समीक्षा : टाईम-पास है वेस्ट इज वेस्ट

कलाकार :ओम पुरी, ईला अरुण, आकिब खान, लिंडा बिसेंट
निर्देशक : एंडी डिमोनी
रेटिंग : 2.5/5
समीक्षा : फिल्म का नाम देख कर ही आप इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि फिल्म की कहानी किस पृष्ठभूमि पर आधारित है। भारतीय कलाकारों को लेकर बनाई गयी इस विदेशी फिल्म को इफ्फी फिल्मोत्सव में काफी प्रसन्नता मिली थी। फिल्म हास्य के साथ साथ ड्रामा से भी भरपूर है। यह फिल्म ईस्ट इज ईस्ट का सीक्वेल मानी जा रही है।
गौर करें तो इस फिल्म की कहानी उन तमाम हिंदी फिल्मों से मेल खाती है, जिनमें नायक अपनी पहचान को लेकर संकट में है। माइ नेम इज खान भी इन्हीं फिल्मों में से एक है। हालांकि माइ नेम इज खान का पूरा चित्रण काफी गंभीर पृष्ठभूमि पर आधारित था। लेकिन इस फिल्म में कहानी साजिद के इर्द-गिर्द घूमती है। वह अपनी पहचान को लेकर हर तरफ भटक रहा है। लेकिन उसे कोई राह नहीं मिल रही।
साजिद के पिता पाकिस्तानी हैं और मां ईला लंदन की निवासी हैं। गौर करें तो कुछ ऐसा ही फिल्म खुदा के लिए में भी दर्शाया गया है। साजिद की परेशानी शुरू तब होती है, जब उसे जबरन अपने पिता के साथ उनके मूल्क पाकिस्तान जाने को कहा जाता है। वह इस बात के लिए कतई तैयार नहीं है। वह अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहता है। लेकिन इसी दौरान जार्ज की मुलाकात उसकी पहली पत्नी से होती है।
साजिद अपनी जिंदगी में विचलित हो जाता है। और लगातार अपनी परेशानियों से खुद को अलग करने की कोशिश करता है। इसी दौरान कुछ ऐसे दृश्य होते हैं। ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है कि सभी एक दूसरे के करीब आ जाते हैं। भले ही फिल्म का शीर्षक देख कर आम भारतीय दर्शक इस फिल्म के तरफ आकर्षित न हों। लेकिन सच्चाई यही है कि फिल्म में भारतीय मूल्यों और परिस्थितियों की ही बात की गयी है।
फिल्म में हास्य दृश्य हैं। ओम पुरी ने हमेशा की तरह सार्थकता से अपने किरदार को जिया है। ईला अरूण सधी कलाकार हैं। आकिब और लिंडा ने भी बेहतरीन अभिनय किया है। फिल्म के गाने बेहतरीन और कर्णप्रिय हैं। आप पूरे परिवार के साथ इस फिल्म को एक बार देख सकते हैं।


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