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सैटेलाइट शंकर फिल्म रिव्यू - अच्छी नीयत के साथ बनी 'देशभक्ति वाली' कमज़ोर फिल्म

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Rating:
2.5/5

कलाकार- सूरज पंचोली, मेघा आकाश, पौलोमी घोष

निर्देशक- इरफान कमल

कुछ फिल्मों की नीयत अच्छी होती है, लेकिन निर्देशक उसे पर्दे पर मनोरंजक बनाने में थोड़े चूक जाते हैं। कुछ ऐसी ही है इरफान कमल के निर्देशन में बनी फिल्म 'सैटेलाइट शंकर'। सूरज पंचोली अभिनीत यह फिल्म देशभक्ति के जज्बे में लिपटी है, और काफी हल्के फुल्के तरीके से देश की अखंडता पर बात कर जाती है। यह आपको गंभीर नहीं करती, यहां मार धाड़, गोलियों की बौछाड़ नहीं है।

कहानी

कहानी

शंकर (सूरज पंचोली) को पूरा बटालियन 'सैटेलाइट शंकर' कहता है क्योंकि वह कई तरह की ज़बान में बात कर सकता है और अपनी बातों से ऐसा जादू चलाता है कि दो बिछड़े दिलों को मिला जाता है। वह हिम्मती, दिलेर और मददगार है। एक दिन कश्मीर में दुश्मन से लड़ते हुए वह घायल हो जाता है और कुछ दिनों के लिए उसे अपनी मां से मिलने के लिए घर जाने की इजाजत दे दी जाती है। लेकिन साथ ही वचन लिया जाता है कि वह ठीक 8 दिनों के बाद वापस आ जाएगा। बटालियन के बाकी फौजी भी अपने चाहने वालों के लिए कुछ कुछ चीजें शंकर को देते हैं, ताकि वह घर जाते जाते रास्ते में उनके घर यह पहुंचाता जाए। शंकर कश्मीर से अपने घर Pollachi जाने को निकलता है। लेकिन इस फौजी की राह आसान नहीं। फौजी सरहद पर तो देश की हिफाज़त के लिए सदा खड़े रहते ही हैं। वह देश के रियल हीरो हैं। लेकिन निर्देशक ने यहां एक ऐसे फौजी को दिखाने की कोशिश की है, जो रोज़मर्रा की जिंदगी में भी हीरो है। देश और हर एक देशवासी उसके लिए कितनी अहमियत रखते हैं। फौजी के घरों की स्थिति से लेकर देश में भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ते हुए शंकर निश्चित दिन अपने घर पहुंचने की कोशिश करता है। वचन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की वजह से किसी भी तरह उसे नौवें दिन बटालियन में पहुंचना है। हर किसी को मुसीबत से निकालने वाला शंकर ऐसे में क्या अपनी बूढ़ी मां से मिल पाएगा? क्या वह वक्त पर बटालियन पहुंच पाएगा? यह देखने के लिए आपको सिनेमाघर तक जाना होगा।

निर्देशन व तकनीकि पक्ष

निर्देशन व तकनीकि पक्ष

फिल्म की पटकथा कुछ हिस्सों में काफी दिलचस्पी जगाती है, लेकिन कहीं कहीं बोर कर जाती है। यह फिल्म शंकर के सफर की है, उसी से शुरु, उसी पर अंत। ऐसे में 8 दिनों का सफर कभी कभी इतना लंबा लगने लगता है कि आप कहानी से टूट जाते हैं। इरफान कमल का निर्देशन कमजोर है। फर्स्ट हॉफ काफी धीमी गति में और बिना किसी रोमांस के आगे चलती है, लेकिन इंटरवल के बाद कहानी में दिलचस्पी शुरु होती है। गुंडों से लड़ता हीरो, सूरज पंचोली और मेघा आकाश की क्यूट सी लव स्टोरी अच्छी लगती है। अलग अलग शहर, भांति भांति के लोग, भाषाएं देखना अच्छा लगा है। वहीं, जितन हरमीत सिंह की सिनेमेटोग्राफी जंची है। मिथुन, तनिष्क बागची और संदीप शिरोडकर द्वारा दी गई संगीत की बात करें तो.. फिल्म में जय हे और आरी आरी ही ध्यान खींच पाती है।

अभिनय

अभिनय

शंकर के किरदार में सूरज पंचोली को अपनी अभिनय क्षमता दिखाने का पूरा मौका मिला। लेकिन क्या उन्होंने इस मौके का फायदा उठाया? नहीं.. पूरी फिल्म में सूरज महज 4-5 हाव भाव देते ही दिखे हैं। निर्देशक ने उन्हें कॉमेडी, इमोशन, एक्शन के साथ साथ देशभक्ति से भरपूर संवाद दिये हैं, लेकिन वह उन दृश्यों को प्रभावशाली नहीं बना पाए हैं। हालांकि उनमें एनर्जी काफी है और वह स्क्रीन पर दिखती भी है। मेघा आकाश और पॉलोमी घोष ने अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है।

देंखे या ना देंखे

देंखे या ना देंखे

देशभक्ति और फौजियों पर बनी फिल्में हमेशा गंभीर हो, यह जरूरी नहीं। इरफान कमल निर्देशित फिल्म सैटेलाइट शंकर देशभक्ति के जज्बे में लिपटी एक हल्की फुल्की फिल्म है। फिल्मीबीट की ओर से सैटेलाइट शंकर को 2.5 स्टार।

English summary
Sooraj Pancholi and Megha Akash starrer Satellite Shankar is entertaining in parts, while exhausting is some. The film is directed by Irfan Kamal.
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