म्यूजिक फ्रीक्वेंसी पर ट्यून हो सकता है 'रेडियो'

स्टार कास्ट - हिमेश रेशमिया, सोनल सहगल, शहनाज
निर्माता - रवि अग्रवाल
संगीतकार - हिमेश रेशमिया
विधा - म्यूजिकल
लागत - 6 करोड़ रुपये
रिलीज डेट - 3 दिसंबर
रेटिंग मीटर - 1/5
समीक्षा - फिल्म की कहानी में भरपूर कनफ्यूजन है। इमोशनल उलझन में उलझी इस फिल्म में प्रॉब्लम ही प्रॉब्लम है। लेकिन सल्यूशन फिल्म में कहीं नहीं मिलता। स्टोरी मे उलझन के साथ-साथ हिमेश की एक्टिंग भी जमी नहीं। इस फिल्म के बाद हिमेश को मान लेना चाहिए कि एक्टिंग के बजाय वो इतनी मेहनत म्यूजिक पर करें तो उनका सक्सेज ग्राफ काफी ऊँचा उठ सकता है।
'रेडियो'फिल्म भले ही उनकी दूसरी फिल्मों से बेहतर हो पर इस फिल्म के बल पर वह एक्टिंग की जमीन नहीं तैयार कर सकते। फिल्म का म्यूजिक रेशमिया की और फिल्मों की ही तरह, लोगों की जुबान पर चढ़ने वाला है। लेकिन फिल्म में देखने लायक कुछ भी नहीं है। इसलिए ये कहा जा सकता है कि रेडियो, लव फ्रीक्वेंसी पर नहीं ट्यून होने वाली। 'रेडियो' सिर्फ म्यूजिक फ्रीक्वेंसी पर ही बज सकती है।
स्टोरी - फिल्म 'रेडियो' की कहानी विवान शाह ( हिमेश रेशमिया) की प्रेम कहानी है। विवान रेडियो जॉकी है। विवान अपने प्रोग्राम में लोगों के लव प्रॉब्लम्स का सल्यूशन बताता है। पर उसकी ट्रैजडी ये है कि उसकी रियल लाइफ लव स्टोरी का सल्यूशन उसके पास नहीं है। विवान की मैरिज हो चुकी है, पूजा के साथ। पर दोनों की लाइफ से लव गायब है। इसलिए दोनों डाईवॉर्स लेने के लिए डिसाइड करते हैं।
विवान की लाइफ में इंट्री होती है, ऑलवेज स्माइलिंग शनाया (शहनाज) की। शनाया, विवान की लाइफ का पार्ट बन जाती है। विवान को इस बात का आइडिया भी नहीं है। एक दिन विवान को रियलाइज होता है कि शनाया उसकी लाइफ का हिस्सा बन चुकी है। पर इससे पहले ही इस बात का अंदाजा पूजा को भी हो जाता है। अब विवान की कनफ्यूजन ये है कि ना तो वह शनाया को छोड़ पा रहा है और ना ही पूजा से अलग हो पा रहा है।


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