Sarzameen Movie Review: फिल्म में देशभक्ति भी है और ड्रामा भी, काजोल की दमदार एक्टिंग ने डाली जान

कास्ट: पृथ्वीराज सुकुमारन, काजोल, इब्राहिम अली खान
डायरेक्टर: कायोज ईरानी
Sarzameen Movie Review: आज यानी 25 जुलाई को रिलीज हो चुकी है पृथ्वीराज सुकुमारन, काजोल और इब्राहिम अली खान स्टारर फिल्म 'सरजमीन'। ये फिल्म देशभक्ति के जज्बे से भरी फिल्म है। ये मूवी जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही है लेकिन क्या ये फिल्म आपको देखनी चाहिए या स्किप करनी चाहिए आइए इस रिव्यू में जानें।
क्या है फिल्म की कहानी?
'सरजमीन' की कहानी भारतीय सेना के एक सीनियर अफसर विजय मेनन (पृथ्वीराज सुकुमारन) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कश्मीर की सेंसिटिव हालातों में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। लेकिन उसकी जिंदगी में तूफान तब आता है जब वो मिलता है हरमन उर्फ हैरिस (इब्राहिम अली खान) से, जो अपनी असली पहचान और धोखे के बोझ तले दबा हुआ है।
कहानी में मिस्ट्री और भरपूर इमोशन का तड़का लगता है, जब मेहर (काजोल) की एंट्री होती है। मेहर एक ऐसा रोल है जो शांत तो दिखता है, लेकिन उसके अतीत में ऐसे राज छुपे हैं जो पूरी कहानी को एक नया मोड़ दे देते हैं।
यह फिल्म युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि युद्ध के अंदर चल रही इंसानी लड़ाई की कहानी है। जिसमें वफादारी, परिवार, पहचान और दर्द की परतें खुलती जाती हैं।
कैसी है फिल्म?
सरजमीन एक गहरी सोच वाली और इमोशन से भरी फिल्म है। इसमें सिर्फ एक्शन नहीं है, बल्कि दिल को छू लेने वाले रिश्तों की परतें भी हैं। फिल्म बहुत बैलेंस्ड अंदाज में देशभक्ति और निजी मुद्दों को एक साथ लेकर चलती है।
फिल्म में एक्सट्रीम ड्रामा की बजाय ठहराव और रिएलिटी दिखाई है। कई सीन आपको सोचने पर मजबूर कर देते हैं और फिल्म एक सधी हुई स्क्रिप्ट की तरह आगे बढ़ती है। हालांकि, फिल्म का पहला हिस्सा थोड़ा धीमा लगता है और कुछ ट्विस्ट का अंदाजा आपको पहले से ही लग जाता है।
कैसी है एक्टिंग?
पृथ्वीराज सुकुमारन ने एक जिम्मेदार और अंदर से टूटे हुए फौजी के रोल में कमाल कर दिया है। उनकी आंखों में इमोशन हैं और उनके चेहरे पर वो ठहराव है जो एक सीनियर सैनिक की मजबूरी को बखूबी दिखाता है।
काजोल इस फिल्म की जान हैं। मेहर के रूप में उनका रोल मिस्ट्री से भरा हुआ है, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, उनके राज खुलने लग जाते हैं। वे एक सशक्त महिला के रूप में उभरती हैं, जिसने अपने दर्द को अपने अंदर दबाकर खुद को मजबूत बनाया है।
इब्राहिम अली खान अपने रोल में गंभीर दिखते हैं। यह रोल उनके लिए चैलेंजिंग रहा होगा लेकिन उन्होंने ईमानदारी के साथ निभाने की कोशिश की है। कुछ इमोशनल सीन में थोड़ी कमी नजर आती है।
कैसा है डायरेक्शन
कायोज ईरानी का डायरेक्शन मेच्योर और कंट्रोल में है। उन्होंने फिल्म को ओवरड्रामैटिक नहीं बनने दिया। हर सीन को इतना स्पेस दिया कि दर्शक किरदारों को महसूस कर सकें।
सिनेमैटोग्राफी शानदार है- खासकर कश्मीर की वादियां और मिलिट्री सेटअप। बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म के मूड के साथ अच्छा तालमेल बैठाता है- न बहुत ऊंचा, ना बहुत हल्का। एक्शन सीक्वेंस भी जरूरत भर के हैं और रियल लगते हैं। एडिटिंग थोड़ी और टाइट हो सकती थी, खासकर पहले हाफ में।
फाइनल रिव्यू
'सरजमीन' एक ऐसी फिल्म है जो आपके दिल को छूती है और सोचने पर मजबूर कर देती है। यह सिर्फ एक सैनिक की कहानी नहीं है, बल्कि एक पिता, एक दोस्त और एक इंसान की कहानी है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके किरदार हैं- पृथ्वीराज की बैलेंस्ड एक्टिंग, काजोल की दमदार प्रेजेंस और इब्राहिम की एक्टिंग इसे खास बनाते हैं। हालांकि इसमें कुछ कमियां हैं, जैसे धीमी शुरुआत और प्रेडिक्टेबल स्टोरी। अगर आप देशभक्ति, इमोशन और ड्रामा का असरदार मेल देखना चाहते हैं, तो 'सरजमीन' को आप अपनी इस वीकेंड की वॉचलिस्ट में जोड़ सकते हैं।


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