ ऐसा आता है जब जय और सत्य एक दूसरे के विपरीत होते हैं।

सत्य और जय के पिता दादसाहेब बलराम आजाद (जॉन अब्राहम का तीसरा रोल) एक ईमानदार नेता रहे हैं। जिनकी विरासत और ईमानदारी को लिए सत्य लड़ाई लड़ता है और प्रदेश में अत्याचार मिटाने की हर संभव कोशिश करता है।

अभिनय

अभिनय

सत्य, जय और बलराम आजाद, इन तीन किरादरों को जॉन अब्राहम ने निभाया है। तीनों भूमिका एकदम अलग अलग हैं और तीनों को ही जॉन ने बढ़िया तरीके से निभाने की कोशिश की है। वह नेता वाले रोल में जहां फिट और बढ़िया जम रहे हैं तो उनका जय पुलिसवाले के किरदार में कुछ खामियां भी झलकती हैं। ये किरदार अभिनय के नाते से कहीं कहीं पर कमजोर झलकने लगता है। बाकि जॉन के धमाकेदार एक्शन सीन्स से लेकर भावुक कर देने वाले दृश्यों सबकुछ 'ओवर द टॉप' रहा। दिव्या खोसला अपने रोल को संवारने की कोशिश करती नजर आती हैं। वहीं किसान की पत्नी के रोल में गौतमी कपूर ने उम्दा काम किया है।

सत्यमेव जयते vs सत्यमेव जयते 2

सत्यमेव जयते vs सत्यमेव जयते 2

'सत्यमेव जयते 2' अपने पहले भाग से एकदम अलग है। कहानी हो या किरदार सब एकदम भिन्न है। पहली फिल्म में जहां मनोज बाजपेयी और जॉन अब्राहम भाईयों की भूमिका में थे तो इस बार जॉन अब्राहम जुड़वा भाईयों के किरदार में हैं। 'सत्यमेव जयते 2' भ्रष्टाचार के साथ साथ किसानों के मुद्दे पर भी जोर देती है। जो अन्नदाता की आत्महत्या के गंभीर मुद्दे को भी उठाती है।

'सत्यमेव जयते' और 'सत्यमेव जयते 2' की समानता ये है कि इस बार भी निर्देशक ने नोरा फतेही की लोकप्रियता को देखते हुए उनका एक आइटम सॉन्ग जोड़ा है तो पिछली बार की क्रप्शन वाली लाइन को ही आगे बढ़ाते हुए किरदारों को नए सिरे से ढाला है।

निर्देशन

निर्देशन

सत्यमेव जयते 2 फ़िल्म का निर्देशन मिलाप जावरी ने किया है। निर्देशन के साथ साथ इस फ़िल्म के लेखक भी मिलाप जावेरी ही हैं। इससे पहले मिलाप ने ही सत्यमेव जयते 1 फ़िल्म को लेखन और निर्देशन किया है। 'सत्यमेव जयते' के अलावा मिलाप जावेरी 'जाने कहां से आई है', 'मस्तीजादे' और 'मरजावां' जैसे फ़िल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। 'सत्यमेव जयते 2' के निर्देशन और कहानी की बात करें यह फ़िल्म सामाजिक मुद्दे जैसे भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याएं, महिलाओं के साथ हिंसा, धार्मिक उन्माद जैसे सभी मुद्दों को उठाने की कोशिश करती है। लेकिन निर्देशक ने मसाला और एक्शन को प्राथमिकता दी और इसके चलते ये मुद्दे पीछे छूटते नजर आते हैं।

मिलाप जावेरी ने फिल्म में सामाजिक मुद्दों को फ़िल्म में काफ़ी सावधानी से उठाने का प्रयास किया गया है। इन मुद्दों को एंटरटेमेंट के साथ दर्शाने के लिए निर्देशक ने मसाला और एक्शन का सहारा लिया जो दर्शकों को सीन दर सीन सीटी और ताली बजाने पर मजबूर करती है। फ़िल्म के सीन्स को काफ़ी बारीकी से फ़िल्माने के साथ साथ निर्देशक ने फ़िल्म पूरी तरह से जॉन अब्राहम पर आधारित ही गड़ी है। ऐसे में हर जगह जॉन और जॉन ही नजर आते हैं। लेकिन जॉन ने अपना काम बढ़िया से किया। डायलॉगबाजी हो या एक्शन या फिर इमोशनल ड्रामा जॉन कहीं कम नहीं पड़ते हैं।

कमजोर पक्ष

कमजोर पक्ष

अगर आप मसाला व एक्शन के अलावा कुछ और देखना चाहते हैं तो ये फिल्म आपके लिए नहीं है। ये उन फिल्मों में से एक है जहां कोई लॉजिक नहीं है। वहीं फिल्म के कमजोर पक्ष की बात करें तो सबसे बड़ी कमी एक खलनायक की खलती है। यदि फिल्म में दमदार विलेन की एंट्री भी मिलाप जावेरी करवा देते तो ये फिल्म औसत से ऊपर साबित हो सकती थी। ऐसे में हीरो ही हीरो से लड़ता दिखता है। हालांकि सिर्फ एंटरटेमेंट के मायने में आपको ये फिल्म पैसा वसूल लगेगी।

क्या देखें

क्या देखें

अगर आप जॉन अब्राहम के फैन हैं तो ये फिल्म आप जरूर देखें। फिल्म में मसाला, एक्शन, ड्रामा भरपूर देखने को मिलता है। नोरा फतेही का आइटम सॉन्ग पर आपकी नजरें थमेगी तो जॉन अब्राहम की बॉडी देख पसीना भी छूटेगा। जॉन अब्राहम की फिल्म फैंस को थिएटर्स में खींचने और सीटियां बजाने पर मजबूर करती नजर आ रही है।

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