Sarfira Review: सपनों के लिए सारी हदें तोड़ देने की कहानी है 'सरफिरा', अक्षय राधिका की केमिस्ट्री जीतेगी दिल

Sarfira Review: "सरफिरा" का मतलब है पागल, और सपने ऐसे ही होते हैं। लोग अक्सर किसी को "पागल" कह देते हैं जब वह बड़े सपने देखता है या कुछ अलग तरीके से सोचता है। सुधा कोंगरा की इस फिल्म में अलग तरह से सपने देखने का पागलपन और उन सपनों को पूरा करने का जुनून दिखाया गया है। फिल्म में अक्षय कुमार, परेश रावल, राधिका मदान और सीमा बिस्वास हैं। यह सुधा की 2020 की तमिल फिल्म सोरारई पोटरु का हिंदी रीमेक है, जिसमें सूर्या मुख्य भूमिका में हैं।
क्या है कहानी
कहानी सतारा के एक छोटे से गांव के वीर म्हात्रे (अक्षय कुमार) की है, जो एक कम लागत वाली एयरलाइन बनाने का सपना देखता है, जिसे मिडल क्लास और लोअर मिडल क्लास के लोग ट्रैवल करने का खर्चा उठा सकें। वीर, एक एक्स भारतीय वायु सेना पायलट है जो अपने जैसे लोगों के लिए बदलाव लाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। अपने सपने को खतरे में डालने वाली कई बाधाओं का सामना करने के बावजूद, कोई भी उसे रोक नहीं सकता। अपने लोगों का सपोर्ट भी उसे अपने लक्ष्यों को पाने में मदद करने में अहम भूमिका निभाता है।
इस फिल्म में परेश रावल ने भी कमाल का काम किया है उनकी खलनायिकी आपका दिल जीत लेगी। परेश गोस्वामी का रोल निभाने वाले परेश रावल को एविएशन की दुनिया का सरताज माना गया है और वो बार-बार अक्षय के सपनों को चकनाचूर करने की साजिश रचता है। क्योंकि वो गरीबों को अमीरों के साथ सफर करते हुए नहीं देख सकता। फिल्म में राधिका और अक्षय की जोड़ी भी कमाल की दिखाई गई है, दोनों को ही अव्वल दर्जे का सरफिरा दिखाया गया है, जिनमें जुनून है अपना सपना सच करने का।
कैसी है एक्टिंग
फिल्म में सभी ने बेहतरीन काम किया है। अक्षय ने अपने रोल को बखूबी निभाया है लेकिन उनका किरदार पहले कई किरदारों से मेल खाता है। फिल्म जब शुरू होती है तो वो थोड़े अलग नजर आते हैं लेकिन कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है वो अपने कैरेक्टर में घुस जाते हैं। राधिका मदान ने भी इस फिल्म में कमाल का काम किया है और उनकी जोड़ी अक्षय के साथ टक्कर की लगी है। परेश रावल ने विलेन के किरदार में जान डाल दी है। फिल्म के सीमा बिस्वास जिन्होंने अक्षय की मां का रोल निभाया है वो भी अपने मां के किरदार के हर हाव-भाव को बखूबी दिखाती नजर आईं।
कैसा है डायरेक्शन
फिल्म की कहानी काफी बेहतरीन थी लेकिन कई जगहों पर डायरेक्शन में थोड़ी ढीलाई हुई है। कई सीन को लंबे हुए हैं, कई एक्सप्रेशन और कई जगहों पर प्लॉट थोड़ा सटीक नहीं लगा। कई सीन एक के बाद एक आए जिसका कोई तुक नहीं था। लेकिन हां फिल्म में एक चीज जो बहुत अच्छी थी, वो थी ये कि अक्षय भले ही इस फिल्म के हीरो हैं लेकिन उन्हें हीरो बनाया उनके सपोर्ट सिस्टम ने और उनके सपोर्ट सिस्टम को भी उतनी तवज्जो दी गई है। फिल्म में रानी और वीर की केमिस्ट्री को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है। दोनों के बीच खट्टी-मीठी केमिस्ट्री आपका दिल जीत लेगी।
फाइनल रिव्यू
अगर आपको ऐसी मूवीज पसंद है जो कि आपको मोटिवेट कर सकें, तो आप ये फिल्म देख सकते हैं। ये फिल्म सपनों के पीछे भागने और उसके लिए कुछ भी कर गुजरने की हिम्मत को दिखाती है। अगर ऐसा ही इंस्पिरेशन अगर आप अपनी जिंदगी में लाना चाहते हैं, तो ये फिल्म आपके लिए हैं। यह एक फैमिली मूवी और वीर म्हात्रे की कहानी से सभी लोग खुद को इंस्पायर कर सकते हैं। इस फिल्म को फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से मिलती है 3.5 रेटिंग।


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