तेरे संग: प्रभाव डालने में असफल

कलाकार: रूसलान मुमताज, शीना शाहबादी, सतीश कौशिक, नीना गुप्ता।
फिल्म के पोस्टर में एक किशोरी को गर्भावस्था में देखकर ऑस्कर विजित हॉलीवुड फिल्म जुनो की याद आती है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह प्रीति जिंटा की फिल्म क्या कहना जैसी भी नहीं है। यह एक किशोरी के गर्भवती होने पर केन्द्रित है जो अपेक्षा के अनुरूप प्रभाव डालने में असफल रही है।
माही (शीना) अमीर मां बाप (रजत कपूर और नीना गुप्ता) की इकलौती संतान है। वह 15 वर्ष की है उसकी दोस्ती कबीर उर्फ कुक्कू (रूसलान) से हो जाती है जो कि 17 वर्ष का है। वह गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है उसके पिता ऑटो चालक (सतीश कौशिक) और मां (सुष्मिता मुखर्जी) एक साधारण गृहणी है। माही और कुक्कू की दोस्ती प्यार में बदल जाती है। नए साल की पार्टी में नशे में दोनों अपने होश खो बैठतें है और शारीरिक संबंध बना लेतें है। माही गर्भवती हो जाती है। समस्या तब आती है जब वह अपने बच्चे को पैदा करने का निर्णय लेती है। सभी उसके खिलाफ चले जाते है। वह बच्चा पैदा करने के लिए कुक्कू का साथ चाहतीं है। फिल्म उन दोनों के संघर्ष को बयां करती है।
सतीश कौशिक ने निर्देशन से बढिया अभिनय कर दिखाया है। जीतेंद्र जैन, संजय चौहान और अनुज कपूर का स्क्रीनप्ले कुछ खास नहीं लगा। शीना का चरित्र इस तरह है जिससे लगाव हो जाएगा लेकिन उसके संवाद को बच्चों की तरह बुलवाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कुछ समय बाद उसकी आवाज सुनना अच्छा नहीं लगेगा। फिल्म का संगीत कुछ खास नहीं है।
रूसलान मुमताज ने अच्छा काम किया है। शीना की संवाद अदायगी ने काम खराब कर दिया। रजत कपूर, नीना गुप्ता, सुष्मिता मुखर्जी और अनुपम खेर ने अपने छोटे रोल में प्रभावत किया है।
कुल मिलाकर तेरे संग को औसत फिल्म की सूची में रखा जा सकता है जिसे देखने के लिए कुछ खास दर्शक ही थियेटर की ओर रूख करेंगे।


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