Raid Review-शानदार परफॉर्मेंस और दमदार डायलोग से भरी टिपिकल अजय देवगन फिल्म है रेड
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अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि "इस दुनिया में सबसे मुश्किल इंकम टैक्स को समझना है" लेकिन अजय देवगन का फिल्म में अमेया पटनायक का किरदार गणित और इंकम टैक्स के बाकी जोड़ घटाव में काफी तेज है। उत्तर प्रदेश में इंकम टैक्स के छापे की सच्ची कहानी पर आधारित इस फिल्म की पृष्ठभूमि 80 के दशक की है। राजकुमार गुप्ता के डायरेक्शन मे बनी यह फिल्म उस समय आई जब लोग डिमोनेटाइजेशन और नीरव मोदी के बारे में चर्चा कर रहे हैं। फिल्म को इस तरह से बनाया गया है कि हर तबके से जुड़े लोगों को फिल्म पसंद आए और फिल्म भी हर तरह इंटरटेनिंग है।अजय देवगन लंबे समय बाद अपने टिपिकल अवतार में नजर आ रहे हैं जिसके लिए उन्हें खासकर पसंद किया जाता है।
प्लॉट की बात करें तो फिल्म में 1981 को दिखाया गया है जहां एक ईमानदार इंकम टैक्स ऑफिसर अमेया पटनायक (अजय देवगन) का ट्रांसफर लखनऊ हो जाता है। वो ईमानदारी औऱ उसुलों का शख्स है औऱ पार्टी में भी वही ड्रिंक पीता है जिसे वो अफॉर्ड कर सकता है।एक समय में उसका डायलोग है "सरकारी नौकर के तोहफा रिश्वत होती है।" उसकी पत्नी मालिनी (इलियाना डिक्रूज) उसकी ताकत है और मालिनी खुद भी हर चीज का ख्याल रखती है।

एक दिन आमेया एक राजनेता रामेश्वर सिंह उर्फ ताउजी (सौरभ शुक्ला) के यहां छापेमारी करे पहुंचा है। ताउजी उसे चैलेंज करता है कि आमेया उनके आलीशान बंगले से एक फूटी कौड़ी भी नहीं बरामद कर पाएगा। वो दमदार डायलोग के साथ रिप्लाई करता है "मैं सिर्फ ससुरात से ही शादी वाले दिन खाली हाथ लौटा था..वरना जिसके घर सुबह सुबह पहुंचा हूं कुछ ना कुछ निकाल कर ही लाया हूं।"
जल्द ही अमेया को समझ आता है कि ताउजी का व्हाइट हाउस वाकई 420 एकड़ में बना हुआ है जहां से गोल्ड बिस्किट और करेंसी नोट दीवारों में गड़े हुए मिले थे। इसके बाद शुरु होती है आइडियल और इगो की जंग जिसमें वन लाइनर्स सुन कर आप भी हूटिंग करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे।सिल्वर स्क्रीन पर असली कहानियों को दिखाना आसान नहीं होता है। लेकिन राज कुमार गुप्ता ने बेहद शानदार तरीके से इसे पर्दे पर दिखाया है और आप आखिरी मिनट तक सीट से चिपके रहेंगे।
अजय देवगन और सौरभ शुक्ला के बीच की बातचीत आपको कैरेक्टर का अगला कदम क्या होगा ये जानने के लिए उत्सुक करेगी। फिल्म के दूसरे हाफ में आप समझ जाएंगे कि आगे क्या होने वाला है और नैरेटिव भी कई जगहों पर धीमा पड़ जाता है। लेकिन जल्द ही राज कुमार सबकुछ वापस ट्रैक पर लाने में सफल हुए हैं।आखिरी 10 मिनट में आपको गाने और ना पचा पाने वाली सीन की वजह से बोरियत भरा लग सकता है। फिल्ममेकर ने यह सुनिश्चित कर लिया है कि फिल्म में कुछ भी ढीला ना पड़े।
फिल्म में अजय देवगन का किरदार किसी सुपरहीरो का नहीं है जो अपने मश्ल्स दिखाता बै बल्कि उनका किरदार शांत और कम बोलने वाले शख्स का है जो दिमाग का इस्तेमाल करता है। अपने इंटेंस आखों के साथ फिल्म में भी अजय देवगन वो इंटेसिटी लाने में कामयाब हुए हैं। फिल्म की डिमांड के हिसाब से अजय देवगन अपने कैरेक्टर में परफेक्ट लगे हैं और बहुत ही कन्विक्शन के साथ वो अपने डायलोग बोलने में भी कामयाब हुए हैं।
हर विलेन अपने आप में फिल्म में एक हीरो होता है और सौरभ शुक्ला का ताउजी का किरदार भी कुछ अलग नहीं है। बेहद टैलेंटेड एक्टर सौरभ शुक्ला ने बेहद दमदार परफॉर्मेंस दिया है और सुनिश्चित किया कि अजय देवगन के सामने उनका किरदार मजबूती से खड़ा हो।अंत में बात करें तो पुष्पा जोशी भी अम्मा जी के किरदार में आपको खुश कर देंगी। आप उन्हें और देखना चाहेंगे। हम शर्त लगा सकते हैं कि उनके चार्म से आप बच नहीं पाएंगे, वो फिल्म में इतनी अच्छी लगी हैं।
अल्फोंसे रॉय की सिनेमेटोग्राफी भी काफी अच्छी है और हर शॉट में ड्रामा और गहराई दिखाई गई है। म्यूजिक की बात करें तो रेड में ज्यादा कुछ नहीं है। सानू एक पल चैन..आपको गुनगुनाएंगे लेकिन बाकी गाने फिल्म का सिर्फ समय बढ़ाते हैं।
राजकुमार गुप्ता के निर्देशन में बनी रेड की कुछ गलतियों को नजरअंदाज करें तो यह अपने दमदार डायलोग और अजय देवगन के अभिनय की वजह से देखने लायक फिल्म है। फिल्म में एक सीन है जहां डायलोग है "अमेया पटनायक ना कभी खाली हाथ आते हैं, और ना कभी खाली हाथ जाते हैं।" डायलोग के हिसाब से ही अजय देवगन फिल्म में बिल्कुल परफेक्ट लगे हैं। अजय देवगन एक ऐसी फिल्म के साथ आए हैं जो मौजूदा समय में बिल्कुल सटीक बैठती है और काले धन को इग्नोर करने या NO बोलने के कई कारण देती है।


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