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Nanu Ki Jaanu Review: ट्रैफिक नियम तोड़े तो आपके घर आएगी ये भूत, चिमनी में रहेगी

By madhuri
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Rating:
1.5/5
Star Cast: अभय देयोल, पत्रलेखा, बृजेंद्र काला, मनु ऋषि, राजेश शर्मा
Director: फरज हैदर
Nanu Ki Jaanu Movie Review: Abhay Deol | Patralekhaa | Faraz Haider | FilmiBeat

जिन्हें नहीं पता हम बता दें कि, अभय देओल-पत्रलेखा स्टारर नानू की जानू का प्लॉट 2014 में आई मिस्किन की सुपरहिट तमिल फिल्म 'पिस्सासू' से काफी मिलता जुलता है। जहां ऑरिजनल फिल्म डार्क, रहस्यमय घटनाओं और दुर्भाग्यपूर्ण रोमांस के इर्द-गिर्द घूमती है। वहीं इस फिल्म में डायरेक्टर फराज हैदर ने दिल्ली के बैकड्रॉप और पंजाबीपन के साथ कॉमेडी का तड़का लगाया है। उन्होंने तमिल फिल्म की तरह अपने हीरो को वॉयलन बजाने वाले नहीं बल्कि कॉमेडी करने वाले गुंडे के किरदार में पेश किया है। तो क्या उनका ये फॉर्म्यूला काम आया? जवाब है- 'बिल्कुल नहीं'

कहानी नोएडा की है, जहां आनंद aka नानू (अभय देओल) और उनकी गैंग (मनु, ऋषि चढ्ढ़ा और कं) किराए के घर को जबरदस्ती खाली करवाने के स्पेशलिस्ट हैं। वहीं आपको वे बीच में 'तेरे ठुमके सपना चौधरी' गाने पर बिग बॉस फेम सपना चौधरी के साथ डांस करते हुए भी नजर आएंगे।

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आगे बढ़ते हुए, नानू की अच्छी-खासी जिंदगी में ट्विस्ट तब आता है जब उसकी कार से एक लड़की का एक्सिडेंट हो जाता है। ये लड़की है सिद्धी (पत्रलेखा)। नानू उसे अस्पताल लेकर दौड़ता है लेकिन उसके हाथों में ही सिद्धी दम तोड़ देती है।

उसी हादसे के बाद, नानू पहले जैसा मफिया नहीं रहता और उसे पता चलता है कि उसका फ्लैट हॉन्टेड है, उसके घर में चिमनी में रहने वाला भूत है। बाद में पता चलता है ये कोई और नहीं बल्कि सिद्धी ही है। जो कि उसके प्यार में पड़ जाती है और फिर उसके कारनामों को सुधारने लगती है।कार एक्सीडेंट में लड़की की मौत होती है और वो लड़की उसे मारने वाले लड़के के घर को भूतिया घर बना देती है क्योंकि वो उससे प्यार करती है। बहुत ही बकवास आइडिया मालूम होता है न?

दुर्भाग्य से, फराज हैदर ने इस फिल्म में पूरी तरह से कंफ्यूजन से भर दिया है। कई सारी चीजें एक साथ दिखाने के चक्कर में फिल्म काफी उलझाने वाली बन गई है।

मिस्किन की लव स्टोरी पिस्सासू का आइडिया काफी अलग और यूनीक थी लेकिन फराज अली की फिल्म नानू की जानू लव स्टोरी के साथ कॉमेडी दिखाने के चक्कर में पूरी तरह उलझकर रह गई है। जिसके चलते फिल्म ऑडिएंस से कनेक्ट करने में असफल हो जाती है।

ऑरिजनल फिल्म में बेहद शानदार क्लाइमैक्स है, वहीं दूसरी तरफ अभय देओल और पत्रलेखा की इस फिल्म में भूत अपने भूतियापन से बाहर निकर कर हेल्मेट पहनने, गाड़ी चलाते वक्त फोन यूज न करने और जिंदगी में 2 सेकेंड का महत्व समझने जैसे ट्रैफिक नियम फॉलो करने की सलाह देती दिखाई देगी। बता दें कि ये स्मोकिंग और ड्रिंकिग जैसी चीजों को पहचान लेती है। आखिरी के 15-20 मिनट में काफी मजाकिया हो जाती है।

परफॉर्मेंस की बात करें तो, अभय देओल शुरूआत तो काफी अच्छे लगे हैं लेकिन धीरे-धीरे प्लॉट की वजह से उनकी परफॉर्मेंस खराब होती जाती है। इंटरवल से पहले तक वे आम लोगों में से ही एक लगते हैं और ऑडिएंस सोच में पड़ जाती है कि अभय देओल ने ये फिल्म आखिर की क्यों!

पत्रलेखा अपने कैरेक्टर की तरह ही फिल्म में नजर ही नहीं आती हैं। फिल्म के आखिर में पत्रलेखा एक रोमैंटिक गाने में नजर आती हैं और फिर वे सेफ्टी एनाउंसमेंट करती हैं।

मनु ऋषि भी अभय देओल की तरह ही काफी अच्छी कॉमेडी करते हैं लेकिन फिल्म के सेकेंड हाफ में वे भी ट्रैक खो देते हैं। वहीं छोटे रोल के बाद भी ब्रजेंद्र काला काफी इंप्रेसिव लगे हैं। राजेश शर्मा इस फिल्म में पत्रलेखा के पिता के किरदार में हैं, वे भी अच्छे लगे हैं। वहीं हिमानी शिवपुरी से भी उम्मीदों पर खरी उतरी हैं।

इस फिल्म के गाने याद नहीं रहते, गाने फिल्म में फिलर्स की तरह है जो बस टाइम जोड़ने के लिए रखे गए हैं। एसआर सतीश कुमार की सिनेमैटोग्राफी कुछ खास नहीं है। वहीं मनु ऋषि के डायलॉग्स ओय लकी! लकी ओय का जादू रीक्रिएट नहीं कर पाए। फिल्म की एडिटिंग ठीक-ठाक है।

पूरी फिल्म की बात करें तो अभय देओल और पत्रलेखा की फिल्म नानू की जानू न ही आपको डराएगी और न ही आपको हंसाने में कामयाब होगी। यह हॉरर-कॉमेडी शुरुआत से लेकर क्लाइमैक्स तक बेहद खराब है। हॉरर में पंजाबी कॉमेडी का तड़का पूरी तरह से बेस्वाद रहा। फिर मत कहना कि हमने आपको वॉर्निंग नहीं दी!

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    English summary
    Naanu Ki Jaanu movie review: Abhay Deol-Patralekha's Nanu Ki Jaanu neither spooks you nor tickles your funny bone as promised. The horror-comedy suffers heavily from poor execution and a climax gone terribly wrong. Steer clear of this idiocracy unless that's what you want. The rest can take a chilled beer.

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