समीक्षा: व्हाट्स योर राशि
निर्देशक : आशुतोष गोवारीकर
कलाकार: प्रियंका चोपड़ा, हरमन बावेजा, अंजन श्रीवास्तव, राजेश विवेक, दया शंकर पांडे, दर्शन जरीवाला
बीस साल पहले केतन मेहता ने गुजरात लेखक मधु रे के उपन्यास किम्बाल रावेनसवुड पर एक टेलीविजन सीरियल बनाया था। जिसमें एक लड़का अपने परिवार को एक विपत्ति से बचाने के लिए 10 दिन के अंदर शादी करना चाहता है। वह हर राशि की लड़की से मिलता है।
इस तरह हर एपिसोड में एक नई लड़की होती है लेकिन अगर इसी कहानी पर फिल्म बनाई जाए तो थोड़ा नयापन लाना होगा जो आशुतोष गोवारीकर फिल्म व्हाट्स योर राशि में नहीं कर पाए। फिल्म काफी लम्बी और उबाऊ है।
कहानी है एनआरआई लड़के योगेश पटेल (हरमन बावेजा) की, जो शिकागो में रहता है। मुंबई उसका बड़ा भाई करोड़ों का घोटाला कर देता है। अंडरवर्ल्ड का भाई दस दिन में अपना पैसा वापस चाहता है। योगेश के नाना की करोड़ों की जायदाद है जो योगेश के नाम उस दिन हो जाएगी, जिस दिन वह शादी करेगा।
पिता को दिल का दौरा पड़ा है वाला चिरपरिचित बहाना बनाकर योगेश को भारत बुलवाया जाता है। एनआरआई लड़के का बायोडाटा वेबसाइट पर डाला जाता है। 176 लड़कियाँ उससे 5 करोड़ रुपए तक का दहेज देकर शादी के लिए तैयार है। लेकिन नायक है दहेज विरोधी।
दस दिन में उसे शादी करना है और एक दिन में 17 लड़कियों से मिलना मुश्किल है। वह हर राशि की एक लड़की से मिलने का फैसला करता है क्योंकि एक किताब में उसने पड़ा है कि लड़कियाँ 12 प्रकार की होती हैं।
इसके बाद शुरू होता है अंजलि, संजना, काजल, हंसा, रजनी, चन्द्रिका, मल्लिका, नंदिनी, भावना, पूजा, विशाखा और झंखाना से मुलाकातों का सिलसिला। इस कहानी के साथ योगेश के चाचा देबू भाई के रोमांस और उस पर जासूसी की उपकहानियाँ भी गूँथी गई हैं।


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