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    सत्ता के महाभारत की मुक्कमल तस्वीर है 'राजनीति'

    By अंकुर शर्मा
    |

    Rajneeti
    डायरेक्टर:प्रकाश झा
    बैनर:
    प्रकाश झा प्रोडक्शन,वॉक वाटर मीडिया,यूटीवी मोशन पिक्चर्स
    संगीतकार:
    प्रीतम चक्रबर्ती,आदेश श्रीवास्तव,शांतनु मोइत्रा
    गीतकार:
    गुलज़ार,समीर,स्वानंद किरकिरे
    कलाकार:
    अजय देवगन,रणबीर कपूर,कैटरीना कैफ, मनोज वाजपेयी, अर्जुन रामपाल, नसीरुद्दीन शाह,सारह थॉमसन केन
    रेटिंग : 3.5/5

    समीक्षा : शुक्रवार को प्रदर्शित हुई फिल्म राजनीति मौजुदा सत्ता की मुक्कमल तस्वीर है। कहा जा सकता है कि झा ने इसे महाभारत के किरदारों में के रूप में जिस तरह पेश किया है वो काबिले तारीफ है। जिस तरह महाभारत हमें बताता है कि अगर आपको सफल होना है वहां, जहां सब पहले लोग अपना भला सोचते हैं, तो वहां आपको कूटनीति का सहारा लेना पड़ेगा क्योंकि ये ही वक्त की दरकार है।

    केवल अच्छा होना ही आपकी सफलता का मपदंड तय नहीं करता है, बल्कि आपको दुश्मनों के सफाये के लिए थोड़ा स्वार्थी और थोड़ा चालाक होना जरूरी है, झा की राजनीति ने यही संदेश दिया है। फिल्म में सभी कलाकारों का काम जबरदस्त है, मनोज और अर्जुन रामपाल ने उच्चकोटि का काम किया है। रणबीर और कैटरीना क जवाब नहीं, दोनों ने ऐसा काम कर दिया है , जिसके लिए वो जाने ही नहीं जाते, झा की राजनीति ने दोनों को ग्लैमर की दुनिया से निकाल कर अभिनय की दुनिया में प्रवेश करा दिया है। नासिरूदीन शाह और नाना पाटेकर का उत्कृष्ठ अभिनय है ।

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    झा के निर्देशन की दाद देनी चाहिए, गंगाजल का जादू यहां उन्होंने दोहरा दिया है, इतनी बड़ी स्टार कास्ट होते हुए भी फिल्म बोरिंग नहीं है। संगीत भी कर्ण प्रिय है, हालाकि पटकथा इतनी जबरदस्त है कि गानों की जरूरत नहीं, बल्कि बैकग्राउंड म्यूजिक ने प्रभावी काम किया है, फिर भी फिल्म का गाना 'मोरा पिया' दर्शकों पर अपना जादू बिखेरता नज़र आता है ।

    अब रह गए अजय देवगन जिन्होंने अपने किरदार में ऐसी जान फूंक दी है जिसके कारण हर कोई बस उनके लिए यही कह सकता है कि वो लाजवाब है।यूं तो अर्जुन को सब याद करते हैं लेकिन जो बात कर्ण में थी वो अर्जुन में भी नहीं थी, कर्ण के चरित्र को अजय देवगन ने जी कर अभिनय की एक मिसाल पेश की है। जो उदाहरण के तौर पर दर्शक और बॉलीवुड द्वारा हमेशा याद रखा जायेगा। कुल मिला कर सत्ता के महाभारत की अनोखी दास्तान है राजनीति।

    कहानी : फिल्म की कहानी एक राजनीतिक परिवार की है। भास्कर बने नसीरुद्दीन शाह एक वामपंथी नेता हैं जिसके कुछ अपने आदर्श है। जिससे प्रभावित होकर विपक्ष के नेता की बेटी भारती (निखिला त्रिखा) अपने पिता के विरुद्ध जाकर भास्कर की पार्टी में शामिल हो जाती है। मगर एक भूल से भास्कर के किए-कराए पर पानी फिर जाता है और वह सब कुछ छोड़कर वनवास पर चला जाता है। वह भारती से प्यार भी करता है मगर उसे छोड़ने को मजबूर भी हो जाता है। भास्कर के जाने के बाद भारती एक बेटे को जन्म देती है जिसे भारती का भाई बृज गोपाल (नाना पाटेकर) एक मंदिर में छोड़ आता है।

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    इसके बाद भारती की शादी जबरदस्ती एक राजनीतिक परिवार में कर दी जाती है यह शादी भी राजनीतिक लाभ उठाने के लिए की जाती है। इस बीच भारती के पिता को फालिज का अटैक पड़ता है और वह सत्ता संभालने की सारी जिम्मेदारी भारती के देवर मनोज बाजपेयी को सौंप देते हैं मगर भारती के ससुर मनोज को सत्ता का कार्यभार सौंपने पर आपत्ति जताते हैं और वह भारती के बड़े बेटे अर्जुन रामपाल को कुर्सी सौंप देते हैं।

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    यह बात वीरेंद्र प्रताप (मनोज बाजपेयी) को नागवार गुजरती है और वह इस परिवार में फूट डालकर सत्ता हथियाने की राजनीति करना शुरू कर देता है, इस षड़यंत्र में वह हथियार बनता है भारती के बेटे (सूरज प्रताप)यानी अजय देवगन को, जिसे ब्रिज (नाना) बचपन में मंदिर में छोड़ देता है।दोनों का मकसद इस परिवार की बर्बादी होता है।

    अर्जुन रामपाल की शादी कैटरीना कैफ से की जाती है क्योंकि उनके पिता बहुत ही बड़े उद्योगपति होते है और वह उसी का सहयोग देंगे जो उन्हें मुख्य मंत्री की गद्दी पर बिठाएगा। फिल्म में अर्जुन रामपाल के छोटे भाई समर प्रताप(रणबीर कपूर)की एंट्री होती है जो कि बहुत ही सीधा-साधा पढ़ा लिखा युवक है और परिवार के राजनीतिक माहौल से कोसों दूर रहना पसंद करता है लेकिन धीरे धीरे वह भी राजनीतिक माहौल में ढलने लगता है।

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