समीक्षा: कमल, कलम और कमाल का संगम 'विश्वरूपम'..
फिल्म: 'विश्वरूपम'..
कलाकार: कमल हासन, राहुल बोस, पूजा कुमार, उपेन्द्र,शेखर कपूर
निर्देशक: कमल हासन
निर्माता: राजकमल फिल्म इंटरनेशनल, चंद्रा हसन और कमल हासन
संगीत: शंकर-एहसान-लॉय
गीत: कमल हासन( तमिल), जावेद अख्तर( हिंदी)
समीक्षा: भले ही 'विश्वरूपम' को लेकर पूरे भारत में हो-हल्ला मचा हो लेकिन फिल्म की कहानी बेहतरीन हैं जिसमें उम्दा अभिनय किया है अभिनेता कमल हासन ने। इस फिल्म को देखकर एक बार फिर से केवल यही शब्द निकलेगा कि कमल हासन जैसा कोई नहीं। फिल्म के अंदर उनकी जो ऊर्जा है उसे देखकर आपको कहीं नहीं लगेगा कि आप 58 साल के हीरो की फिल्म देख रहे हैं।
फिल्म बहुत खूबसूरत लिखी है जिसका सारा क्रेडिट कमल हासन को जाता है। फिल्म का एक-एक दृश्य कमल की कलम और अभिनय से सजा है, फिल्म में कमल हासन का डबल रोल है, जिसे बहुत ही खूबसूरत अंदाज में निर्देशित भी किया गया है। फिल्म के टैक्निकल और एनीमेशन हिस्से भी कमाल के हैं। फिल्म का संगीत, फिल्म के संवाद और फिल्म में कलाकारों का अभिनय सब एकदम कमाल का है।
कहानी: फिल्म की कहानी भरतनाट्यम टीचर विश्वनाथ (कमल हासन) और उसकी पत्नी डॉ निरूपमा (पूजा कुमार ) के ईर्द-गिर्द घूमती है। निरूपमा अपने पति से संतुष्ट नहीं रहती है क्योंकि उसके पति को दैहिक संबंधों में रूचि नहीं हैं और वो बाप नहीं बन सकता है। उसकी जिंदगी में केवल संगीत है। इसी चक्कर में उपेक्षित निरूपमा अपने बॉस के प्रति आकर्षित हो जाती है। अचानक से वो और उसका बॉस आतंकवादी उमर ( राहुल बोस) के चंगुल में आ जाते हैं।जो कि उस शहर को जहां निरूपमा रहती है उसे बम से उड़ाना चाहता है। तभी अचनाक से निरूपमा को अपने पति विश्वनाथ का नया चेहरा दिखायी पड़ता है। बुराई पर अच्छाई की जीत होती है और विश्वनाथ घनघोर आंतक से अपने शहर,अपनी पत्नी को बचा लेता है।


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