ये फिल्म फालतू नहीं मस्त है

निर्देशक: रेमो डिसूजा
रेटिंग: 2.5/5
कोरियोग्राफर से निर्देशक बने रेमो डिसूजा ने अपनी फिल्म फालतू के प्रोमो और गाने में ही अपना नजरिया स्पष्ट कर दिया था कि वह किसी गंभीर विषय पर फिल्म बनाने नहीं जा रहे। सो विश्लेषक उनसे किसी भी तरह की गंभीर कहानी की उम्मीद न करें। फिल्म देखने के बाद ही रेमो का वह नजरिया बरकरार रहता है।
यह अच्छी बात है, फिल्म में मनोरंजन से भरपूर पार्टी है, मस्ती है, हंगामा है और कॉलेज के दोस्तों के साथ होनी वाली नोक-झोंक हैं। फिल्म युवा दर्शकों को ध्यान में रख कर बनायी गयी है। इस लिहाज से रेमो का यह अच्छा प्रयास है।
कोरियोग्राफी में बेहतरीन तरीके से नयापन लाने की कोशिश की गयी है और रेमो ने अपनी इस कला का इस्तेमाल फिल्म में बखूबी किया है। वे कोरियोग्राफर के साथ कल्पनाशीलता के दृष्टिकोण से भी बेहतरीन हैं और उन्होंने अपनी फिल्म से यह बात साफ कर दी है।
कहानी
फिल्म की कहानी कॉलेज के चार युवा दोस्तों पर आधारित है। एजुकेशन सिस्टम को ही ध्यान में रखते हुए फिल्म की कहानी बुनी गयी है। हालांकि फिल्म में कुछ बेमतलब के संवाद और हद से ज्यादा मजाक कहीं-कहीं शिक्षा का अपमान करता नजर आता है। फिल्म के कलाकार बड़े शहरों के बिगड़े बापों की औलादों का जीवंत चित्रण करते हैं।
साथ ही इस बात को दर्शाते हैं कि उनकी जिंदगी में पार्टी का कितना अधिक महत्व है। फिल्म में मुख्य कलाकार के रूप में जैकी निराश करते हैं। रितेश और अरशद की वजह से फिल्म में कुछ अच्छे संवाद उभर कर दर्शकों के सामने आते हैं। फिल्म की विशेषता उसका मनोरंजन, डांस गाना और मस्ती है।


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