Neeyat Movie Review: विद्या बालन की कमजोर फिल्मों में शामिल ये मर्डर- मिस्ट्री, बोर करती है सुस्त कहानी

निर्देशक- अनु मेनन
कलाकार- विद्या बालन, राम कपूर, नीरज काबी, शहाणा गोस्वामी, शशांक अरोड़ा, निकी अनेजा, प्राजक्ता कोली, दानेश रज़वी
अरबपति आशीष कपूर भारत से भागकर दूसरे देश में जा छिपा है, जहां उनके जन्मदिन के मौके पर, उन्हीं के घर में उनकी रहस्यमय मौत हो जाती है। पार्टी में मौजूद सीबीआई अफसर मीरा राव इसकी जांच के लिए आगे आती है, जहां उनके सामने कई कुटिल उद्देश्य उजागर होते हैं.. क्योंकि संदिग्ध आशीष कपूर के करीबी परिवार और दोस्त हैं।
'नीयत' और 'ब्लाइंड', इस शुक्रवार दो मर्डर मिस्ट्री फिल्में रिलीज हुई हैं। सोनम कपूर स्टारर ओटीटी पर लाई गई, जबकि विद्या बालन स्टारर ने बड़ी स्क्रीन पर दस्तक दी है। उम्मीद थी कि इस जॉनर में कुछ बेहतरीन कंटेंट देखने को मिलेगा। खासकर जब फिल्मों से सुजॉय घोष (ब्लाइंड) और अनु मेनन (नीयत) जैसे नाम जुड़े हों। लेकिन यहां निराशा हाथ लगती है।
कहानी
फिल्म की कहानी है अरबपति बिजनेसमैन आशीष कपूर की, जो भारतीय बैंकों से 20 हजार करोड़ का कर्जा लेकर भाग खड़ा हुआ है। दुनिया उसे ढूंढ़ रही है, और वो स्कॉटलैंड में समुद्र के किनारे बनी अपनी विला में अपने कुछ खास दोस्तों और परिवार वालों के साथ जन्मदिन की पार्टी सेलिब्रेट करता है। सभी करीबियों के साथ इस पार्टी में सीबीआई अफसर मीरा राव भी शामिल होती हैं। बाद में सभी को पता चलता है कि आशीष खुद को भारत सरकार को सौंपने वाले हैं और इसीलिए उन्होंने मीरा को बुलाया है। लेकिन कहानी में मोड़ तब आता है, जब अपनी ही पार्टी में आशीष की मौत हो जाती है। जाहिर है वहां मौजूद सभी लोग शक के घेरे में बंध जाते हैं। मीरा राव एक एक कर गुत्थियां सुलझाने की कोशिश करती है। कई खुलासे होते हैं, कई लोगों की दिल में छिपी नीयत सामने आती है, और भी जानें जाती हैं। लेकिन क्या इस खूनी खेल में मीरा हत्यारे को ढूंढ़ पाती है? इसी के इर्द गिर्द घूमती है कहानी।
निर्देशन व तकनीकी पक्ष
एक मर्डर- मिस्ट्री में सबसे ज्यादा जरूरत होती है, अच्छे कलाकार, संवाद और कहानी में एक गति की। यहां कहानी में कई संस्पेंस ढूंसने के चक्कर में यह सपाट दिखती है। किसी भी रहस्य पर आपको हैरानी नहीं होगी, किसी भी मिस्ट्री के सुलझने पर आपको जीत का अहसास नहीं होगा। नीयत में तमाम कलाकारों की फौज होते हुए भी, फिल्म पटकथा के स्तर पर बोर करती है। सिर्फ एक डिटेक्टिव ड्रामा की तरह इसे बुनने की बजाए, अनु मेनन ने एक ऐसी दुनिया बनाने की कोशिश की है, जो दर्शकों के लिए प्रासंगिक है। फिल्म का प्लॉट काफी मजबूत है, लेकिन स्क्रीनप्ले धीमा है। फिल्म के संवाद में कुछ भी प्रभावशाली नहीं रहा। एडम मॉस ने एडिटिंग टेबल पर फिल्म संभालने की काफी कोशिश की, वहीं सिनेमेटोग्राफर Andreas Neo ने स्कॉटलैंड में घटी एक रात की इस दास्तां को कैमरे में बढ़िया उतारा है।
अभिनय
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसके कलाकार हैं। जहां एक साथ विद्या बालन, राम कपूर, नीरज काबी, शहाणा गोस्वामी, शशांक अरोड़ा जैसे कलाकार हों, वहां इतनी उम्मीद तो आप रख ही सकते हैं। फिल्म की शुरुआत से ही सभी किरदारों को एक अलग अलग अंदाज में पेश किया गया था और अंत तक सबने वही पकड़कर रखा। फिल्म की राइटिंग में भले ही खामियां हैं, लेकिन सभी कलाकारों ने अपने किरदार को एक गहराई देने की कोशिश की है। खासकर करोड़पति बाप के बिगड़े बेटे के किरदार में शशांक काफी बेहतरीन लगे हैं। विद्या बालन कुछ मौकों पर काफी दमदार लगी हैं, लेकिन कहीं कहीं वो भी कमजोर लेखन के सामने घुटने टेकते नजर आईं। शेफाली शाह अपने कैमियो में सबसे ज्यादा प्रभावी लगी हैं और आर्कषित करती हैं।
रेटिंग
एक से बढ़कर कलाकारों को लिए ये फिल्म एक दमदार थ्रिलर साबित हो सकती थी। फिल्म का प्लॉट मजबूत है, लेकिन कमजोर पटकथा इसे औसत बनाकर छोड़ती है। विद्या बालन स्टारर 'नीयत' को फिल्मीबीट की ओर से 2 स्टार।


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