Salaar Movie Review- कंफ्यूज करती कहानी को बचाता है प्रभास का स्टारडम, नहीं चला केजीएफ वाला जादू..

निर्देशक- प्रशांत नील
कलाकार- प्रभास, पृथ्वीराज सुकुमारन, श्रुति हासन, जगपति बाबू, टीनू आनंद
तेरे लिए शिकार भी बनूंगा... शिकार भी करूंगा.... वर्धा (पृथ्वीराज सुकुमानरन) का दोस्त देवा (प्रभास) उसको ये वचन देता है। दोस्त के खातिर कुछ भी कर गुजरने को तैयार देवा पूरे साम्राज्य से भिड़ने के लिए एक पल नहीं सोचता। वो अपने दोस्त को गद्दी पर देखना चाहता है लेकिन असल में उस गद्दी का हकदार कोई ऐसा है जो कि आपको हैरान कर देगा...
केजीएफ और केजीएफ चैप्टर 2 के बाद प्रशांत नील ने प्रभास के साथ इस फिल्म को धमाकेदार बनाने की कोशिश की है। काफी समय से एक हिट की तलाश में प्रभास को भी इस फिल्म की जरूरत थी। मॉर्निंग शो में ठीक ठाक भीड़ के साथ शुरु हुई ये फिल्म लोगों को पसंद आती है या नहीं ये देखने वाली बात होगी? पढ़िए कहानी....
कहानी
फिल्म की कहानी शुरु होती है एक अखाड़े से, कहां पर दो पहलवान आपस में लड़ रहे हैं। वर्धा (पृथ्वीराज सुकुमारन) की नथुनी जो कि उसके सौतेले भाई ने ले ली है, उसको वापस दिलाने के लिए देवा (प्रभास) उस पहलवान से भिड़ जाता है। दूसरे सीन में कुछ गुंडे एक महिला के पीछे पड़े होते हैं जो कि देवा (प्रभास) की मां होती है। उस महिला को बचाने के लिए वर्धा अपना कड़ा उतारकर दे देता है जो कि उसके साम्राज्य का हिस्सा था। इसके बाद प्रभास मां को लेकर खानसार छोड़कर चला जाता है। आध्या (श्रुति हासन) जो कि विदेश से लौटी है, गुंडे उसके पीछे पड़े होते हैं। उसके पिता चाहते हैं कि आध्या.. देवा की मां के पास पहुंच जाए जहां वो सुरक्षित रहेगी। हालांकि वहां पर भी गुंडे आ जाते हैं और देवा आध्या की रक्षा करता है। इंटरवल के बाद पता चलता है कि, खानसार में एक कबीला था जिसको धोखे से राजमन्नार (जगपति बाबू) ने मरवा डाला था। हमले के दौरान कुछ बच्चों को बचा लिया गया था जिसके बारे में राजमन्नार नहीं जानता था। ये बच्चे बड़े होकर बगावत कर चुके हैं और उन्होने कसम खाई है कि खानसार की गद्दी पर बैठने वाले एक एक सरदार का सिर काट डालेंगे। खानसार में आपसी दुश्मनी और रंजिश इतनी बढ़ जाती है कि सभी राजमन्नार और वर्धा के दुश्मन बने हैं और उनको खत्म करके गद्दी हथियाना चाहते हैं। इसीलिए वर्धा अपने दोस्त देवा को खानसार साम्राज्य में बुला लेता है ताकि उसकी रक्षा हो सके। देवा भी अपने दोस्त को गद्दी पर बिठाना चाहता है। ऐसे में जिगरी दोस्त वर्धा और देवा दुश्मन क्यों बन जाएंगे... देवा का उस गद्दी और कबीले से क्या कनेक्शन है? फिल्म इसी पर आधारित है। आगे क्या होगा इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।
अभिनय
प्रभास, पृथ्वीराज सुकुमारन और श्रुति हासन की दुनिया काफी अलग अलग है। फिल्म ज्यादातर प्रभास और पृथ्वीराज सुकुमारन के इर्द गिर्द घूमती है। इस कहानी में प्रभास दमदार एक्शन करते हुए काफी अच्छे लगे हैं। अपने अभिनय से वो लोगों के दिलों में उतरते हैं। इसके अलावा पृथ्वीराज सुकुमारन भी अपने किरदार साथ इंसाफ करते हैं। श्रुति हासन को उतना समय नहीं मिला है और वो अपने अभिनय से कुछ खास प्रभावित नहीं कर पाई हैं। जगपति बाबू की स्क्रीन टाइमिंग आपको हैरान कर सकती है। पहले पार्ट में कहानी बताने और भूमिका बांधने के चक्कर में प्रशांत नील ने दमदार अभिनेताओं से सबकुछ नहीं करवाया है। फिल्म की कहानी को जिस तरह से आगे बढ़ाया जा रहा है आपको केजीएफ और केजीएफ चैप्टर 2 याद आने वाली है।
निर्देशन और तकनीकि पक्ष
सलार को दो पार्ट में बनाना है तो इस फिल्म की शुरुआत काफी शानदार तरीके से की गई है। निर्देशक शुरु में फिल्म को सही से समझाते भी हैं। लेकिन जैसे जैसे फिल्म आगे बढ़ती है और इंटरवल होता है, इसके बाद कई जगहों पर कहानी आपको कंफ्यूज करेगी। निर्देशक जो बताना चाह रहे हैं वो आपके ऊपर से निकल सकता है। अगर आपका ध्यान जरा सा भी चूका तो फिल्म आपके शायद बिल्कुल समझ नहीं आएगी। निर्देशन और कहानी बताने का तरीका इससे अच्छा हो सकता था। तकनीकि पक्ष की बात करें तो फिल्म काफी स्ट्रॉंग है, केजीएफ की तरह जो काल्पनिक दुनिया इसमें बनाई गई है वो आपको सच ही लगेगी। वीएफएक्स काफी शानदार हैं। फिल्म ज्यादातर डार्क शेड के साथ ही शूट की गई है। फिल्म का इमोशनल और एक्शन BGM और भी अच्छा हो सकता था। कोई म्यूजिक या थीम ऐसी नहीं है जो कि आपके जहन में बैठ सकती है।
रेटिंग
अगर आप प्रभास के फैन है तो ये फिल्म आपको देखनी चाहिए। केजीएफ की याद दिलाते प्रशांत नील ने इस फिल्म के लिए कुछ नया काम नहीं किया है। अगर आप कुछ नया सोचकर या काफी उम्मीदें लेकर फिल्म देखने जा रहे हैं तो ये आपको निराश कर सकती है। फिल्मीबीट की तरफ से सालार को 3 स्टार।


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