न बाम्बे दिखा न बैंकाक का पता
बोम्बे टू बैंकॉक फ़िल्म समीक्षा
नागेश कुकुनूर हैदराबाद ब्लूस, इकबाल और डोर के बाद बोम्बे टू बैंकॉक लेकर एक बार फ़िर दर्शकों के सामने हैं. इस फ़िल्म की स्क्रिप्ट नागेश ने ही लिखी है और निर्देशन भी उन्हीं का है. इंडस्ट्री का जाना माना नाम श्रेयस तलपडे और थाई ऐक्ट्रेस लीना क्रिस्तिंसन इसमें मुख्य भूमिका में हैं.
कहानी:
शंकर (श्रेयस तलपडे) एक कुक का काम करता है और बहुत सारा पैसा कमाने के लिए बहुत ही उत्सुक है. तभी वो सोचता है कि दुबई जाकर पैसा बनाया जाए. इसके लिए वो कुछ पैसों कि चोरी करता है लेकिन उस से एक गलती हो जाती है. भूल से वो ऐसे इंसान के पैसे चुरा लेता है जो डॉन है. और जल्दी में वो उन पैसों को दुबई जाने वाले डॉक्टरों के बॉक्स में रख देता है और भूल जाता है कि उसने किस डॉक्टर के बॉक्स में पैसे रखे हैं.
अबतो उसकी मजबूरी हो जाती है कि उसे उन डॉक्टरों के साथ ही रहना पड़ेगा जिस से वो उन पैसों का पता कर सके. तभी उसकी मुलाकात जस्मीन (लीना क्रिस्तिंसन) से होती है जो एक मसाज पार्लर में काम करती है. शंकर उसे पसंद करने लगता है लेकिन सबसे बड़ी अड़चन ये रहती है कि जस्मीन जो भी कहती है वो शंकर को बिल्कुल समझ में नहीं आता.
क्या शंकर जस्मीन से अपने प्यार का इजहार कर पायेगा ??? क्या वो पैसों वाला बक्सा खोज पायेगा ??? क्या वो डॉन से बच पायेगा ??? जानने के लिए देखें बोम्बे टू बैंकॉक.
फ़िल्म समीक्षा:
नागेश की अब तक कि फिल्मों मी सबसे कमज़ोर फ़िल्म इसे कहा जा सकता है. जिस तरह कि फ़िल्म बनाने में नागेश को महारथ हासिल है वो इस फ़िल्म में दिखाई नहीं दिया. इस फ़िल्म में ऐसा कुछ भी हटकर नहीं है जो आम फिल्मों में नहीं होता. दर्शकों के हिसाब से कहानी बहुत ही बोरिंग है. श्रेयस के अजीबो गरीब सपने समझ में नहीं आए. इस के साथ ही कहानी का अंत मजेदार नहीं है. दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि फ़िल्म को झेलना पड़ेगा.
सुदीप चटर्जी द्वारा की गई सिनेमाटोग्रफी बहु ख़राब है. थाईलैंड जैसे खूबसूरत देश कि खूबसूरती को कैमरे ने बिल्कुल ही कैद नहीं किया. संगीत में भी कोई दम नहीं दिखा. केवल जो टाइटल ट्रैक है वही कुछ ठीक लगा है.
हमेशा के तरह श्रेयस ने अपना बेहतरीन दिया है और उनकी एक्टिंग में कहीं कोई कमी नज़र नहीं आई. दर्शकों ने उनकी एक्टिंग को बहुत सराहा. लीना केवल देखने में ही ठीक हैं. उनके चेहरे पर कोई हाव भाव नहीं दिखे. विजय मौर्या जो कि डॉन बने हैं का अभिनय सराहनीय है. नसीरुद्दीन शाह ऐसी जगह दिखें हैं जहाँ पर उनकी कोई ज़रूरत नहीं है.


Click it and Unblock the Notifications