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    सड़क 2 फिल्म रिव्यू - आलिया भट्ट: संजय दत्त की बढ़िया फिल्म का क्लाईमैक्स - 'राम नाम सत्य है'

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    Rating:
    1.5/5

    फिल्म - सड़क 2

    निर्देशक - महेश भट्ट

    स्टारकास्ट - संजय दत्त, आलिया भट्ट, जीशू सेनगुप्ता, आदित्य रॉय कपूर, मकरंद देशपांडे, प्रियंका बोस व अन्य

    प्लेटफॉर्म - डिज़्नी हॉटस्टार

    सच, हमेशा सच दो लोगों से बनता है, पहला वो जिसमें सच बोलने की हिम्मत हो और दूसरा वो जिसमें सच सुनने की हिम्मत हो। सड़क 2 जब इस डायलॉग के साथ फिल्म का प्लॉट स्थापित करती है तो महेश भट्ट एक जाल बुनते हैं। लगता है कि ढोंगी बाबाओं का पर्दाफाश करने में ये फिल्म कोई ऐतिहासिक कदम उठाएगी। लेकिन बस आप उस सच के पर्दाफाश होने का इंतज़ार ही करते रह जाते हैं।

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    फिल्म दो मनोरोगियों की कहानी है पहला रवि (संजय दत्त) जो अपनी ज़िंदगी खत्म कर अपनी पत्नी के पास जाना चाहता है। और दूसरी आर्या (आलिया भट्ट) जो मनोरोगी है नहीं, लेकिन उसे बनाया जा रहा है जिससे कि वो ये साबित ना कर पाए कि एक ढोंगी बाबा के कारण उसकी मां की जान चली गई।

    रवि और आर्या जब सड़क पर साथ सफर तय करने का वादा करते हैं तो दर्शकों को भी महेश भट्ट एक अच्छी फिल्म का वादा करते हैं। लेकिन क्या ये वादा पूरा हो पाता है, इसके लिए तो आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

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    फिल्म में एक डायलॉग है - प्यार और भगवान, इस दुनिया का सबसे बड़ा धोखा है। लेकिन क्या प्यार और भगवान आपको इस फिल्म में धोखा देते हैं या नहीं, जानिए रिव्यू में -

    कहानी

    कहानी

    फिल्म की कहानी शुरू होती है आलिया के बदला लेने से। आर्या (आलिया भट्ट) अपनी मौसी जो अब उसकी सौतेली मां है, उससे बदला लेने निकली है। क्योंकि मौसी ने दौलत की लालच में अपने बाबा के साथ मिलकर उसकी मां का खून किया है। साथ ही पिता को भी अंधा भक्त बना दिया है। इसके साथ आर्या को पागल करार दे दिया गया है जिससे उसकी बात का कोई विश्वास ना करे। लेकिन आलिया इस पूरे धर्म गुरू और बाबा के धंधे से लड़ने के लिए सोशल मीडिया पर अपनी एक आर्मी तैयार करती है। लेकिन क्या इस आर्मी में वाकई इतना दम है कि वो आर्या उससे बदला ले पाए। ये फिल्म की कहानी कतई नहीं है।

    पलट जाती है कहानी

    पलट जाती है कहानी

    क्योंकि फिल्म की कहानी आर्या के रवि (संजय दत्त) से मिलने के बाद बदल जाती है। रवि, जिसकी मरहूम पत्नी पूजा (पूजा भट्ट) ने उसकी ट्रैवल कंपनी की आखिरी बुकिंग आर्या के नाम की थी। आर्या और रवि एक साथ एक सफर पर निकलते हैं जिसका मकसद होता है आर्या का बाबाओं का पर्दाफाश करना और अंधविश्वास से लड़ना। लेकिन जब ये सड़क खत्म होकर मंज़िल पर पहुंचती है तो फिल्म एक परिवार के एकता कपूर सीरियल की कहानी हो जाती है। जहां कुछ साज़िशें हैं, कुछ राज़ हैं और कुछ नक़ाब हैं।

    किरदार

    किरदार

    फिल्म में आलिया भट्ट को संजय दत्त में वो पिता दिखता है जो उन्हें नहीं मिला। और आलिया भट्ट में संजय दत्त को वो बेटी दिखती है जिसे गोद लेने गई उनकी पत्नी, लेकर वापस ज़िंदा नहीं लौट पाईं। दोनों के बीच ये पिता और बेटी की केमिस्ट्री अच्छी बन पड़ी है और दोनों इसे निभाने की पूरी कोशिश करते दिखते हैं। लेकिन अगर कोई उनका साथ नहीं देता है तो वो है फिल्म में महेश भट्ट और सुहृता सेनगुप्ता का स्क्रीनप्ले।

    अभिनय

    अभिनय

    फिल्म के मुख्य किरदार दो ही हैं - आर्या (आलिया भट्ट ) और रवि (संजय दत्त)। दिलचस्प ये है कि दोनों ही मनोरोगी हैं। और दोनों ने ही अपने किरदारों को बखूबी निभाने की पूरी कोशिश की है। लेकिन कुछ सीन में जहां संजय दत्त किरदार को कुछ ज़्यादा ही पकड़ते दिख जाते हैं वहीं आलिया अपने किरदार को छोड़ती नज़र आ जाती हैं।

    सपोर्टिंग किरदार

    सपोर्टिंग किरदार

    आदित्य रॉय कपूर के हिस्से जो काम आया है, उसे वो जैसा कर सकते थे, वैसा उन्होंने किया है। एक सशक्त किरदार होने के बावजूद, वो फिल्म में कहीं भी अपनी छाप छोड़ते नहीं दिखते हैं। मकरंद देशपांडे के हिस्से फिल्म का मुख्य प्लॉट धर्मगुरू और ढोंगी बाबा आया था लेकिन उनके किरदार को ग्राफ इतना ढीला है कि उसमें प्रभाव छोड़ने की कोई गुंजाइश नहीं थी। इस कमज़ोर कहानी में अगर कोई धुंधला सा सितारा है तो वो हैं जीशू सेनगुप्ता जो अपने किरदार को बेहतरीन ढंग से निभाते दिखते हैं। प्रियंका बोस के हिस्से ज़्यादा सीन नहीं है लेकिन वो भी अपनी छाप छोड़ती हैं।

    डायरेक्शन

    डायरेक्शन

    फिल्म को एक सीक्वल साबित करने के लिए बेतरतीब तरीके से सड़क से जोड़ने की कोशिश की गई है। इसके लिए सड़क के फ्लैशबैक सीन फिल्म में इतने इस्तेमाल किए गए हैं कि आप ऊबने लगेंगे। पूजा भट्ट फिल्म में केवल अपनी पहली फिल्म के दृश्यों में मौजूद हैं। फिल्म एक सफर की कहानी थी लेकिन इस सफर में ऐसा कुछ भी नहीं है जो याद रखा जा सके। महेश भट्ट की इस ढीली सी कहानी को अगर कोई कभी कभी पकड़ पाता है तो वो है स्टार्स का अभिनय।

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष

    फिल्म सड़क और रास्तों की कहानी है लेकिन जय पटेल का छायांकन आपको इस सफर पर साथ जाने को मजबूर नहीं करता है। संदीप कुरूप की एडिटिंग शायद इस फिल्म को बचा पाती पर ऐसा हो नहीं पाया है। खासतौर से कुछ सीन ऐसे थे जिनके बिना फिल्म शायद अच्छी बन पड़ती। सुब्रत चक्रवर्ती और अमित रे का प्रोडक्शन डिज़ाइन भी आपको बाबाओं की दुनिया में नहीं ले जा पाता है। प्रियंका भट्ट के कॉस्ट्यूम भी बाबा में वो जान नहीं फूंक पाते कि वो भगवान लग पाएं। कुल मिलाकर एक अच्छी कहानी को एक कमज़ोर टीम विफल करती दिखती है।

    म्यूज़िक

    म्यूज़िक

    भट्ट कैंप की फिल्मों की विशेषता है गाने। फिल्म के गाने एलबम में सुनने पर ठीक लग सकते हैं लेकिन फिल्म में ये गाने कोई प्रभाव नहीं छोड़ते। ना ही पटकथा में कोई मदद करते हैं। वहीं बैकग्राउंड म्यूज़िक भी फिल्म की कोई मदद नहीं करता है। जबकि फिल्म की म्यूज़िक टीम में संदीप चौटा, जीत गांगुली, प्रशांत पिल्लई, अंकित तिवारी जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

    क्या है अच्छा

    क्या है अच्छा

    फिल्म एक अच्छी शुरूआत करती है और एक अच्छी फिल्म का वादा भी करती है। संजय दत्त और आलिया भट्ट के बीच के कुछ सीन अच्छे बन पड़े हैं। वहीं इंटरवल के पहले फिल्म आपको उलझाए रखने में कामयाब होती है। फिल्म के सभी ट्विस्ट आपको एक अच्छी कहानी की ओर बढ़ाकर ले जाते हैं।

    कहां किया निराश

    कहां किया निराश

    आधी फिल्म के बाद भी फिल्म में कुछ होता नहीं दिखता है। बस ढेर सारे ट्विस्ट और हर ट्विस्ट के साथ फिल्म का विलेन बदलता है जो कुछ समय बाद आपको तंग करने लगेगा। क्लाईमैक्स पर पहुंचकर पूरी फिल्म ताश के पत्तों के महल की तरह ढेर हो जाती है। और इतनी निराशा आपको कभी किसी फिल्म से नहीं हुई होगी।

    देखें या ना देखें

    देखें या ना देखें

    ये फिल्म ऊंची दुकान फीका पकवान है। आपको विंडो शॉपिंग करते समय सब कुछ अच्छा लगेगा लेकिन ट्रायल रूम में आप बस निराश होकर निकलेंगे। इसलिए हमारी मानिए तो आप इस फिल्म को आराम से छोड़ सकते हैं। कुछ मिस नहीं होगा जीवन में ऐसा। हमारी ओर से फिल्म को 1.5 स्टार।

    English summary
    Sadak 2 Film Review: Mahesh Bhatt’s film is streaming on Disney Hotstar. Read full review of the Alia Bhatt, Sanjay Dutt, Aditya Roy Kapur starrer film.
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