Pippa Movie Review: भारत के वीरों को सच्ची श्रद्धांजलि देती वॉर फिल्म 'पिप्पा', ईशान खट्टर ने किया इंप्रेस

निर्देशक- राजा कृष्ण मेनन
कलाकार- ईशान खट्टर, मृणाल ठाकुल, प्रियांशु पेनयुली, सोनी राजदान
प्लेटफॉर्म- अमेज़न प्राइम वीडियो
"आम हिंदुस्तानियों को इस बात का अंदाज़ा तक नहीं था कि पड़ोस में लगी आग हमारे घर तक भी पहुंच जाएगी और बांग्लादेश के इतिहास के कुछ अहम पन्ने हिंदुस्तान की स्याही से लिखे जाएंगे.." यहां से शुरु होती है 'पिप्पा' की कहानी और 1971 युद्ध में भारत की जीत पर खत्म होती है। बता दें, इस युद्ध के दौरान पीटी-76 टैंक को जवानों ने पंजाबी में 'पिप्पा' नाम दिया, क्योंकि वह घी के डिब्बे की तरह पानी पर तैर सकता था।
इस फिल्म की कहानी कैप्टन बलराम सिंह मेहता की किताब 'द बर्निंग चैफीज' पर आधरित है जिसमें गरीबपुर की लड़ाई का उल्लेख किया गया है। इस किताब में साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की एक ऐतिहासिक घटना का प्रत्यक्ष विवरण है। फिल्म में इसी घटना के द्वारा दिखाया गया है कि कैसे एक गुप्त मिशन ने भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। फिल्म दिखाती है कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारत के किस तरह इंसानियत को चुना था और 1 करोड़ बांग्लादेशियों को शरण दी। पाकिस्तान से ये जंग भारत ने उनके लिए लड़ी थी।
कहानी
ये फिल्म भारत की 45 कैवेलरी रेजिमेंट के कैप्टन बलराम सिंह मेहता और उनके भाई मेजर राम और बहन राधा के इर्द गिर्द घूमती है। दोनों भाई 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पूर्वी मोर्चे पर गरीबपुर की लड़ाई में बहादुरी से लड़े थे। वहीं बहन ने भी इस लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने आत्मसपर्पण कर दिया था। वहीं, भारत द्वारा युद्ध की घोषणा के ठीक 13 दिन बाद, एक नए राष्ट्र का जन्म हुआ था- बांग्लादेश।
अभिनय
कैप्टन बलराम उर्फ बल्ली की भूमिका में ईशान खट्टर ने अच्छा काम किया है। वह अपने हाव भाव में दमदार नजर आए हैं। खास बात है कि जब कैप्टन बलराम सिंह मेहता इस युद्ध में शामिल हुए थे तो उनकी उम्र 26 साल की थी। और ईशान खट्टर ने भी इस फिल्म को 26 वर्ष में ही शुरू किया था। प्रियांशु पेनयुली के साथ ईशान के कुछ दृश्य बेहतरीन बने हैं। बड़े भाई मेजर राम की भूमिका में प्रियांशु ने काफी सधा हुआ और प्रभावी अभिनय किया है। मृणाल ठाकुर और सोनी राजदान ने अपनी सीमित भूमिकाओं के साथ न्याय किया है। काश इनके किरदारों को थोड़ी और गहराई दी जाती। हालांकि खास बात है कि फिल्म के किरदारों को यहां टिपिकल देशभक्ति फिल्मों के किरदारों से काफी अलग दिखाया गया है। हां, ये देश से प्यार करते हैं और कुछ भी कर गुजरने का जज्बा है। लेकिन ये परफेक्ट नहीं हैं। इनमें खामियां हैं, जो इन्हें रिलेटेबल बनाते हैं।
निर्देशन व तकनीकी पक्ष
राजा कृष्ण मेनन इससे पहले फिल्म एयरलिफ्ट के निर्देशन से दर्शकों का दिल जीत चुके हैं। कह सकते हैं कि वॉर फिल्मों पर उनकी अच्छी पकड़ है। उनकी खास बात है कि युद्ध जैसे विषय में भी वो मानवता और संवेदनशीलता से जुड़ी एक कड़ी जरूर जोड़ते हैं, जो कहानी को मजबूत बनाती है।
लेखक रविंदर रंधावा, तन्मय मोहन और राजा कृष्ण मेनन ने काफी दिलचस्प तरीके से कहानी को तीन भाई- बहनों और युद्ध के बीच तालमेल के साथ आगे बढ़ाया है। कैप्टन बलराम, मेजर राम और बहन राधा के बीच की बॉण्डिंग को स्थापित करने में बहुत ज्यादा समय नहीं दिया गया है, लेकिन उनका रिश्ता महसूस किया जा सकता है। फिल्म के संवाद काफी अच्छे हैं। वहीं, वॉर की भयावहता को भी निर्देशक ने स्क्रीन पर ओवर द टॉप दर्शाने की कोशिश नहीं की है। कुछ चीजों को कल्पना के भी छोड़ा है, जो एक सकारात्मक पहलू है। खैर, फिल्म की एडिटिंग पर थोड़ा और काम किया जा सकता था। खासकर फिल्म का फर्स्ट हॉफ काफी खिंचा हुआ लगता है। वहीं ग्राफिक्स कमजोर हैं, जिस वजह से वॉर सीन्स एक दमदार प्रभाव बनाने से चूक जाती है। एआर रहमान का साउंडट्रैक कहानी में जोश जोड़ता है।
एक बात जो खटकती है, वो ये कि फिल्म का नाम पीटी-76 टैंक के नाम पर रखा गया है जिसे कैप्टन बलराम ने चलाया था। वो कई बार पिप्पा के प्रति अपना प्यार व्यक्त करते हैं, लेकिन कहानी कैप्टन और मशीन के बीच के रिश्ते पर ज्यादा प्रकाश नहीं डालती है।
रेटिंग
गरीबपुर की लड़ाई एक ऐतिहासिक लड़ाई थी जिसने उपमहाद्वीप का नक्शा बदल दिया। ईशान खट्टर अभिनीत ये फिल्म काफी प्रामाणिक तरीके से 1971 के भारत- पाकिस्तान युद्ध को पेश करती है। यदि आप वॉर फिल्म पसंद करते हैं, जो पिप्पा आपको जरूर देखनी चाहिए, खासकर मानवता के लिए खड़े होने की भारत की भावना को समझने के लिए। फिल्मीबीट की ओर से 'पिप्पा' को 3 स्टार।


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