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    'रश्मि रॉकेट' रिव्यू: दमदार विषय और परफॉर्मेंस के साथ सही ट्रैक पर दौड़ती है तापसी पन्नू की फिल्म

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    Rating:
    3.5/5

    निर्देशक- आकर्ष खुराना
    कलाकार- तापसी पन्नू, प्रियांशु पेन्युलि, अभिषेक बनर्जी, सुप्रिया पाठक, सुप्रिया पिलगांवकर, मनोज जोशी आदि
    कहानी- नंदा पेरियासामी
    प्लेटफॉर्म- ज़ी 5

    कुछ विषय ऐसे होते हैं, जिस पर बनी फिल्म देखने का इंतजार होता है। यह देखने की दिलचस्पी होती है कि निर्देशक ने विषय को किस तरह पटकथा में पिरोया होगा। 'रश्मि रॉकेट' भी एक ऐसी ही फिल्म है, जो स्पोर्ट्स में होने वाले 'जेंडर टेस्टिंग' प्रक्रिया के मुद्दे पर बनी है। बता दें, दुनियाभर में महिला एथलीटों को नियमित रूप से भेदभाव का सामना करना पड़ता है, और उनका लिंग परीक्षण किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप ज्यादातर मौकों पर समाज में उनकी बेइज़्ज़ती होती है, साथ ही उनका करियर बर्बाद हो जाता है।

    तापसी पन्नू अभिनीत यह फिल्म जेंडर टेस्टिंग की प्रक्रिया के माध्यम से समाज के बनाए ढ़ांचे में फिट होने वाली 'स्त्रीत्व' की परिभाषा पर सवाल उठाती है। क्या निर्देशक सही सवाल उठाने में सफल रहे हैं? हां, बिल्कुल! खास बात है कि फिल्म शुरु से अंत तक कहीं भी अपने विषय से भटकती नहीं है। साथ ही रश्मि रॉकेट अपने विषय के माध्यम से हर उस महिला को सलाम करती है जो रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपने दिल की आवाज सुनने की हिम्मत करती हैं।

    rashmi-rocket-film-review

    "हार जीत तो परिणाम है, कोशिश हमारा काम है.." छत पर पतंग उड़ाती रश्मि (तापसी पन्नू) से उसके पिता कहते हैं। और रश्मि इन शब्दों को जिंदगी भर के लिए गांठ मार लेती है। यही शब्द उसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ने का हौसला देते हैं.. जो है उसके पहचान की लड़ाई, उसकी प्रतिष्ठा की लड़ाई।

    कहानी

    कहानी

    फिल्म शुरु होती है कि वर्तमान दिन से, जहां दो पुलिस वाले एक गर्ल्स हॉस्टल में घुसते हैं और रश्मि को जबरन उसके कमरे से बाहर खींचकर उसे गिरफ्तार करते हैं। विरोध करने पर एक तमाचा जड़ते हैं और ले जाकर जेल में मर्द कैदियों के साथ बंद कर देते हैं। इस घटना के बाद फिल्म सीधे 14 साल फ्लैशबैक में जाती है, जहां हमें भुज में रश्मि के बचपन दिखाया जाता है। जहां रश्मि की मां (सुप्रिया पाठक) पूरे गांव की औरतों की प्रगति की दिशा में काम करती है, वहीं रश्मि के पिता (मनोज जोशी) अपनी बेटी पर जान छिड़कते हैं। जब मां 'कूल छोकरी' रश्मि से कहती है, "ये लड़की किसी की बात नहीं सुनती".. तो पिता कहते हैं- "अरे वो खुद की सुनती है ना, वो सबसे बड़ी बात है।"

    भुज में 'रॉकेट' के नाम से जानी जाने वाली रश्मि एक पर्यटक गाइड के रूप में काम करती है। वह मस्तमौला लड़की है, जो बाइक चलाती है, जैकेट पहनती है, स्नीकर्स के साथ 'गरबा' खेलती है और आर्मी ऑफिसर गगन ठाकुर (प्रियांशु पेन्युली) से अपने प्यार का इजहार करने में हिचकिचाती नहीं है। रश्मि और गगन की प्यारी सी लव स्टोरी कहानी के साथ साथ धीरे धीरे ट्रैक पर चलती जाती है। रश्मि को सभी रॉकेट क्यों बुलाते हैं, गगन को यह उस दिन पता चलता है जब रश्मि एक आर्मी वाले की जान बचाने के लिए उसके सामने से दौड़कर जाती है। वह रश्मि की प्रतिभा देखकर चकित रह जाता है और उसे उसे एथलीट बनने के लिए प्रोत्साहित करता है।

    अपने चाहने वालों से प्रोत्साहित होकर रश्मि वीरा नेशनल स्तर पर ट्रेनिंग के लिए पुणे पहुंचती और जल्द ही रश्मि से देश की स्टार 'रश्मि रॉकेट' बन जाती हैं। लेकिन रश्मि को शायद ही यह अंदाजा होता है कि उसकी काबिलियत कई आंखों को चुभती भी है। साल 2004 के एशियाई खेलों में रश्मि की शानदार जीत पर जहां देश गर्व कर रहा होता है, वह खुद को एक सदियों पुराने प्रक्रिया- लिंग परीक्षण के नाम पर शोषित पाती है। रश्मि अपनी मां से कहती है- "जिस देश के लिए मेडल जीते ना, उसने एक चुटकी में इतनी जोर का गिराया की क्रैश हो गया तेरा रॉकेट".. लेकिन जल्द ही रश्मि को अपने पिता के कहे शब्द याद आते हैं और वो अपने पति गगन और वकील इशित (अभिषेक बनर्जी) की मदद से अपनी खोई प्रतिष्ठता और न्याय पाने के लिए सिस्टम से लड़ने निकल पड़ती है।

    अभिनय

    अभिनय

    फिल्म की पहली झलक से ही तापसी पन्नू अपने बॉडी ट्रांसफॉरमेशन को लेकर तारीफ बटोर रही हैं। एक एथलीट के किरदार में वो बिल्कुल सटीक लग रही हैं। कोई दो राय नहीं कि इस किरदार में उन्होंने अपनी जान फूंक दी है और उनकी मेहनत पर्दे पर दिखाई देती है। फिल्म में तापसी का किरदार काफी मजबूती से बुना गया है, जहां सभी अन्य किरदारों के साथ उनके अलग अलग बॉण्ड और शेड दिखते हैं। खासकर सुप्रिया पाठक के साथ तापसी के कुछ सीन्स दिल छूते हैं।

    प्रियांशु पेन्युलि एक आर्मी अफसर के किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं। रश्मि के सफर में वह हर कदम पर उसके साथ होते हैं और काफी दमदार लगे हैं। अपने चाल ढ़ाल से लेकर चेहरे के हर हाव भाव को उन्होंने बैलेंस रखा है। वहीं, अभिषेक बनर्जी वकील में किरदार में सराहनीय हैं। वरुण बडोला, मंत्रा, आकाश खुराना, श्वेता त्रिपाठी और अन्य बाकी कलाकार अपनी-अपनी भूमिकाओं में प्रभावी हैं।

    निर्देशन

    निर्देशन

    आकर्ष खुराना एक ऐसे विवादित विषय पर फिल्म लेकर आए हैं, जिस पर आज तक कभी ज्यादा चर्चा नहीं की गई है। स्पोर्ट्स में महिला एथलीट्स की जेंडर टेस्टिंग प्रक्रिया पर उन्होंने ना सिर्फ कहानी बुनी, बल्कि कई जरूरी सवाल भी उठाए और साथ ही जवाब देने की भी कोशिश की। स्पोर्ट्स में जड़ तक घुसी राजनीति से लेकर एक महिला की पहचान को लेकर सामाजिक धारणाओं पर उन्होंने बात की। फिल्म के शुरुआती कुछ मिनट ध्यान भटकाते हैं, जहां हमें रश्मि और भुज से पहचान कराया जाता है। लेकिन मुख्य विषय पर केंद्रित होते ही फिल्म दौड़ने लगती है।

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष की बात करें तो अजय शर्मा और श्वेता वेंकट मेथ्यू ने एडिटिंग पर बढ़िया काम किया है। वहीं, दुर्गाप्रसाद महापात्र द्वारा की गई प्रोडक्शन डिजाइन की तारीफ बनती है। लेखक अनिरुद्ध गुहा, कनिका ढिल्लों और लीशा बजाज के साथ मिलकर आकर्ष खुराना ने संवाद पर अच्छा काम किया है। खासकर कोर्ट सीन्स प्रभावी हैं और सोचने पर मजबूर करते हैं। वहीं, नेहा परती पतियानी की बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी फिल्म में ड्रामा जोड़ती है। कच्छ के मैदान की खूबसूरती हो या खेल के मैदान का उत्साह.. उन्होंने अपने कैमरे से बेहतरीन कैद किया है।

    संगीत

    संगीत

    फिल्म का संगीत दिया है अमित त्रिवेदी ने। फिल्म में चार गाने हैं, लेकिन कोई भी प्रभाव नहीं छोड़ते। 'घनी कूल छोकरी' कहानी के बीच अटपटा सा लगता है। वहीं, बाकी तीनों गाने- जिद, रण मा कच्छ और जिंदगी तेरे नाम भी प्रभावित नहीं कर पाती, क्योंकि इन गानों में नयापन नहीं लगता।

    देंखे या ना देंखे

    देंखे या ना देंखे

    बॉलीवुड में खेल और खिलाड़ियों पर कई फिल्में बनी हैं। लेकिन रश्मि रॉकेट उन सभी फिल्मों से अलग खड़ी होती है। यहां मुख्य नायक की अंडरडॉग वाली कहानी नहीं है। यहां फीमेल एथलीट की लड़ाई है- अपने मान, सम्मान के लिए, अपनी पहचान के लिए, अपनी योग्यता के लिए। आकर्ष खुराना के निर्देशन में बनी तापसी पन्नू, प्रियांशु पेन्युलि और अभिषेक बनर्जी अभिनीत दमदार विषय पर बनी ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए। फिल्मीबीट की ओर से 'रश्मि रॉकेट' को 3.5 स्टार।

    English summary
    Rashmi Rocket Film Review- Directed by Akarsh Khurana this film does not only inform audience about an issue by which women atheletes have to go through. But it also encourages every female who dares to dream and listen to her own heart. Taapsee Pannu wins heart with earnest performance.
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