माफिया,गैंग पर आधारित फिल्मों से अलग: मिथ्या
'मिथ्या" कहानी है (वी.के.). विनोद कुमार अग्रवाल (रणवीर शौरी), जो हीरो बनना चाहता है मगर इत्तिफाक से वह माफिया के चंगुल में फंस जाता है. इसका कारण है उसका चेहरा जो मुंबई के डॉन राजे भाई यानी कि राजेंद्र सहाय (रणवीर शौरी) से मिलती है. राजे भाई से डॉन की पदवी छिनने के लिए दूसरे डॉन (नसीरुद्दीन शाह) और शेट्टी (सौरभ शुक्ला) राजे भाई को मारकर वी.के. को राजे भाई के रूप में उसकी जगह भेज देते हैं.
राजे भाई का छोटा भाई मन्नु (हर्ष छाया), मां, पत्नी (इरावती हर्षे) और दोनों बच्चे तथा उसके गिरोह के अन्य सदस्य वी.के. को राजे भाई समझते हैं. मगर उससे पहले नसीरुद्दीन की मॉल बनी सोनम (नेहा धूपिया) वी.के. से इतनी करीब हो जाती हैं कि उसे चाहने लगती हैं. वह हमेशा वी.के. की सलामती के लिए प्रयत्नशील रहती है. वी.के. की तरह सोनम भी एक हीरोइन बनना चाहती है और किसी दिन उसके लिए कोई फिल्म बनेगी इस चाहत में वह नसीरुद्दीन के साथ उसकी मॉल बनकर रहती है.
वी.के. के राजे भाई का रूप धरना डॉन नसीरुद्दीन और शेट्टी के लिए खुशी का पहला कदम होता है मगर उसके बाद उनकी खुशियों में ग्रहण लग जाता है क्योंकि उसी दौरान वी.के. एक एक्सीडॆंट के दौरान अपनी याद्दाश्त खो देता है. कहानी में अजब मोड यह आता है कि राजे भाई बनने की कोशिश करने वाला वी.के. अपनी असली पहचान भूलकर खुद को राजे भाई समझने लगता है.
वह सोनम को भूल जाता है. सोनम इन सबके बावजूद वी.के को प्यार करती है. उसके बाद कहानी में एक और मोड आता है और राजे भाई के परिवार और दूसरे सदस्यों को पता चल जाता है कि यह राजे भाई नहीं बल्कि वी.के. है जो एक संघर्षशील हीरो है. अंत में वी.के. की असलियत को जानकर अपने भाई राजे भाई की लाश को परिवार और समाज के सामने लाने के लिए वह लोग वी.के. को मार डालते हैं. अपने प्यार को पाने की चाहत लिए सोनम भी मारी जाती है. इस तरह अपनी पहचान के अभाव में मिथ्या पहचान लिए वी.के. इस मिथ्या संसार से विदा हो जाता है.
अब तक बनी माफिया और गैंग पर आधारित फिल्मों में यह कुछ अलग फिल्म है. थ्रिलर और कॉमेडी का यह संगम सराहनीय है. इसका श्रेय सौरभ और रजत को जाता है. इस फिल्म से रजत कपूर एक बेहतरीन निर्देशक साबित हो सकते हैं और दर्शक उनसे अच्छी फिल्मों की अपेक्षा कर सकते हैं. रणवीर ने अपने कहे अनुसार अब तक का सबसे अधिक कॉम्प्लेक्स किरदार निभाया है. हालांकि कहीं कहीं वह अधिक लाउड हो गए हैं मगर यह कहा जा सकता है कि यह उनके किरदार की मांग है. एक संघर्षशील नायक की छाप उन्होंने काफी अच्छी छोडी है. नेहा धूपिया ने बिना अंग प्रदर्शन के खूबसूरत अभिनय के द्वारा दर्शकों का मन मोहने का काम किया है. मन्नु के रूप में हर्ष ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह एक बेहतरीन अदाकार है. राजे भाई की पत्नी के रूप में इरावती हर्षे ने अपनी अच्छी छाप छोडी है.
निर्देशक -रजत कपूर
निर्माता -अरिंदम चौधरी
संगीतकार -सागर देसाई
नृत्य निर्देशक - रेमो
पटकथा लेखन - रजत कपूर और सौरभ शुक्ला
कलाकार - नसीरुद्दीन शाह, नेहा धूपिया, रणवीर शौरी, हर्ष छाया, सौरभ शुक्ला, विनय पाठक तथा इरावती हर्षे


Click it and Unblock the Notifications