नो प्रॉब्लम: टिपिकल बॉलीवुड कॉमेडी

By Jaya Nigam

निर्देशक - अनीस बज्मी
निर्माता - अनिल कपूर
कलाकार - अनिल कपूर, अक्षय खन्ना, संजय दत्त, परेश रावल, सुष्मिता सेन, कंगना रनाउत

रेटिंग मीटर - 3/5

समीक्षा - नो प्रॉब्लम भी बॉलीवुड की टिपिकल कॉमेडी फिल्मों जैसी है। एक सीधी-सादी कहानी और ढेर सारा कन्फ्यूजन। इस फॉर्मूले पर चलने वाले लोगों के लिए ये एक बेहतर फिल्म साबित होगी। लेकिन अगर आप कहानी में गलती से भी लॉजिक, ह्यूमर या फिर कहानी खोजने लग जाएंगे तो ये फिल्म आपका मनोरंजन करने में पूरी तरह असफल रहेगी। बज्मी की ये फिल्म भी उनकी पिछली फिल्मों की तरह एक सीधी सड़क पर दौड़ती है।

निर्देशक अनीस बज्मी अपने कांसेप्ट और फिल्म के उद्देश्य को लेकर बिल्कुल साफ रहते हैं। यही वजह है कि उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिप पर हमेशा सफल रहती हैं। अभी हाल में उन्होने अपने इंटरव्यू में कहा कि नो प्रॉब्लम का एक ही उद्देश्य है लोगों को हंसाना। भारी-भरकम स्टारकास्ट के साथ कॉमेडी का मजा कई गुना हो जाता है इसे हम बज्मी की वेल्कम सरीखी कई फिल्मों में देख चुके हैं। इससे पहले बज्मी नो एंट्री, वेल्कम, सिंह इज किंग जैसी सफल कॉमेडी फिल्में दे चुके हैं।

सितारों का एक्टिंग बढ़िया है लेकिन टाइप्ड भी है। अनिल नो एंट्री का दूसरा भाग करते नजर आ रहे हैं जबकि परेश रावल भी वही बासी अंदाज में लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। लेकिन इसे कलाकारों के अभिनय की समस्या नहीं कहा जाएगा बल्कि निर्देशक की बासी पटकथा को इसका जिम्मेदार माना जाना चाहिए।

नो प्रॉब्लम में सुष्मिता ने अपना रोल काफी बढ़िया निभाया है जबकि कंगना भी अपनो रोल में खूब जमती हैं। कंगना को सैड फिल्मों से कॉमेडी की ओर बढ़ता देख कर बढ़िया लगता है। दोनों अभिनेत्रियों ने अपनी भूमिकाओं काफी उम्दा तरीके से निभाया है। फिल्म का म्यूजिक ठीक-ठाक है लेकिन कोई खास असर छोड़ने में नाकाम रहता है। हालांकि 'मस्त पंजाबी' गाना दमदार है।

कहानी - कहनी लूट पर आदारित है। इसलिए यश (संजय दत्त) और राज (अक्षय खन्ना) उठाईगीर बने हैं। दोनों बचपन के दोस्त हैं। राज अपनी जिंदगी से परेशान है और ईमानदार बनना चाहता है जबकि यश हमेशा कुछ ना कुछ ऐसा कर देता है कि राज बदलते-बदलते रह जाता है। यश एक बैंक लूट लेता है और उसके चक्कर में लोगों के शक के घेरे में आ जाता हैं बैंक मैनेजर झंडूलाल (परेश रावल)। झंडू के ही घर में यश और राज ने पनाह ले रखी है।

अर्जुन (अनिल कपूर) एक परेशानहाल पुलिसवाला है जो अपनी पत्नी काजल (सुष्मिता सेन) की स्पिलिट पर्सनैलिटी की समस्या से परेशान है। काजल कभी एक लविंग और केयरिंग पत्नी बन जाती है। तो कभी दूसरे ही पल वह अपने पति को मारने की योजना बनाने लगती है। संजना (कंगा रनाउत) काजल की छोटी बहन है। राज कंगना को अपना दिल दे बैठता है। इसी बीट एक इंटरनेशनल डायमंड सेंटर से काफी महंगे हीरे चोरी हो जाते हैं। केस सुलझाने का काम अर्जुन को मिलता है। इधर झंडुलाल अपने बैंक के चोरों को ढूंढ रहा है।

संजना और राज की सगाई तय हो जाती है लेकिन ठाक सगाई से पहले झंडुलाल को यश और राज के बारे में पता चल जाता है और वह दोनों को धमकाता है कि अगर उन्होने बैंक के पैसे लौटाए बगैर शादी की तो वह दोनों का राज खोल देगा। यश और राज इस मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए मंत्री की हत्या की योजना बनाते हैं। इसी बीच डायमंड चुराने वाले मार्को को दोनों पर शक हो जाता है और वह दोनों का पीछा करता है। यहां कन्फ्यूजन अपने चरम पर पहुंचता है। और हंसी के फव्वारे शुरू हो जाते हैं। खैर दोनों किसी तरह अपनी बेगुनाही साबित करते हैं और झुंडुलाल के पैसे लोटाते हैं।

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