Raazi Review: आलिया भट्ट की शानदार परफॉर्मेंस, पहले कभी नहीं दिखी ऐसी जासूसी थ्रिलर फिल्म
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'लगन की बाज़ी है, चोट अभी ताज़ी है, लगा दे दाव पर दिल, अगर दिल राज़ी है'.. आलिया भट्ट की फिल्म राज़ी की शुरूआत कुछ ऐसी होती है। इन लाइनों के अलावा राज़ी में कई ऐसे रोंगटे खड़े कर देने वाले सीन हैं। बॉलीवुड में यूं तो पहले भी कई जासूसी थ्रिलर देखने को मिली हैं लेकिन मेघना गुल्जार की डायरेक्टोरियल इसलिए अलग है क्योंकि इसमें एक महिला किरदार है। जो कमजोर तो पड़ती है लेकिन जब मातृभूमि की बात आती है तो हर लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहती है।
सहमत (आलिया भट्ट), एक कशमीर की रहने वाली लड़की है जो दिल्ली में पढ़ाई करती है। अचानक वो कश्मीर वापस लौटती है क्योंकि उसके पिता हिदायत खान (रजित कपूर) बीमार हैं और उनके पास दिन बहुत कम हैं। हिदायत भारतीय खुफिया के एजेंट हैं और वे अब अपनी बेटी समहत को भी बॉर्डर पार से खुफिया जानकारी लाने के काम में लगाना चाहते हैं।

ये समय है 1970 का जब भारत और पड़ोसी देश पाकिस्तान लड़ाई की कगार पर है। हिदायत भारतीय खुफिया एजेंसी की 'आंख और कान' बनने के लिए किसी लायक इंसान को चाहते हैं और इसके लिए उनकी बेटी सहमत से बेहतर कोई नहीं हो सकता। वे सहमत की शादी पाकिस्तानी सेना अधिकारी के बेटे इक़बाल (विक्की कौशल) से करवा देते हैं। इन दोनों की शादी आसानी से हो जाती है क्योंकि सहमत के पिता हिदायत और इकबाल के पिता ब्रिगेडियर सैयद (शिशिर शर्मा) काफी अच्छे दोस्त हैं।
शादी से पहले, सहमत को भारतीय खुफिया एजेंसी के एजेंट खालिद मीर (जयदीप अहलावतत) द्वारा जबरदस्त ट्रेनिंग दी जाती है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के की स्टूडेंट के बाद सहमत खुद को पाकिस्तान आर्मी के घराने की छोटी बहू के रूप में पाती है। वो खुद को एक पत्नी और ट्रेन किए गए एजेंट के तौर पर बैलेंस करती रहती है।
जल्द ही सहमत किसी तरह रिश्ते बनाती है और अपने ससुराल में घुसपैठ की जगहें खोज निकालती है। हालांकि उस पर खतरे की तलवार अकसर लटकी रहती है कि कहीं उसका राज न खुल जाए। क्या सहमत के ज़ाती रिश्ते उसके देशभक्ती वाले इरादों को कमजोर कर देंगे?
राज़ी को शानदार बनती है इस फिल्म के तनाव वाले सीन, जो आपको स्क्रीन से आंख भी झपकाने की इजाज़त नहीं देंगे। इस फिल्म में डायरेक्टर मेघना गुल्जार ने इतनी बारीकी से काम किया है कि ऑडिएंस के अंदर भी देशभक्ति जग जाएगी। मेघना ने ऑडिएंस को लुभाने या फंसाने के बजाए बड़ी चतुराई से हरिंदर सिक्का की नॉवेल कॉलिंग सहमत का नाटकीय वर्जन पेश किया है। फिल्म मेकर ने जरूरत से ज्यादा फिल्म को रोमैंटिक नहीं बनाया है। फिल्म जिस तरह से प्लॉट की परते खुलती हैं वो सबसे शानदार है।
वहीं दूसरी तरफ फिल्म को सही से ऑडिएंस तक पहुंचाने के चक्कर में कई बार मेकर्स ने इसे थोड़ी उबाऊ और धीमी रफ्तार देदी है।
मेघना गुलज़ार की राज़ी, आलिया भट्ट की एक और दिल जीत लेने वाली फिल्म है। सहमत, एक बारीकी से गढ़ा हुआ किरदार है, जिसे निभाना बिल्कुल आसान नहीं है। राज़ी आलिया भट्ट के करियर की सबसे शानदार फिल्म है। एक सीन में डर से कांपती हुईं और रोती हुई दिखाई देती हैं.. ऐसी लड़की जिसे पता ही नहीं हैं कि उसे आगे क्या करना है.. जाहिर हो अनुभवी एजेंट नहीं हैं जब वो खतरे से एक कदम दूरी से बच जाती हैं। इस फिल्म में कई बार रोते हुए..डरते से कांपते हुए आलिया की इमोशन साइड दिखी है।
लेकिन जब बात वतन के लिए फर्ज की आती है तो यही लड़की किसी को भी मिटाने के लिए तैयार हो जाती है। चालाकी से काम भी निकाल लेती है। राज़ी जाहिर तौर पर आलिया भट्ट के करियर की सबसे शानदार फिल्म साबित होती है।


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