..................... Watching Tashan is Tension | बगैर कहानी की टेंशन है टशन - Hindi Filmibeat

बगैर कहानी की टेंशन है टशन

By Staff

Tashan
फिल्म देखना कितना टेंशन हो सकता है यदि यह जानना हो तो एक बार यशराज बैनर में बनी और लंबे इतंजार के बाद आयी निर्देशक विजय कृष्ण आचार्य की एक्शन कॉमेडी डिजा़नयर और पैकेज फिल्म टशन को जरूर देखें। कमाल है जब एक बेहतर लेखक-निर्देशक बनता है तो उसकी कहानी और पटकथा को क्या हो जाता है। विजय कृष्ण आचार्य ने धूम जैसी फिल्में लिखी हैं पर अपने निर्देशन वाली खुद की फिल्म में ही वे गच्चा खा गये। वे न कहानी को समेट पाए और न ही पटकथा में शामिल चरित्रों और पात्रों के साथ न्याय कर पाए। अपने पात्रों को नए लुक और उनकी बनावट की अनरियलिस्टक एप्रोच से वे उसे बंटी-बबली,ब्लफ मास्टर या यशराज की ही हाल में आने वाली डिज़ाईनर फिल्मों का घालमेल लेकर एक औसत सी मसाला फिल्म से आगे की फिल्म नहीं बना पाए।

फिल्म में कोई कहानी हो तो बात करें। कहानी में एक नहीं बल्कि चार चार चरित्र और पात्र हैं। जिनमें एक तरफ लड़कियों को केवल एक उत्पाद समझने वाला जिमी (सैफ) है और पैसा कमाना जिसका सपना है। तो दूसरी तरफ अंडरवर्ल्ड डॉन और अंग्रेजी सीखने के दीवाने भैया जी (अनिल कपूर) के हाथों मारे जाने वाले अपने पिता की हत्या का बदला लेने वाली पूजा (करीना कपूर) हैं। घटना चक्र घूमता है और पूजा और जिमी मिलकर भैया जी का पच्चीस करोड़ रूपया उड़ा लेते हैं और वह दोनों का दुश्मन बन जाता है।

इन सबसे अलग एक और आदमी बच्चन पांडे (अक्षय कुमार) भी है जो भैया जी को आदर्श मानता है,पर जब उसे भैया जी की हक़ीकत पता चलती है तो वह न केवल पूजा की बल्कि जिमी की मदद करने को भी तैयार हो जाता है। अब यह सवाल उठता है कि भैया जी से टशन करके मुसीबत कौन मोल ले। लेकिन टशन होता है और भैयाजी के साथ होता है,पर इसके लिए निर्देशक ने जो कहानी बुनी है वह पूरी फिल्म को टेंशन बना देती है।

फिल्म में पीयूष मिश्रा,विशाल और अन्विता दता गुप्तन के लिखे और विशाल शेखर के संगीत वाले करीब सात गीत और रीमिक्स हैं लेकिन सुखविंदर के गाए एक गीत दिल हारा को यदि छोड़ दिया जाए तो शीर्षक गीत टशन भी टेंशन ही पैदा करता है। हाँ,सभी गीतों की लोकेशन जरूर दिल को भाती हैं। पर सुदंर लोकेशन पर फिल्माए गए गीत भी सुंदर और प्रभावित करने वाले हों,यह कोई जरूरी तो नहीं।

समझ नहीं आता कि यह कॉमेडी फिल्म है या कामेडी एक्शन फिल्म। यह सही है कि सभी कलाकारों के डिज़ाईनर चरित्र उनके कपड़े और लुक देसी भाषा के साथ भी विदेशी और अक्की नरूला के फैशन के टशन के शिकार हैं पर इससे उनकी अभिनय क्षमता का क्या लेना देना। करीना ने बिकनी के साथ अपना सारा ध्यान एक्सपोजर पर लगाकर हमें झटका दिया है। अच्छी भली रेंज वाली अभिनेत्री केवल प्रर्दशन की चीज रह गयी।

अनिल कपूर ने क्या सोचकर नकारात्मतक भूमिका की होगी.पर यदि वे चाहते तो उसे एक जोकर खलनायक से देसी भाषा वाला एक अद्भुत खलनायक बना सकते थे। सैफ रेस से जितने आगे आए थे उतने ही पीछे चले गए और सबसे ज्यादा परेशानी है अक्षय को देखकर। सही है कि वे अब एक ऐसे अभिनेता है जिन पर सबसे ज्यादा पैसा लगाया जा रहा है पर यदि उन्होने टशन जैसी खुद को व्यर्थ में उडा देने वाली भूमिकाएं चुनी तो जल्दी ही उन्हें भी उनकी औकात पता चल जाएगी कि वे केवल थोड़े समय के लिए ही लोगों की भावनाओं और अपनी छवि से टशन ले सकते हैं। खबरदार अक्की... !


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