Phone Bhoot Movie Review: रॉन्ग नंबर डायल करती है कैटरीना, ईशान और सिद्धांत स्टारर ये भूतिया कॉमेडी
निर्देशक- गुरमीत सिंह
कलाकार- कैटरीना कैफ, ईशान खट्टर, सिद्धांत चतुर्वेदी, जैकी श्रॉफ
"हमेशा यूथ का पल्स पकड़ना चाहिए.." फिल्म का एक किरदार कहता है। लेकिन क्या निर्देशक इस हॉरर कॉमेडी से दर्शकों के पल्स को पकड़ पाए हैं! आइए जानते हैं।
दो दोस्त और एक भटकती आत्मा मिलकर ghostbusters यानि की भूत भगाने वाले बन जाते हैं। वो भटकती आत्माओं को मोक्ष दिलाते हैं। लेकिन उनके काम में ब्रेक तब लगता है जब उनका सामना एक दुष्ट तांत्रिक से होता है। इसी कहानी पर सवा दो घंटे की पूरी फिल्म बनी है 'फोन भूत'। शुरुआती मिनट से ही निर्देशक फिल्म का मूड सेट कर देते हैं। दो ओवर द टॉप किरदारों के साथ कहानी शुरु होती है, हंसी मजाक के साथ सही ट्रैक पर चलती है, लेकिन मामला तब बिगड़ता है जब हर अगले संवाद में पंच आने लगते हैं। पंच भी ऐसे, जहां विक्स से लेकर माज़ा के विज्ञापन तक.. और 'हकीकत', 'कोई मिल गया' से लेकर 'हीरो' जैसी फिल्मों तक.. कई संदर्भ दिखेंगे।
कहानी
बचपन के दोस्त गुल्लू (ईशान खट्टर) और मेजर (सिद्धांत चतुर्वेदी) हॉरर यानि की भूतों के क्रेजी फैंस हैं। उन्होंने अपने फ्लैट में अजीब से मुखौटे और आकृतियां सजा रखी हैं, जिनकी आंखों से लाल रोशनी निकलती है। परिवार और सोसाइटी के लिए वो नकारे निकम्मे हैं और इसी टैग को हटाने के लिए वो अलग अलग बिजनेस प्लान आजमाते रहते हैं। लेकिन वो ये नहीं जानते कि उनके पास एक बड़ी शक्ति है.. वो ये कि वो भूतों को देख सकते हैं। इस बात का अहसास उन्हें दिलाती है रागिनी (कैटरीना कैफ).. जो खुद एक भूत है। तीनों मिलकर आत्माओं को मोक्ष दिलाने का एक बिजनेस शुरु करते हैं.. जिसका नाम है 'फोन भूत'। इस दौरान रागिनी उन्हें अपने मिशन के बारे में भी बताती है। वह अपने बिछड़े प्यार से मिलना चाहती है। लेकिन दूसरी ओर तांत्रिक आत्माराम (जैकी श्रॉफ) को इसकी भनक लग जाती है और वो इनकी जान के पीछे लग जाता है। ऐसे में गुल्लू और मेजर की मदद से क्या रागिनी अपना मिशन पूरा कर पाएगी? क्या है रागिनी की असली कहानी? यही बनती है फिल्म की पटकथा।
अभिनय
कैटरीना कैफ उन कलाकारों में हैं, जिन्हें एक अच्छी तरह लिखी गई भूमिका दी जाए तो वो कमाल कर सकती हैं। कई फिल्मों में हमने इसका उदाहरण देखा है। 'फोन भूत' में भी एक्ट्रेस ने काफी कोशिश की है लेकिन सपाट पटकथा और कमजोर संवाद फिल्म को शुरू से अंत तक प्रभावित करते हैं। सिद्धांत चतुर्वेदी और ईशान खट्टर के किरदारों को थोड़ा ओवर द टॉप रखा गया है। दोनों एक्टर्स की एनर्जी पर्दे पर देखने लायक है.. लेकिन दिक्कत वहां होती है, जब उनके हर डायलॉग में कॉमिक पंच ढूंस दिया गया लगता है। लिहाजा, जब भी अन्य किरदार सामने आते हैं, तो आप अपनी उम्मीदें जगाते हैं। दुष्ट तांत्रिक आत्माराम के रूप में जैकी श्रॉफ हैं, जो भटकती आत्माओं से मोक्ष दिलाने के लालच में बुरे काम कराता है। वहीं, शीबा चड्ढा उल्टे पैर वाली चुड़ैल है, जो बंगाली बोलती है। अफसोस की बात ये है कि इनमें से किसी भी किरदार में कोई दम नहीं दिखता है।
निर्देशन व तकनीकी पक्ष
रवि शंकरन और जसविंदर सिंह बाथ द्वारा लिखित, डायरेक्टर गुरमीत सिंह की ये फिल्म "अंदाज अपना अपना" के रास्ते पर चलने की कोशिश करती रही, जहां कलाकार ओवर द टॉप जाकर कॉमेडी करते हैं। लेकिन यहां निर्देशक वैसा प्रभाव डालने में सफल नहीं रहे हैं। संवाद के जरीए यहां पुरानी और कुछ नई हिंदी फिल्मों के संदर्भ भी कहानी में पिरोए गए हैं। लेकिन वो कहते हैं ना कि किसी भी चीज की अति सही नहीं होती.. यहां वही गलती हुई है। निर्देशक ने हर अगली लाइन में पंच डाला है, हर अगले सेकेंड वो हंसाने की कोशिश करते हैं, जाहिर है ऐसे में कुछ जगह वो सफल होते हैं, तो कुछ जगह कहानी औंधे मुंह गिर जाती है। ऐसे में सवा दो घंटे की फिल्म की आपको लंबी लगने लगती है।
तकनीकी स्तर पर, फिल्म का वीएफएक्स, प्रोडक्शन डिजाइन और प्रोस्थेटिक्स पॉजिटिव पक्ष है। फिल्म की एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई हो सकती थी। वहीं, फिल्म के गाने प्रभावहीन और ढूंसे हुए लगते हैं।
रेटिंग
कैटरीना कैफ, ईशान खट्टर और सिद्धांत चतुर्वेदी स्टारर 'फोन भूत' एक औसत हॉरर कॉमेडी है। जहां कुछ कॉमिक पंच अच्छा काम कर जाते हैं और हंसाते हैं, वहीं कुछ हिस्सों में फिल्म गजब बोर करती है। कैटरीना का भूतिया अंदाज दिलचस्प है। सिद्धांत और ईशान की कॉमिक टाइमिंग अच्छी है। लेकिन कमजोर पटकथा फिल्म को औसत बना देती है। फिल्मीबीट की ओर से 'फोन भूत' को 2.5 स्टार।


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