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#FilmReview: रंगून...तीन हीरो वाली फिल्म के बेस्ट हीरो - कंगना रनौत!

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3.0/5

फिल्म - रंगून
स्टारकास्ट - शाहिद कपूर, कंगना रनौत, सैफ अली खान
डायरेक्टर - विशाल भारद्वाज
प्रोड्यूसर - साजिद नाडियाडवाला, विशाल भारद्वाज, वायाकॉम 18
लेखक - मैथ्यू रॉबिन्स, विशाल भारद्वाज, सबरीन धवन
शानदार पॉइंट - सितारों का अभिनय, फिल्मांकन
निगेटिव पॉइंट - एकदम सादा कहानी और एक बोरिंग क्लाईमैक्स
बेस्ट मूमेंट - कंगना रनौत एक सीन में अजीब से ढंग में एक जापानी सैनिक से बात करने की कोशिश करती हैं। ना कंगना को जापानी आती है, ना उस सैनिक को हिंदी। इसके अलावा फिल्म में एक सीन है जहां कंगना फोकस में है और प्यार, तकरार और धोखे के बारे में बात करती हैं। 

प्लॉट

प्लॉट

1943 वह साल था जब भारत दो विचारधाराओं के बीच फंसा हुआ था एक महात्मा गांधी की अंहिसा की विचारधारा तो दूसरी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी जिनका कहना था कि दुश्मन के हाथ से मरने से अच्छा है कि उन्हें मार डालो। इस समय के अराजक माहौल के बीच फिल्म में तीन मुख्य किरदार हैं एक मिस जुलिा (कंगना रनौत) 40 के दशक की शानदार एक्ट्रेस जिनके पीछे लोग पागल हैं, इनके उपर फिदा है एक पारसी प्रोड्यूसर और एक्शन हीरो जिसकी खुद की शादी खतरे में है। जुलिया के पीछे जमाना फिदा है, लोग उसके पीछे पागल हैं ।

प्लॉट

प्लॉट

ब्रिटिश आर्मी जुलिया को बर्मा के सैनिकों के ट्रूप्स को एंटरटेन करने के लिए भेजती हैं जहां जुलिया की मुलाकात जमादार नवाब मलिक (शाहिद कपूर) से होती है। नवाब मलिक की जिम्मेदारी जुलिया की सुरक्षा करने की भी होती है। दोनों की इस बीच एक दूसरे से प्यार होता है। नवाब मलिक को किसी भी हाल में भारत लौटना है। उनके प्यार का क्या होगा? क्या नवाब मलिक वो है जो जुलिया को दिखा।

डायरेक्शन

डायरेक्शन

2014 में हैदर से लोगों को इंप्रेस करने के बाद विशाल भारद्वाज एक और कहानी लेकर हमारे सामने आए हैं लेकिन ये शेक्सपीयर की कहानी से प्रेरित नहीं है ना इसमें पिछली फिल्मों की तरह ना तो इसमें methaphor का प्रयोग किया गया है। इसे विशाल भारद्वाज ने बहुत सिंपल तरीके से लोगों के सामने लाने की कोशिश की है। फिल्म की स्टार कास्ट का कोई जवाब नहीं है। कहीं कहीं फिल्म का प्लॉट ही ऐसा है कि कहानी कमजोर लगती है। फिल्म से भावनात्मक तौर पर आप नहीं जुड़ पाएंगे। फिल्म देखते समय आपको कभी भी उनके लिए किसी तरह की
फीलिंग नहीं आई जैसा हैदर या मकबूल में हुआ था।
विशाल भारद्वाज ने शानदार फिल्म बनाने की कोशिश की है लेकिन फिल्म से इमोशनली आप खुद को कनेक्ट नहीं कर पाएंगे। फिल्म का अच्छा पार्ट है फिल्म के तीनों कलाकार के कैरेक्टर में जैसे जैसे बदलाव आता है।

परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

कंगना रनौत फिल्म की असली हीरो हैं कहा जाए तो गलत नहीं होगा। जुलिया के रोल में उनका पॉवरफुल परफॉर्मेंस आपको काफी अच्छा लगेगा। उसमे असुरक्षता और कभी कभी असंवेदनशील भी है लेकिन साथ ही इस कैरेक्टर पर आपको प्यार भी आएगा। शाहिद कपूर कंगना रनौत के साथ अपनी केमेस्ट्री से लोगों पर छाप छो़ड़ने में कामयाब रहे। शाहिद कपूर ने भी शानदार एक्टिंग की है भले उनके पास इमोशनली कुछ कर पाने का कोई स्कोप नहीं था। सैफ अली खान एक प्रोड्यूसर के रोल में स्क्रीन पर बिल्कुल फिट बैठते हैं। वो लिमिटेड सीन में भी अपनी छाप छोड़ने में कामयाब हुए हैं।

तकनीकि पक्ष

तकनीकि पक्ष

फिल्म के काव्यात्मक संवाद आपको अच्छे लगेंगे। रंगून की स्क्रीनप्ले थोड़ी पड़ जाती है जिसकी वजह से काफी समय आपको प्लॉट को खोजने में लग जाएगा। फिल्म का पहला हाफ गति पकड़ने में समय जरुर लेता है लेकिन कुछ मोमेंट्स पहले हाफ के आपको काफी अच्छे लगेंगे। फिल्म में पंकज कुमार ने शानदार कैमरा वर्क किया है चाहे वो खूबसूरत पानी की सीन है हो या बढ़िया प्राकृतिक सीन हो। फिल्म में हर चीज को खूबसूरती से शूट किया गया है। फिल्म में एडिटिंग कहीं कहीं कमजोर है।

म्यूजिक

म्यूजिक

फिल्म के गाने ये इश्क है और टिप्पा हो सकता है आप हॉल से गुनगुनाते हुए निकले। मेरे मिंया गए इंग्लैंड और अलविदा भी सुनने में आपको अच्छा लगेगा हालांकि इसमें कुछ भी नया नहीं है।

Verdict

Verdict

ये सच्चाई है कि ये विशाल भारद्वाज की बेस्ट फिल्म नहीं है लेकिन कंगना रनौत की जाबांज एक्टिंग के लिए आप एक बार ये फिल्म देखने जा सकती हैं।

English summary
Rangoon movie review - Directed by Vishal Bhardwaj featuring Shahid Kapoor, Saif Ali Khan and Kangana Ranaut.
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