O Romeo review: प्यार, सुपारी और खून-खराबा! शाहिद की एक और डार्क लव स्टोरी देखने जाएं या नहीं... यहां जानें
O Romeo movie review: जब Vishal Bhardwaj और Shahid Kapoor साथ आते हैं, तो उम्मीदें अपने आप आसमान छूने लगती हैं। Kaminey और Haider जैसी दमदार फिल्मों के बाद दोनों की चौथी फिल्म O'Romeo के रूप में सामने आई है। 13 फरवरी 2026 को रिलीज हुई यह फिल्म 90 के दशक के मुंबई अंडरवर्ल्ड के बैकग्राउंड पर एक खौफनाक लेकिन इमोशनल प्रेम कहानी पेश करती है।

फिल्म का टोन डार्क है, माहौल भारी है और कहानी धीरे-धीरे आपको अपने शिकंजे में कसती है।
क्या है कहानी
O'Romeo की कहानी हुसैन उस्तारा और सपना दीदी की असली घटनाओं से प्रेरित है, जिनका जिक्र एस. हुसैन जैदी की किताब Mafia Queens of Mumbai में मिलता है। हालांकि फिल्म खुद को बायोपिक नहीं कहती, बल्कि सच्चाई और कल्पना को मिलाकर एक सिनेमाई दुनिया रचती है।
शाहिद कपूर यहां 'उस्तरा' नाम के कॉन्ट्रैक्ट किलर बने हैं- टैटू वाला, खामोश और बेहद खतरनाक। वह इस खूनी दुनिया से बाहर निकलकर सुकून भरी जिंदगी जीना चाहता है, लेकिन किस्मत उसे फिर उसी दलदल में खींच लाती है।
इसी बीच एंट्री होती है अफ्शा की, जिसे तृप्ति डिमरी ने निभाया है। अफ्शा सब कुछ खो चुकी है और बदले की आग में जल रही है। वह उस्तरा को चार लोगों को मारने की सुपारी देती है। यहीं से शुरू होता है प्यार, धोखे और खून-खराबे का सिलसिला।
कैस ही फिल्म
O'Romeo का पहला हाफ जंगल में लगी किसी धीमी आग की तरह लगता है। फिल्म का पहला हिस्सा धीरे-धीरे कहानी बुनता है। विशाल भारद्वाज माहौल और किरदारों को इस्टेब्लिश करने में समय लेते हैं। सिनेमैटोग्राफी में शैडो और म्यूटेड कलर पैलेट का इस्तेमाल कहानी को और गहरा बनाता है। हालांकि कुछ दर्शकों को रफ्तार थोड़ी सुस्त लग सकती है, लेकिन यही ठहराव आगे जाकर असर दिखाता है।
इंटरवल के बाद फिल्म की रफ्तार अचानक तेज हो जाती है। एक्शन सीक्वेंस ज्यादा तीखे हो जाते हैं और कहानी में इमोशनल विस्फोट देखने को मिलता है। थिएटर फाइट सीन में 'Dhak Dhak Karne Laga' का इस्तेमाल आपको एक अलग एक्सपीरिएंस देगा। क्लाइमैक्स में विशाल भारद्वाज की ट्रेडमार्क ट्रैजिक टोन साफ झलकती है- जहां प्यार और मौत एक-दूसरे से अलग नहीं रह पाते।
फिल्म में कई कमियां भी हैं, जैसे- दूसरे हाफ में कुछ हिस्से थोड़े प्रेडिक्टेबल लगते हैं। रनटाइम थोड़ा लंबा महसूस हो सकता है। गाली-गलौज और हद से ज्यादा खून-खराबा हर दर्शक को पसंद नहीं आएगा।
कैसी है एक्टिंग
शाहिद कपूर ने उस्तारा के किरदार में गजब की परतें डाली हैं। वह सिर्फ एक गैंगस्टर नहीं, बल्कि अंदर से टूटा हुआ इंसान भी लगता है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, डायलॉग डिलीवरी और इमोशनल सीन, सब कुछ आपको अंदर से महसूस होने वाली है।
तृ्प्ति डिमरी अफ्शा के रूप में शांत लेकिन मजबूत दिखती हैं। उनकी आंखों में दर्द और बदले की जिद साफ नजर आती है। दोनों की केमिस्ट्री स्क्रीन पर जमी हुई लगती है।
विलेन 'जलाल' के किरदार में Avinash Tiwary का काम बैलेंस्ड है। उनका किरदार और भी खतरनाक हो सकता था, लेकिन जहां भी वह आते हैं, सीन में स्ट्रेस बढ़ जाता है।
सपोर्टिंग रोल में Nana Patekar और Vikrant Massey अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं, हालांकि विक्रांत का कैमियो थोड़ा छोटा महसूस होता है।
फाइनल रिव्यू
O'Romeo गैंगस्टर जॉनर को नया रूप तो नहीं देती, लेकिन अपने डार्क टोन, मजबूत परफॉर्मेंस और इमोशनल गहराई से इंप्रेस जरूर करती है। शाहिद कपूर की दमदार एक्टिंग और तृप्ति डिमरी की सधी हुई मौजूदगी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। अगर आप इंटेंस क्राइम ड्रामा और ट्रैजिक लव स्टोरी पसंद करते हैं, तो यह फिल्म बड़े पर्दे पर देखने लायक है।


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