..................... Raise your Voice against all social evils | अन्याय के खिलाफ हल्ला बोल - Hindi Filmibeat

अन्याय के खिलाफ हल्ला बोल

By Staff

अगर आपने घायल, दामिनी, घातक और लज्जा फिल्में देखीं हैं तो राजकुमार संतोषी आपके लिए अंजाना नाम नहीं है. अपनी ऐसी फिल्मों के लिए प्रसिद्ध हैं जो अपने अंदर समाज के लिए संदेश लिए होती हैं. ऐसी ही एक सामाजिक फ़िल्म है हल्ला बोल जिसमें अजय देवगन, विद्या बालन, पंकज कपूर और दर्शन जरीवाला हैं. ये सभी मिलकर बलात्कार, शोषण और पैसे के दम पर गैर कानूनी काम करने वालों के खिलाफ हल्ला बोलते हैं.

कहानी:

एक छोटे शहर का लड़का अशफाक (अजय देवगन) जो बॉलीवुड में अपना मुकाम बनाना चाहता है. अपनी प्रतिभा को लोगों के सामने लाने के लिए वो सड़कों पर होने वाले शो में दाखिला लेता है. इस शो के कर्ता-धर्ता सिधू (पंकज कपूर) हैं जो पहले जाने-माने डाकू थे. लेकिन अब वो समाज सुधार में लगे हुए हैं. अपने शो के ज़रिये वो लोगों का सामाजिक कुरीति को ख़त्म करने का संदेश देते हैं.

अपनी मेहनत, लगन और काबलियत के बल पर अशफाक बॉलीवुड की बुलंदियों पर पहुँच जाता है, और अपना नाम बदल कर समीर खान रख लेता है. पैसा और शोहरत तो उसे हासिल हो जाती है लेकिन इसके साथ ही वो अपनों का प्यार खोने लगता है. इसके बाद एक पार्टी में ऐसा हादसा होता है जो अजय को असल जिंदगी में भी हीरो बना देता है.

समीक्षा:

राजकुमार संतोषी ने हल्ला बोल के ज़रिये यही संदेश देने का प्रयास किया है कि 'समाज में अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करो'. फ़िल्म में शुरुवाती 15-20 मिनट तो फ़िल्म इंडस्ट्री के बारे में दिखाया गया है और उन्हें देखकर ऐसा नहीं लगता कि कहानी अपनी पकड़ ले पायेगी. लेकिन इसके बाद कहानी अपनी पकड़ कुछ इस तरह लेती है कि आप हर वक्त ये सोचने पर मजबूर हो जायेंगे कि अब क्या होगा??

राजकुमार संतोषी ने बहुत ही बेहतरीन निर्देशन किया है. नेताओं के खिलाफ जो स्ट्रीट प्ले किया है उसमें पंकज कपूर बहुत ही सशक्त भूमिका में नज़र आए हैं. केवल एक ही कमी दिखाई दी इस फ़िल्म में कि इसका अंत बहुत ही दमदार हो सकता था जो कि नहीं है. हमेशा की तरह अजय देवगन का अभिनय शानदार रहा और उनके हाव-भाव बहुत ही प्रभावशाली रहे. विद्या बालन का छोटा सा किरदार रहा लेकिन उसने अपना सौ प्रतिशत दिया. पंकज कपूर तो वैसे ही मंझे हुए कलाकार है तो ये बात तो स्वाभाविक ही है कि उनके अभिनय में कहीं कोई भी कमी नहीं पाई गई. सुखविंदर का संगीत बहुत ही उम्दा है. सिनेमाटोग्राफी अच्छी है.

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