समीक्षा : अश्लील लेकिन दिलचस्प है शोर इन द सिटी

कलाकार: तुषार कपूर, राधिका आपटे, निखिल द्विवेदी,
निर्देशक: राज निदिमुरु, कृष्णा डी के
निर्माता :एकता कपूर
रेटिंग : 2.5/5
समीक्षा : गाली-गलौज, सेक्सी अदाएं, दोअर्थी संवाद लेकिन फिर भी दिलचस्प, जीं हां ऐसी है शोर इन दि सिटी। एक कॉमेडी थ्रिलर है, जो काफी भटकाव के साथ भी लोगों को बांधे रखती है। तीन अलग-अलग लोगों की काहनी लेकिन एक ही ट्रैक पर अच्छे से फिल्माने की कोशिश तो की गई है लेकिन फिर भी कहानी में कुछ भटकाव दिखता है, जिसके चलते निर्दशन भी कही-कहीं बेअसर है।
मुंबई केवल मायानगरी नहीं है बल्कि वो एक भ्रष्ट्र नगरी भी है जिसे फिल्म में दिखाने की कोशिश की गई है, किस तरह भ्रष्ट्राचार का घुन मुबई की आवो-हवा बिगाड़ रहा है। राज निदिमोरू और कृष्णा डी द्वारा निर्देशित ये फिल्म मुंबई में होने वाले गणेश उत्सव के 11 दिनों की कहानी है। अभिनेता के रूप में तुषार कपूर अच्छे लगे हैं, उनकी एक्टिंग लाजवाब है। तुषार कपूर अपनी परफॉर्मेंस से सभी को हैरान कर देते हैं। खास तौर पर राधिका आपटे के साथ उनके कुछ सीन तो हैरान कर देने वाले हैं। जबकि गुंडे मैंडोक के किरदार में एक्टर पिताबोश त्रिपाठी ने सबको बेअसर कर दिया है।
संगीत कानों को नहीं सुहाता लेकिन फिल्म को बांधे रखता है, कुल मिलाकर एक बार देखने लायक है एकता कपूर की 'शोर इन द सिटी", जिसके शोर में आप मनोरंजित होंगे लेकिन बोर नहीं।
कहानी : तुषार कपूर एक पाइरेटड बुक पब्लिशिंग का बिजनेस करते हैं जिनमें उनके साथी हैं. इन तीनों को एक दिन बंदूकों से भरा एक बैग मिल जाता है और वो उसे मोटी रकम में बेचने की सोचने लगते हैं। ईमानदार तुषार कपूर इन सबमें दिलचस्पी नहीं रखता। सेदिंल रामामूर्ति एक अमेरिकन भारतीय है जो अपने घर वापस आता है अपना एक छोटा सा बिजनेस शुरू करना चाहता है लेकिन उसे वहां के लोकल गुंडे परेशान कर रहे हैं।
सुदीप किशन जो एक क्रिकेटर हैं जिसे ये समझ नहीं आ रहा कि वो 10 लाख रुपयों का इंतजाम कैसे करे ताकि उसका टीम में सेलेक्शन हो जाए और उसकी हाल ही में शादी होने वाली है एक एसी लड़की से जिसके घर वाले उसकी अरेंज मैरिज करना चाहते हैं, इन्ही तीनों लोग की कहानी बयां करती है ये फिल्म।


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