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    'निकम्मा' रिव्यू: बिल्कुल अपने नाम पर गई है शिल्पा शेट्टी और अभिमन्यु दसानी स्टारर ये फिल्म

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    Rating:
    1.5/5

    निर्देशक- साबिर खान
    कलाकार- अभिमन्यु दसानी, शिल्पा शेट्टी, शर्ली सेतिया, समीर सोनी, अभिमन्यु सिंह

    कुछ फिल्में होती हैं, जिसे देखने के दौरान आप स्वपनलोक में जाना चाहते हैं, आखें बंद होने को बेताब होने लगती है और दिमाग कुछ भी सोचने से इंकार कर देता है। 'निकम्मा' को देखते हुए बिल्कुल यही भाव आते हैं। यह साल 2017 में आई तेलुगु फिल्म 'मिडिल क्लास अब्बाई' की रीमेक है। नानी और साई पल्लवी अभिनीत ये फिल्म एक मध्यम वर्गीय परिवार के रिश्तों, विश्वास और कठिन परिस्थितियों की कहानी थी। उस फिल्म की सफलता का श्रेय कहीं ना कहीं कहानी से ज्यादा परफॉमेंस को जाता है। लेकिन उसकी रीमेक 'निकम्मा' में निर्देशक, लेखक से लेकर कलाकार तक, सभी भ्रमित दिखे।

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    यह कहानी है एक बेरोजगार मध्यवर्गीय लड़का आदि (अभिमन्यु दासानी) की, जो अपने भाई (समीर सोनी) के साथ रहता है। लेकिन उसकी जिंदगी में बदलाव तब आता है, जब उसके भाई की शादी हो जाती है और घर आती है भाभी अवनि (शिल्पा शेट्टी)। वह मान बैठता है कि उसकी भाभी की वजह से वह अपने भाई से दूर हो गया है और मन ही मन उससे नफरत करता है। लेकिन स्थिति कुछ ऐसी बनती है कि एक नए शहर में कुछ महीनों के लिए उसे भाभी के साथ ही रहना पड़ता है। इस दौरान कई बातों का खुलासा होता है और वह अवनि की इज्जत करने लगता है। अवनि, जो कि एक आरटीओ अधिकारी होती है, अपनी ईमानदारी की वजह से एक बड़ी मुसीबत में फंस जाती है। शहर का एक गुंडा उसकी जान के पीछे पड़ जाता है। ऐसे में आदि किस तरह से अपनी भाभी की रक्षा करता है और क्या वो सफल हो पाता है.. इसी के इर्द गिर्द घूमती है कहानी।

    शिल्पा शेट्टी इंटरव्यूशिल्पा शेट्टी इंटरव्यू

    दो घंटे अट्ठाईस मिनट लंबी यह कहानी कुछ मजेदार संवाद और कुछ पावर-पैक एक्शन सीन के साथ मनोरंजन करने की कोशिश करती है, लेकिन अपर्याप्त साबित होती है। फर्स्ट हॉफ में कहानी पूरी तरह से भटकती हुई लगती है, दूसरे हॉफ में थोड़ी रफ्तार पकड़ती है, लेकिन ज्यादा देर तक ध्यान नहीं खींच पाती। फिल्म की पटकथा लिखी है वेनू श्रीराम ने, जो कि बेहद कमजोर है। साथ ही सनमजीत तलवार द्वारा लिखे गए संवाद में कोई दम नहीं है। ना किसी किरदार में बारीकी दिखती है, ना भावनाओं में।

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    लेखन, निर्देशन से लेकर तकनीकि स्तर पर भी फिल्म में कोई नयापन नहीं दिखता है। हरि के. वेदांतम की सिनेमेटोग्राफी कहानी को मजबूत बनाने में नाकाम दिखती है। मनन अजय सागर की एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई हो सकती थी। फिल्म का संगीत दिया है अमाल मलिक, जावेद- मोहसीन और विपिन पाटवा ने, जो कि औसत है।

    अभिनय की बात करें तो अभिमन्यु दसानी ने 'मर्द को दर्द नहीं होता' और 'मीनाक्षी सुंदरेश्वर' के साथ एक अभिनेता के रूप में काफी प्रभावित किया था, लेकिन 'निकम्मा' में निराश करते हैं। इसका कुछ श्रेय कमजोर लेखन और निर्देशन को भी जाता है। शिल्पा शेट्टी लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर दिखी हैं और अपने किरदार के साथ पूरा न्याय करती हैं। सीमित समय में वह ध्यान आकर्षित करती हैं। शर्ली सेतिया के पास इस फिल्म में खूबसूरत लगने के अलावा कोई गुंजाइश नहीं थी। सचिन खेडेकर, समीर सोनी और विक्रम गोखले जैसे अभिनेताओं को निर्देशक ने पूरी तरह से साइड लाइन कर दिया है, जो कि निराशाजनक है।

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    कुल मिलाकर, 'निकम्मा' बहुत कुछ दिलचस्प परोस सकती थी यदि लेखन अधिक स्पष्ट रूप से ढ़ाला गया होता, किरदारों की बुनावट पर ध्यान दी गई होती और एडिटिंग चुस्त होती। फिल्म में हीरो विलेन से एक संवाद कहता है, "कुत्ता पाल ले, मगर वहम मत पालना".. 'निकम्मा' देखने के बाद, हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही निर्माता- निर्देशक भी इस वहम से ऊपर उठ जाएं कि साउथ फिल्मों की हर रीमेक सफल होगी। फिल्मीबीट की ओर से 'निकम्मा' को 1.5 स्टार।

    English summary
    Abhimanyu Dassani, Shirley Setia and Shilpa Shetty starrer action-comedy film Nikamma is released in theatres now. Directed by Shabbir Khan. Film lives upto it's name and disappoints.
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