राज़ 3 रिव्यू : जब मौत बन जाए हर मुश्किल का हल

Raaz 3
बैंगलोर। इस दुनिया में कई ऐसे राज़ हैं जिनसे इंसानी दुनिया बेखबर है। अगर दुनिया में अच्छाई है तो इसी दुनिया का एक रुप और है जहां बुराई और बुरी ताकत बसती है। अच्छाई के पीछे हमेशा एक बुराई होती है और जिस पल इंसान की रुह अच्छाई से नफरत करने लगती है उसी वक्त बुराई उस रुह को अपने वश में कर लेती है और शुरु होता है एक ऐसा सफर जहां इंसान का वो चेहरा सबके सामने आता है जो बहुत ही भयानक और डरावना होता है। हम भारतीयों के दिल में हमेशा एक छुपा हुआ डर होता है जो हमें काला जादू, जादू टोना में विश्वास करने को मजबूर करता है। जब ये डर हद से ज्यादा बढ़ जाए तो जिंदगी मुश्किल हो जाती है और मौत ही इस मुश्किल का हल नजर आती है।

राज़ 3 एक ऐसी ही इंसान की कहानी है जो अपने अंदर की अच्छाई को हराकर बुराई को जीताना चाहती है और जब एक बार ये बुरी ताकत इंसान पर हावी हुई तो फिर वो इतनी ताकतवर हो जाती है कि फिर उसे हरा पाना किसी के बस की बात नहीं। सिर्फ अच्छाई को ताकत बनाकर ही इस बुराई को जीता जा सकता है। वैसे भी हर बुराई का अंत करने के लिए कहीं ना कहीं उसे खत्म करने वाली ताकत बसती है। राज़ 3 ऐसे ही कई राज़ आज सिनेमाहॉल में खोलेगी।

कहानी- फिल्म की कहानी है एक सुपरस्टार शान्या (बिपाशा बासु) की। शान्या फिल्म इंडस्ट्री में काफी सफलता हासिल करती है। वो एक स्मार्ट और डैशिंग निर्देशक आदित्य (इमरान हाशमी) से प्यार करती है। लेकिन तभी एक नयी एक्ट्रेस संजना (ईशा गुप्ता) की इंडस्ट्री में एंट्री होती है और वो शान्या की जगह लेना शुरु कर देती है। शान्या को संजना की सफलता से जलन होने लगती है उसे लगता है की संजना उसके करियर के साथ साथ उसके प्यार आदित्य को भी उससे छीन रही है। फिर शुरु होती है शान्या का काला जादू और संजना की मुश्किलें। आदित्य जो की संजना से प्यार करने लगता है शान्या को हर तरह से रोकने की कोशिश करता है। और जब आदित्य को लगता है कि शान्य को वो रोक नहीं सकता वो शान्या को छोड़कर संजना के पास चला जाता है और शान्या को चेतावनी भी देता है कि वो संजना से दूर रहे। अंत में क्या होता है क्या शान्या संजना को अपने काले जादू से मार देती है? क्या आदित्य शान्या को रोक पाने में सफल होता है? क्या शान्या अपने काले जादू से आदित्य को पा लेती है? ये सभी राज़ खोलेगी राज़ 3।

राज़ 3 में बिपाशा बासु ने एक बार फिर से ये प्रूफ कर दिया कि ये बंगाली बाला आज भी अपनी एक्टिंग से बाकी हिरोइनों को पानी पिला सकती हैं। बिपाशा के जबरदस्त एक्टिंग स्किल्स के आगे ईशा गुप्ता ही नहीं बल्कि इमरान हाशमी भी फीके नजर आए। बिपाशा का हॉट अंदाज, उनकी संवाद अदायगी, उनके एक्सप्रेशन वाकई लाजवाब हैं। दूसरी तरफ ईशा गुप्ता पूरी फिल्म में एक सेंसिटिव गुड़िया सी नजर आईं जिसे हर कदम पर किसी के सहारे की जरुरत हो। इमरान हाशमी ने जरुर काफी अच्छी् कोशिश की है और कहीं कहीं पर वो काफी बेहतरीन नजर आए।

फिल्म का संगीत कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाया। जहां तक राज़ 3 की बात है तो उसका एक एक गाना आज भी हर किसी की जबान पर चढ़ा है उसके संगीत के आगे राज़ 3 के गाने बहुत ही फीके हैं।

विक्रम भट्ट ने काफी कोशिश की है लोगों को डराने की और फिल्म के बेहतरीन 3 डी इफेक्ट से काफी हद तक वो सफल भी हुए हैं। फिल्म के कुछ सीन ऐसे हैं जिन्हें देख एक बार को आपके रोंगटे खडे हो जाएंगे। खास तौर पर वो सीन जिसमें ईशा गुप्ता की नौकरानी खुद को पंखे से लटकाकर सुसाइड कर लेती है और वो सीन जिसमें ईशा के उपर 800 से भी ज्यादा कॉकरोच चढ़ जाते हैं और वो अपने सारे कपड़े उतार कर डरकर भागती हैं।

फिल्हाल कहा जा सकता है की फिल्म ओवरऑल दर्शकों को जरुर पसंद आएगी। बिपाशा के फैन्स को ये फिल्म जरुर भाएगी। अब इंतजार है बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट का ये जानने के लिए कि आखिर बिपाशा का काला जादू बॉक्स ऑफिस पर भी चल रहा है कि नहीं।

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