'सनक' फिल्म रिव्यू: विद्युत जामवाल के एक्शन सीक्वेंस से भरपूर, लेकिन उबाऊ है कहानी और अभिनय
निर्देशक- कनिष्क वर्मा
कलाकार- विद्युत जामवाल, चंदन रॉय सन्याल, नेहा धूपिया, रुक्मिणी मैत्रा, चंदन रॉय
लेखक- आशीष प. वर्मा
प्लेटफॉर्म- डिज्नी प्लस हॉटस्टार
"अभी मैं शांत हूं तो तेरे 9 लोग मरे हैं, एक बार मेरी सनक गई ना....." गुस्से से भरा विवान (विद्युत जामवाल) फोन पर विलेन से कहता है। इसके बाद आप हीरो के सनकपन का इंतजार करते हैं ताकि फिल्म में कुछ रोमांच आए।
सनम एक होस्टेज ड्रामा है और कहानी एक अस्पताल के इर्द गिर्द घूमती है। बॉलीवुड में भले ही अब तक ज्यादा होस्टेज ड्रामा फिल्में नहीं बनी हैं। लेकिन ओटीटी के आने से ग्लोबल कंटेंट तक हर किसी की पहुंच बन चुकी है और ग्लोबल स्तर पर कई शानदार होस्टेज ड्रामा बन चुके हैं। जहां एक्शन के साथ साथ कहानी भी दमदार बुनी जाती है।

विद्युत जामवाल का नाम जुड़ते ही फिल्म में एक्शन के एक स्तर ऊपर होने की उम्मीद रहती है। इस मामले में 'सनक' निराश नहीं करती है। लेकिन निर्माता- निर्देशक के लिए यह समझना जरूरी है कि एक्शन सीक्वेंस के साथ फिल्म की कहानी और अभिनय भी उतनी ही मायने रखती है। जहां फिल्म औंधे मुंह गिर जाती है।
कहानी
विवान आहूजा और अंशिका (रूक्मिणी मैत्रा) एक हैप्पी कपल हैं। लेकिन अपनी तीसरी एनवर्सरी के दिन ही अंशिका को पता चलता है कि उसे एक रेयर किस्म की बीमारी है, जिसका उसे जल्द से जल्द इलाज कराना है।
एक सफल सजर्री के बाद अंशिका और विवान अपनी जिंदगी में वापस को लेकर उत्साहित रहते हैं। विवान उसे अस्पताल से छुट्टी लेकर घर लाने की तैयारी कर ही रहा होता है, जब कुछ आतंकी अस्पताल पर अटैक कर देते हैं। गैंग का लीडर है सज्जु (चंदन रॉय सन्यॉल), जो अस्पताल के सभी स्टॉफ और मरीजों को बंदी बना लेता है। आतंकी पुलिस के सामने अपनी कुछ शर्तें रखते हैं। एक ओर जहां पुलिस बाहर स्ट्रैटेजी प्लान कर रही होती है। वहीं, इधर मिक्स्ड मार्सल आर्ट्स फाइटर विवान अपनी पत्नी को बचाने के लिए एक- एक कर आतंकियों को मार गिराना शुरु करता है। वह बंधक बने लोगों को बचाने में सफल हो पाता है नहीं.. इसी के इर्द गिर्द घूमती है पूरी कहानी।
अभिनय
फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष है अभिनय। विद्युत जामवाल और रूक्मिणी मैत्रा एक कपल बने हैं, लेकिन दोनों के बीच कनेक्शन की कमी दिखी है। दोनों के ही चेहरों पर हावभाव सपाट दिखे हैं, जो कि काफी उबाऊ है। एसीपी जयति भार्गव के किरदार में नेहा धूपिया ने बढ़िया काम किया है। उनमें एक रौब नजर आता है। लेकिन निर्देशक ने उनके रोल को उभारा ही नहीं है। विलेन बने चंदन रॉय सन्यॉल को खतरनाक दिखाने की काफी कोशिश की गई है, लेकिन वो प्रभाव नहीं छोड़ते हैं। वहीं, हॉस्पिटल स्टॉफ बने चंदन रॉय छोटे से रोल में हैं, लेकिन अच्छे लगे हैं।
निर्देशन
एक होस्टेज ड्रामा को बेहद रोमांचक बनाया जा सकता है, वो भी जब कहानी में एक्शन है, रोमांस है, इमोशन है। लेकिन निर्देशक कनिष्क वर्मा इस पक्ष में कमजोर रहे हैं। फिल्म में एक भी दृश्य ऐसा नहीं आता, जहां रोमांच का अनुभव हो। फिल्म की कहानी में कोई नयापन नहीं दिखता है। कह सकते हैं कि शुरु से अंत तक पूरी फिल्म सपाट चलती है। बहरहाल, एक्शन डायरेक्टर एंडी लॉन्ग गुयेन ने अच्छा काम किया है। फिल्म में विद्युत जामवाल पर फिल्माए कुछ एक्शन सीक्वेंस हैं, जो ध्यान खींचते हैं।
तकनीकी पक्ष
अच्छी बात है कि फिल्म में ज्यादा गाने नहीं हैं। लिहाजा, कहानी भटकती नहीं है। एडिटर संजय शर्मा ने भी अच्छा काम किया है। उन्होंने फिल्म को 2 घंटे के अंदर समेटने की कोशिश की है, जो कि फिल्म के फेवर में काम करता है। वहीं फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष है पटकथा, जो कि आशीष प्रकाश वर्मा ने लिखा है। फिल्म के संवाद बेहद निराशाजनक हैं।
देंखे या ना देंखे
यदि आप विद्युत जामवाल के फैन हैं, तो 'सनक' एक बार देखी जा सकती है। अन्यथा फिल्म की कहानी में कुछ भी नया या आकर्षक नहीं है। फिल्मीबीट की ओर से 'सनक' को 2 स्टार।


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