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पीएम नरेंद मोदी फिल्म रिव्यू : शक्तिमान से भी बड़े सुपरहीरो हैं हमारे आदर्श बालक नरेंद्र

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Rating:
1.5/5
PM Narendra Modi Movie Review: Vivek Oberoi | Omung Kumar | FilmiBeat

उमंग कुमार की फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी के एक सीन में विवेक ओबेरॉय, पीएम मोदी के रूप में दिल्ली के लाल चौक पर भारत का झंडा फहराते दिख रहे हैं और अपने अंदर के सनी देओल को बाहर निकालकर फेंफड़े निकल जाने तक चीखते दिखाई देते हैं। एक और सीन में वो एक बच्चे हैं जो अपनी थकी हुई मां को खाना खिला रहे हैं और बैकग्राउंड में अजीब सा म्यूज़िक बज रहा है।

इस फिल्म में कुछ भी नॉर्मल ढूंढना, भूसे में से सुई ढूंढने जितना मुश्किल है। पहले सीन से आखिरी तक आपको फिल्म की कहानी में कुछ ऐसा अनोखा नहीं मिलेगा।

अगर फिल्म के प्लॉट से शुरू करें तो फिल्म नरेंद्र मोदी के बचपन में आदर्श बालक की छवि में लेकर जाती है जो अपने पिता को चाय बेचने में मदद करता है। चाय बेचने के लिए उसका जुमला होता है - सबकी चाय, मोदी की चाय! कुछ सीन बाद एक थियेटर में हम उसे दहेज प्रथा का विरोध करते भी देखते हैं।

मोदी, देव आनंद की फिल्म गाईड के राजू गाईड से बहुत ज़्यादा प्रेरित थे और मोदी अपने अंदर की आवाज़ सुनने के लिए सन्यास ले लेते हैं। भले ही आदर्श बालक नरेंद्र के माता पिता ऐसा नहीं चाहते हैं। मोदी पहाड़ों पर चले जाते हैं और वहां एक साधु उनसे कहता है कि वापस जाकर लोगों की सेवा करो।

तो मोदी वापस आ जाते हैं और RSS में भर्ती हो जाते हैं। ये उनका मुख्यमंत्री बनने की तरफ पहला कदम होता है। चाहे उनका गुजरात दंगों की तरफ आंख मोड़ लेना हो या फिर अपने कैबिेनेट मंत्री के भ्रष्टाचार हो, मोदी अपना देसी सुपरहीरो है। हर एक मुश्किल को पार करते हुए वो प्रधानमंत्री बनने की ओर बढ़ता है।

उमंग कुमार ने पूरी फिल्म में एक भी ऐसा मौका नहीं छोड़ा है जहां वो नरेंद्र मोदी की जय जयकार ना कर पाएं। फिल्म में नरेंद्र मोदी को भगवान की तरह पेश किया है। लेकिन जब उनके सामने विपक्ष के नेताओं को दिखाने की बात आई है तो उन्हें केवल मज़ाक के तौर पर दर्शकों को हंसाने के लिए दिखाया गया है।

अगर अभिनय की बात करें तो विवेक ओबेरॉय पर किया गया मेकअप कहीं कहीं काम आ जाता है। लेकिन वो अभिनय करना भूल चुके हैं इसमें कोई दो राय नहीं बची है। मज़ेदार ये है कि फिल्म में कहीं कहीं तो विवेक ओबेरॉय मोदी का लहज़ा भूलकर अपने लहज़े में डायलॉग बोलते दिखाई देते हैं। एक दो सीन छोड़कर उनको पूरी फिल्म में इग्नोर किया जा सकता है। उनकी मां के रोल में ज़रीना वहाब ने कमाल किया है।

फिल्म की एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई हो सकती है। फिल्म के म्यूज़िक में याद रखने लायक कुछ नहीं है। बजाय हमें हमारे प्रधानमंत्री के निजी जीवन को दिखाने के, उमंग कुमार ने एक सुपरहीरो की कहानी लिखी है जिसे देखने में किसी को कोई दिलचस्पी भी नहीं होगी। फिल्म में सबकुछ बस बोर करता है। हमारी तरफ से फिल्म को 1.5 स्टार।

English summary
PM Narendra Modi Review - Viveik Oberoi makes his version of Modi a snoozefest. Director Omung Kumar has created a desi superhero out of Narendra Modi.

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